
क्लास 10 CBSE इंग्लिश में 95+ कैसे लाते हैं टॉपर्स? क्या चीज दिलाती है हाई स्कोर
क्लास 10 इंग्लिश में 95+ कोई जादू नहीं, यह सिर्फ समझदारी, सही फॉर्मैट, छोटी लाइनें, साफ जवाब और आखिरी मिनट की रिविजन का खेल है। जो बच्चा पेपर को समझता है, वही टॉपर बनता है।
हर साल लाखों बच्चे CBSE क्लास 10 की इंग्लिश परीक्षा में बैठते हैं, लेकिन मुश्किल से कुछ ही छात्र 95 से ऊपर स्कोर कर पाते हैं। टीचर्स का कहना है कि ये टॉपर्स जरूरी नहीं कि अंग्रेज़ी में बहुत माहिर हों; असल खेल उनका ‘एग्जाम स्मार्ट’ होना है। वे जानते हैं कि पेपर कैसे बनता है, किस चीज पर नंबर मिलते हैं और एवाल्यूएटर किस तरह चेक करता है। यही वजह है कि उनकी कॉपी बाकी बच्चों से अलग दिखती है।
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, अनुभवी टीचर्स का मानना है कि टॉपर्स सबसे पहले पेपर को ब्लॉक्स में बांटकर पढ़ते हैं, न कि पूरे सब्जेक्ट को एक साथ। वे जानते हैं कि राइटिंग सेक्शन के फॉर्मैट, लेटर, नोटिस, एनालिटिकल पैराग्राफ, सीधे-सीधे नंबर दिलाते हैं। दिल्ली की इंग्लिश टीचर एस. अरोड़ा का कहना है, “राइटिंग सेक्शन में आधी लड़ाई फॉर्मैट से ही जीती जाती है। सिंपल भाषा और परफेक्ट फॉर्मैट आपको फुल मार्क्स दिला सकता है।” यही वजह है कि टॉपर्स अपने टेम्पलेट पहले से तैयार रखते हैं और एग्ज़ाम वाले दिन कोई एक्सपेरिमेंट नहीं करते।
ज्यादा नंबर पाने के लिए क्या करते हैं टॉपर्स
रीडिंग पैसेज में भी उनका तरीका सबसे अलग होता है। टॉपर्स पहले सवाल पढ़ते हैं और उसके बाद पैसेज। इससे उन्हें जवाब ढूंढने में समय कम लगता है और वे लंबी लाइनें कॉपी करने की गलती नहीं करते। चेन्नई की टीचर आर. मीनाक्षी कहती हैं, “ज्यादातर बच्चे पूरा वाक्य कॉपी कर देते हैं, जबकि मार्किंग स्कीम समझ पर नंबर देती है, कॉपी-पेस्ट पर नहीं।” टॉपर्स हर जवाब को अपने शब्दों में छोटा और साफ लिखते हैं,यही उनकी सबसे बड़ी ताकत है।
राइटिंग सेक्शन की बात करें तो टॉपर्स बड़े-बड़े शब्दों के पीछे नहीं भागते। सीधी, साफ और स्ट्रक्चर्ड भाषा उनकी खासियत है। एक छोटा इंट्रो, बीच में साफ पॉइंट्स और आखिर में सधी हुई कन्क्लूजन पर आना। वे की-लाइनें अंडरलाइन करते हैं, छोटे वाक्य लिखते हैं ताकि ग्रामर की गलती न हो, और शब्द सीमा क्रॉस नहीं करते ताकि टॉपिक से भटकाव न हो।
लिट्रेचर सेक्शन पर कहां देना होगा ध्यान?
लिट्रेचर सेक्शन में ज्यादातर बच्चे कहानी दोहरा देते हैं,यहीं सबसे ज्यादा मार्क्स कटते हैं। बेंगलुरु की एवाल्यूएटर वी. सेन कहती हैं, “मैं हर बच्चे से कहती हूं,कहानी मत सुनाओ, सवाल का जवाब दो। टेक्स्ट से एक छोटी लाइन लो, उसका मतलब समझाओ और खत्म।” टॉपर्स इसी नियम पर चलते हैं। वे हर जवाब को तीन हिस्सों में बांटते हैं,पॉइंट रखो, टेक्स्ट से छोटी सी लाइन जोड़ो, दो लाइन में उसका मतलब लिखो और आगे बढ़ जाओ।
टीचर्स का कहना है कि तीन गलतियां ऐसी हैं जो सबसे ज्यादा नंबर काटती हैं,फॉर्मैट गड़बड़ करना, लंबे वाक्य लिखकर गलती करना और कहानी सुनाना। टॉपर्स इन गलतियों से बचते हैं और आखिरी 10-15 मिनट सिर्फ रिविजन में लगाते हैं। यही वह हिस्सा है जहां वे छोटी-छोटी ग्रामर की गलतियां, गलत स्पेलिंग और मिसिंग अंडरलाइनिंग सुधार लेते हैं,और यही सुधार कई बार 90 के ऊपर से सीधा 95+ दिला देता है।





