CBSE के OSM विवाद के बाद चेयरमैन राहुल सिंह का तबादला, 1996 बैच के हैं IAS अधिकारी
केंद्र सरकार ने सीबीएसई के चेयरमैन (अध्यक्ष) राहुल सिंह और बोर्ड के सेक्रेटरी (सचिव) का तत्काल प्रभाव से तबादला कर दिया है।

CBSE: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की कक्षा 12वीं की परीक्षा के मूल्यांकन और पुनर्मूल्यांकन पोर्टल को लेकर मचे देशव्यापी बवाल के बीच केंद्र सरकार ने एक बेहद सख्त और बड़ा कदम उठाया है। बोर्ड के नए 'ऑन-स्क्रीन मार्किंग' (OSM) सिस्टम और री-इवैल्यूएशन पोर्टल में आई गंभीर तकनीकी खामियों के बाद सरकार ने कड़ा एक्शन लेते हुए सीबीएसई के चेयरमैन (अध्यक्ष) राहुल सिंह और बोर्ड के सेक्रेटरी (सचिव) का तत्काल प्रभाव से तबादला कर दिया है। छात्रों के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था की शुचिता को देखते हुए इसे सरकार की अब तक की सबसे बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई माना जा रहा है।
कौन हैं CBSE के चेयरमैन राहुल सिंह?
राहुल सिंह बिहार कैडर के 1996 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के बेहद सम्मानित अधिकारी हैं। उन्हें पहली बार 13 मार्च, 2024 को सीबीएसई के अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया था। केंद्र सरकार की ओर से पिछले साल अगस्त 2025 में उनका कार्यकाल 2 वर्ष के लिए बढ़ाया गया था।
संसद की सख्ती के कुछ ही घंटों बाद गिरी गाज
यह बड़ी कार्रवाई उस समय हुई जब ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) विवाद ने संसद का दरवाजा खटखटाया था। शिक्षा, महिला, बाल, युवा और खेल संबंधी संसद की स्थायी समिति ने इस पूरे मामले को बेहद गंभीरता से लिया। समिति ने कॉपियों के मूल्यांकन में हुई भारी गड़बड़ियों, ब्लर (धुंधली) कॉपियों और तकनीकी खामियों पर जवाब मांगने के लिए केंद्रीय शिक्षा सचिव और सीबीएसई के चेयरमैन को समन भेजकर तलब किया था। संसदीय समिति और छात्रों के बढ़ते आक्रोश के बीच सरकार ने बिना समय गंवाए बोर्ड के शीर्ष नेतृत्व को बदलने का फैसला कर लिया।
क्या था पूरा ओएसएम और पोर्टल विवाद?
इस साल सीबीएसई ने कक्षा 12वीं की लगभग 1.25 करोड़ उत्तर पुस्तिकाओं के डिजिटल मूल्यांकन के लिए 'ऑन-स्क्रीन मार्किंग' (OSM) व्यवस्था और एक निजी कंपनी 'कोएम्प्ट एडुटेक' (Coempt EduTeck) के साथ नया सिस्टम लागू किया था। लेकिन परिणाम आते ही छात्रों ने कॉपियों की चेकिंग में भारी गड़बड़ी के आरोप लगाए। छात्रों का दावा था कि सही उत्तरों और बहुविकल्पीय प्रश्नों (MCQs) को गलत मार्क किया गया था तथा कई पन्ने बिना जांचे ही छोड़ दिए गए थे।
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