CBSE Revaluation: 1-2 नहीं, 21 अंक का सीधा उछाल, किसी के 500 में 500 आए; CBSE री-चेकिंग में बढ़े गजब के नंबर
CBSE परीक्षा की कॉपियों की चेकिंग में अजब मंजर सामने आया है, जहां री-चेकिंग के बाद कई छात्रों के नंबरों में बड़ा उछाल देखने को मिला है और कुछ ने पूरे 100 अंक हासिल किए हैं।

बोर्ड परीक्षाओं को लेकर हमारे देश में हमेशा से एक अलग ही तरह का माहौल रहता है। बच्चे दिन-रात एक करके पढ़ाई करते हैं, माता-पिता उनकी हर जरूरत पूरी करने के लिए अपनी कई नींदें कुर्बान कर देते हैं। जब नतीजे आते हैं, तो यह सिर्फ एक छात्र का रिजल्ट नहीं होता, बल्कि पूरे परिवार की बरसों की मेहनत का फल होता है। लेकिन जरा सोचिए कि क्या हो जब आपको पता चले कि जिस सिस्टम पर आपने आंख मूंदकर भरोसा किया, उसी CBSE बोर्ड की कॉपियों की चेकिंग में एक ऐसा मंजर सामने आया है जिसे जानने के बाद आपको बेहद हैरानी होगी। बता दें कि पहली बार में जिन होनहार छात्रों को मामूली नंबर देकर टरका दिया गया था, जब उन्होंने री-चेकिंग का रास्ता चुना तो उनके नंबर इस कदर बढ़े कि देखने वालों की आंखें खुली की खुली रह गईं।
दूसरे चेकिंग में इतना भारी अंतर क्यों?
इस साल CBSE के छात्रों ने री-चेकिंग के लिए इतनी बड़ी संख्या में आवेदन किया है कि इसने अपने आप में एक नया रिकॉर्ड बना दिया है। सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात तो यह है कि दोबारा कॉपी चेक होने के बाद कई छात्रों के नंबर सीधे 100 फीसदी तक पहुंच गए हैं। जाहिर सी बात है, जिन बच्चों को उनका हक और सही नंबर मिले हैं, वो बहुत बधाई के पात्र हैं। यह उनकी अपनी मेहनत की कमाई है। लेकिन यह पूरी स्थिति एक बहुत बड़ा और कड़वा सवाल पैदा करती है कि आखिर पहली चेकिंग और दूसरी चेकिंग के बीच नंबरों का इतना भारी-भरकम फासला कैसे आ सकता है?
अवनी केजरीवाल के आए 500 में 500 अंक
इस बात की गंभीरता को समझने के लिए हम रांची की रहने वाली छात्रा अवनी केजरीवाल का उदाहरण लेते हैं। जब 12वीं क्लास के नतीजे घोषित हुए, तो अवनी ने 95.2% अंक हासिल किए थे । आमतौर पर इतने नंबर देखकर कोई भी छात्र खुशी से झूम उठेगा लेकिन अवनी को बहुत अच्छी तरह मालूम था कि उसने अंग्रेजी और बिजनेस स्टडीज के पेपर में इससे कहीं ज्यादा बेहतर लिखा है। उसे साफ लग रहा था कि ये नंबर उसकी असली काबिलियत के हिसाब से काफी कम हैं। बिना देर किए उसने री-इवैल्यूएशन के लिए अर्जी डाल दी। जब सुधरे हुए नतीजे सामने आए, तो मानो कोई चमत्कार हो गया। अवनी का स्कोर पांचों विषयों में पूरे 500 में से 500 हो गया। आप खुद अंदाजा लगाइए, जिस विषय (अंग्रेजी) में उसे पहली बार में सिर्फ 81 नंबर दिए गए थे, वो दोबारा चेकिंग में बढ़कर सीधे 100 हो गए। किसी भाषा वाले सब्जेक्ट में परफेक्ट 100 लाना वैसे ही बहुत मुश्किल माना जाता है, और 19 नंबर का यह जादुई फर्क किसी भी छात्र का भविष्य रातों-रात बदल सकता है।
1-2 नहीं 21 नंबर का सीधा उछाल
वहीं दिल्ली के रहने वाले कुशल जैन की कहानी भी कुछ कम हैरान करने वाली नहीं है। कुशल को फिजिक्स और मैथ्स दोनों में 97 नंबर का शानदार स्कोर मिला था, लेकिन केमिस्ट्री में उसे सिर्फ 79 नंबर थमा दिए गए। उसे पूरा यकीन था कि साल भर केमिस्ट्री में उसकी परफॉर्मेंस बेहतरीन रही है और फाइनल में इतने कम नंबर आना मुमकिन ही नहीं है। जब उसने केमिस्ट्री की आंसर शीट री-चेक करवाई, तो उसके 79 नंबर छलांग मारकर पूरे 100 हो गए। जरा ध्यान दीजिए, यह कोई 1-2 नंबर की छोटी-मोटी चूक नहीं है। 21 नंबर का यह सीधा उछाल किसी पहाड़ जैसा है। सिर्फ इसी एक सुधार की वजह से कुशल का एग्रीगेट प्रतिशत 91% से उछलकर 98% हो गया।
सीबीएसई ओएसएम पर हुआ था बवाल
अब आप ही तय कीजिए कि आखिर एक ही कॉपी को जांचने वाले दो अलग-अलग टीचर्स की नजर में इतना बड़ा फर्क कैसे आ सकता है? बोर्ड को हर हाल में अपने स्तर पर यह आकलन करना चाहिए कि ऐसी भारी गलतियां आखिर क्यों और कैसे हो रही हैं। अगर हम पूरे आंकड़ों की बात करें तो स्थिति और भी ज्यादा चिंताजनक नजर आती है। इस बार 4 लाख से ज्यादा छात्रों ने अपनी आंसर शीट की स्कैन कॉपी मांगी है, जबकि 1.6 लाख से ज्यादा बच्चों ने वेरिफिकेशन या फिर री-इवैल्यूएशन के लिए सीधा अप्लाई किया है। गौरतलब है कि यह सारा बवाल तब शुरू हुआ जब CBSE के नए ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम (ओएसएम) को लेकर कई तरह की शिकायतें और तकनीकी खामियां सामने आने लगीं।
यह बात पूरी तरह सच है कि री-इवैल्यूएशन का नियम इसीलिए बनाया गया है ताकि अनजाने में हुई गलतियों को सुधारा जा सके। जिन छात्रों को इसका फायदा मिला, उनकी काबीलियत पर कोई शक नहीं है। लेकिन यह पूरी बेतरतीब प्रक्रिया वाकई सवालों के घेर में जिस पर लाखों बच्चों का भविष्य टिका है। जब नंबरों में इतना बड़ा और नाटकीय बदलाव देखने को मिलता है, तो पहली बार की गई चेकिंग की सच्चाई पर गंभीर सवाल उठना बिलकुल लाजमी है।
लेखक के बारे में
Himanshu Tiwariशॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।
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हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।
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हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।
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काम से इतर हिमांशु की गहरी रुचि समकालीन इतिहास, समानांतर सिनेमा और दर्शन में रही है। राजनीति और विदेश नीति पर पढ़ना-लिखना उन्हें विशेष रूप से पसंद है। इसी रुचि के चलते उन्होंने दो लोकसभा चुनावों और दर्जनों विधानसभा चुनावों की कवरेज की, जहां राजनीति को उन्होंने बेहद नजदीक से देखा और समझा। चुनावी आंकड़ों की बारीकियां, नेताओं के भाषण, जमीनी मुद्दे और जनता की प्रतिक्रियाएं, इन सभी पहलुओं को समेटते हुए उन्होंने सैकड़ों खबरें और विश्लेषण तैयार किए, जो राजनीतिक प्रक्रिया की गहरी समझ को दर्शाते हैं।
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