बोर्ड परीक्षा से पहले CBSE का बड़ा अलर्ट, वायरल पेपर और लीक की खबरों से रहें सावधान
बोर्ड परीक्षाओं से पहले फैलने वाली झूठी खबरों से सतर्क रहना ही छात्रों की सबसे ज्यादा जरूरी है। इसकी के मद्देनजर सीबीएसई की तरफ से एडवाइजरी जारी की गई है।

17 फरवरी 2026 से देशभर में कक्षा 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं शुरू होने जा रही हैं। परीक्षा का समय हर छात्र के लिए बेहद अहम होता है, लेकिन इसी दौरान कुछ शरारती तत्व अफवाहों का सहारा लेकर माहौल बिगाड़ने की कोशिश करते हैं। इस बार भी परीक्षा शुरू होने से पहले ऐसी भ्रामक खबरों को लेकर सतर्क रहने की अपील की गई है।
Central Board of Secondary Education ने साफ कहा है कि हर साल परीक्षा के दौरान कुछ लोग सोशल मीडिया के जरिए झूठी जानकारी फैलाने की कोशिश करते हैं। इनमें सबसे ज्यादा फैलने वाली अफवाहें प्रश्नपत्र लीक होने या कथित प्रश्नपत्र वायरल होने से जुड़ी होती हैं। ऐसी खबरें न केवल गलत होती हैं बल्कि छात्रों के मन में डर, भ्रम और तनाव भी पैदा करती हैं।
अफवाहें कैसे बनती हैं परेशानी की वजह
बोर्ड के अनुसार, परीक्षा के दिनों में सोशल मीडिया पर कई तरह के संदेश तेजी से फैलते हैं। कुछ संदेशों में दावा किया जाता है कि असली प्रश्नपत्र पहले ही बाहर आ गया है। कई बार नकली प्रश्नपत्र बनाकर उन्हें असली बताकर साझा किया जाता है। छात्र जब ऐसे संदेश देखते हैं तो घबरा जाते हैं और अपनी तैयारी पर ध्यान देने के बजाय इन झूठी बातों में उलझ जाते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की अफवाहें छात्रों का आत्मविश्वास कमजोर करती हैं। कई छात्र पढ़ाई छोड़कर वायरल सामग्री को सही मानने लगते हैं, जिससे उनकी परीक्षा की तैयारी प्रभावित होती है।
बोर्ड ने दिए सख्त निर्देश
बोर्ड ने छात्रों, अभिभावकों और स्कूलों से स्पष्ट रूप से कहा है कि किसी भी अपुष्ट खबर पर भरोसा न करें। बिना जांचे परखे किसी भी संदेश को आगे भेजना गलत है और इससे अनावश्यक घबराहट फैलती है। ऐसी गतिविधियों को परीक्षा व्यवस्था को बाधित करने की कोशिश माना जाएगा और नियमों के अनुसार कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।
बोर्ड ने यह भी भरोसा दिलाया है कि परीक्षाओं को निष्पक्ष और सुरक्षित तरीके से कराने के लिए मजबूत व्यवस्थाएं की गई हैं। प्रश्नपत्रों की गोपनीयता बनाए रखने से लेकर परीक्षा केंद्रों तक सुरक्षा के सभी जरूरी कदम पहले की तरह लागू किए गए हैं।
छात्रों के लिए सबसे जरूरी क्या
इस समय छात्रों के लिए सबसे महत्वपूर्ण है अपनी तैयारी पर ध्यान देना और समय का सही उपयोग करना। किसी भी वायरल संदेश, स्क्रीनशॉट या कथित प्रश्नपत्र को देखकर विचलित होने की जरूरत नहीं है। परीक्षा का परिणाम केवल मेहनत और नियमित अभ्यास से तय होता है, न कि सोशल मीडिया पर चल रही बातों से।
अभिभावकों की भूमिका भी यहां अहम हो जाती है। वे बच्चों को मानसिक रूप से शांत रखें और उन्हें समझाएं कि परीक्षा से जुड़े किसी भी अपडेट के लिए केवल आधिकारिक सूचना ही मान्य होती है।
सही जानकारी कहां से मिलेगी
बोर्ड ने सभी हितधारकों को सलाह दी है कि वे केवल आधिकारिक माध्यमों से जारी सूचनाओं पर ही भरोसा करें। किसी भी तरह की जानकारी, स्पष्टीकरण या अपडेट के लिए बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट या क्षेत्रीय कार्यालय से संपर्क किया जा सकता है। मुख्यालय New Delhi सहित सभी क्षेत्रीय कार्यालय इस दौरान सक्रिय रहेंगे और जरूरत पड़ने पर जानकारी उपलब्ध कराएंगे।
सोशल मीडिया पर जिम्मेदारी भी जरूरी
परीक्षा के समय हर व्यक्ति की जिम्मेदारी बनती है कि वह गलत जानकारी को फैलने से रोके। यदि कोई संदिग्ध संदेश मिले तो उसे आगे भेजने के बजाय नजरअंदाज करें। जागरूकता ही ऐसी अफवाहों को रोकने का सबसे प्रभावी तरीका है।
परीक्षा का माहौल सकारात्मक रखने की अपील
बोर्ड ने कहा है कि परीक्षा केवल ज्ञान का आकलन नहीं बल्कि धैर्य और अनुशासन की भी परीक्षा होती है। ऐसे समय में सकारात्मक माहौल बनाए रखना जरूरी है ताकि छात्र बिना तनाव के अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर सकें। इसलिए समाज के हर वर्ग से सहयोग की अपेक्षा की गई है कि वे अफवाहों से दूर रहें और विद्यार्थियों का मनोबल बढ़ाएं।
लेखक के बारे में
Himanshu Tiwariशॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।
परिचय एवं अनुभव
हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।
लेखन की सोच और मकसद
हिमांशु के लिए पत्रकारिता का मतलब सिर्फ सूचना देना नहीं है, बल्कि पाठक को सोचने की जगह देना भी है। खासकर करियर और शिक्षा के क्षेत्र में वह यह मानते हैं कि एक गलत या अधूरी खबर किसी छात्र की पूरी तैयारी को भटका सकती है। इसलिए उनके लेखन में सरल भाषा, ठोस तथ्य और व्यावहारिक नजरिया हमेशा प्राथमिकता में रहता है। उनकी कोशिश रहती है कि पाठक को सिर्फ खबर की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी समझ आए कि उस खबर का उसके जीवन और भविष्य से क्या रिश्ता है।
शिक्षा और अकादमिक पृष्ठभूमि
हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।
रुचियां और निजी झुकाव
काम से इतर हिमांशु की गहरी रुचि समकालीन इतिहास, समानांतर सिनेमा और दर्शन में रही है। राजनीति और विदेश नीति पर पढ़ना-लिखना उन्हें विशेष रूप से पसंद है। इसी रुचि के चलते उन्होंने दो लोकसभा चुनावों और दर्जनों विधानसभा चुनावों की कवरेज की, जहां राजनीति को उन्होंने बेहद नजदीक से देखा और समझा। चुनावी आंकड़ों की बारीकियां, नेताओं के भाषण, जमीनी मुद्दे और जनता की प्रतिक्रियाएं, इन सभी पहलुओं को समेटते हुए उन्होंने सैकड़ों खबरें और विश्लेषण तैयार किए, जो राजनीतिक प्रक्रिया की गहरी समझ को दर्शाते हैं।
विशेषज्ञताएं
- शिक्षा, करियर और नौकरियों से जुड़ी खबरों पर विशेष रुचि और निरंतर लेखन
- नीट, जेईई और राज्यवार बोर्ड परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों, बदलावों और परिणामों पर गहन फोकस
- UPSC, UPPSC, MPPSC, BPSC, RPSC और JPSC जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं की तैयारी, पैटर्न और नीतिगत पहलुओं पर पैनी नजर
- अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और विदेश नीति से जुड़े विषयों का विश्लेषणात्मक लेखन
- राजनीति, चुनावी आंकड़ों और जमीनी मुद्दों पर सरल और तथ्यपरक एक्सप्लेनर तैयार करने का अनुभव


