अब पन्ना नहीं पलटेंगे एग्जामिनर, स्क्रीन पर होगी 12वीं की कॉपियों की जांच; 2026 से CBSE बोर्ड में बड़ा बदलाव

Feb 12, 2026 06:25 pm ISTHimanshu Tiwari लाइव हिन्दुस्तान
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कक्षा 12 की उत्तर पुस्तिकाओं की जांच अब ऑन-स्क्रीन मार्किंग से होगी। शिक्षक स्कूल बैठे-बैठे मूल्यांकन किया करेंगे, इसके लिए बोर्ड की तरफ से तमाम व्यवस्थाएं की गई हैं।

अब पन्ना नहीं पलटेंगे एग्जामिनर, स्क्रीन पर होगी 12वीं की कॉपियों की जांच; 2026 से CBSE बोर्ड में बड़ा बदलाव

सीबीएसई बोर्ड ने 2026 से परीक्षा प्रणाली में एक बड़ा और आधुनिक बदलाव करने का फैसला लिया है। अब कक्षा 12 की बोर्ड कॉपियों की जांच पारंपरिक तरीके से नहीं, बल्कि कंप्यूटर स्क्रीन पर की जाएगी। इस नई व्यवस्था को ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) कहा जा रहा है, जिसके जरिए उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन करके डिजिटल रूप में शिक्षकों को भेजा जाएगा और वे उन्हें कंप्यूटर पर ही जांचेंगे। यह कदम बोर्ड ने मूल्यांकन प्रक्रिया को ज्यादा तेज, पारदर्शी और गलती-रहित बनाने के लिए उठाया है। वहीं, कक्षा 10 की कॉपियों की जांच फिलहाल पहले की तरह ही हाथ से, यानी फिजिकल तरीके से ही जारी रहेगी।

क्या है ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम?

ऑन-स्क्रीन मार्किंग एक डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली है, जिसमें छात्रों की उत्तर पुस्तिकाएं पहले स्कैन की जाती हैं। इसके बाद ये कॉपियां सुरक्षित ऑनलाइन सिस्टम पर अपलोड होती हैं और शिक्षक कंप्यूटर पर उन्हें देखकर अंक देते हैं। इस सिस्टम में सॉफ्टवेयर खुद ही कुल अंक जोड़ देता है, जिससे टोटलिंग की गलती की संभावना खत्म हो जाती है। अभी तक कई बार हाथ से जोड़ने में गलती हो जाती थी, जिससे छात्रों को बाद में वेरिफिकेशन के लिए आवेदन करना पड़ता था।

क्यों किया जा रहा है यह बदलाव?

सीबीएसई का कहना है कि यह बदलाव शिक्षा प्रणाली को डिजिटल और आधुनिक बनाने की दिशा में एक अहम कदम है। इससे कई फायदे होंगे जिसमें कॉपी जांच में होने वाली जोड़-घटाव की गलतियां खत्म होंगी, मूल्यांकन प्रक्रिया ज्यादा पारदर्शी बनेगी, रिजल्ट तैयार करने में कम समय लगेगा, मैनुअल काम कम होगा जिससे पूरी प्रक्रिया व्यवस्थित होगी।

शिक्षक अब अपने स्कूल से ही जांच सकेंगे कॉपियां

इस नए सिस्टम की एक खास बात यह है कि शिक्षकों को अब कॉपी जांचने के लिए किसी मूल्यांकन केंद्र पर जाने की जरूरत नहीं होगी। वे अपने ही स्कूल में बैठकर, नियमित काम करते हुए कॉपियों का मूल्यांकन कर सकेंगे। इससे समय और यात्रा खर्च दोनों की बचत होगी और ज्यादा शिक्षक इस प्रक्रिया में शामिल हो सकेंगे।

भारत ही नहीं, विदेशों के शिक्षक भी जुड़ सकेंगे

सीबीएसई के 31,000 से ज्यादा स्कूल भारत में और 26 देशों में जुड़े हुए हैं। ऑन-स्क्रीन मार्किंग लागू होने के बाद इन सभी स्कूलों के शिक्षक डिजिटल तरीके से मूल्यांकन में भाग ले सकेंगे। इससे कॉपी जांच का दायरा बढ़ेगा और मूल्यांकन का काम तेजी से पूरा होगा।

कितने छात्र देंगे 2026 में बोर्ड परीक्षा?

सीबीएसई की 2026 की बोर्ड परीक्षाएं 17 फरवरी से 10 अप्रैल तक आयोजित की जा रही हैं। इन परीक्षाओं में लगभग 46 लाख छात्र शामिल होंगे, जो देश और विदेश के 8000 से ज्यादा परीक्षा केंद्रों पर परीक्षा देंगे।

स्कूलों को क्या-क्या तैयारी करने को कहा गया है?

इस नई प्रणाली को लागू करने के लिए बोर्ड ने स्कूलों को जरूरी तकनीकी सुविधाएं तैयार रखने को कहा है। इसके तहत स्कूलों में कंप्यूटर लैब, स्थिर इंटरनेट कनेक्शन (कम से कम 2 Mbps), Windows 8 या उससे ऊपर वाले कंप्यूटर, न्यूनतम 4 GB RAM, अपडेटेड ब्राउजर और सॉफ्टवेयर और निर्बाध बिजली व्यवस्था जैसी सुविधाएं सुनिश्चित करनी होंगी।

लागू करने से पहले होगा प्रशिक्षण और ट्रायल

सीबीएसई इस सिस्टम को सीधे लागू नहीं करेगा, बल्कि पहले शिक्षकों को ट्रेनिंग दी जाएगी। ड्राई रन, डेमो सेशन, वीडियो गाइड और हेल्प सेंटर के जरिए उन्हें पूरी प्रक्रिया समझाई जाएगी ताकि लागू होने के समय कोई परेशानी न आए।

छात्रों के लिए क्या बदलेगा?

छात्रों के लिए परीक्षा देने का तरीका नहीं बदलेगा, वे पहले की तरह ही उत्तर पुस्तिका में लिखेंगे। बदलाव केवल कॉपी जांच की प्रक्रिया में होगा, जो अब पूरी तरह डिजिटल हो जाएगी।

Himanshu Tiwari

लेखक के बारे में

Himanshu Tiwari

शॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।

परिचय एवं अनुभव
हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।

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हिमांशु के लिए पत्रकारिता का मतलब सिर्फ सूचना देना नहीं है, बल्कि पाठक को सोचने की जगह देना भी है। खासकर करियर और शिक्षा के क्षेत्र में वह यह मानते हैं कि एक गलत या अधूरी खबर किसी छात्र की पूरी तैयारी को भटका सकती है। इसलिए उनके लेखन में सरल भाषा, ठोस तथ्य और व्यावहारिक नजरिया हमेशा प्राथमिकता में रहता है। उनकी कोशिश रहती है कि पाठक को सिर्फ खबर की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी समझ आए कि उस खबर का उसके जीवन और भविष्य से क्या रिश्ता है।

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हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।

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काम से इतर हिमांशु की गहरी रुचि समकालीन इतिहास, समानांतर सिनेमा और दर्शन में रही है। राजनीति और विदेश नीति पर पढ़ना-लिखना उन्हें विशेष रूप से पसंद है। इसी रुचि के चलते उन्होंने दो लोकसभा चुनावों और दर्जनों विधानसभा चुनावों की कवरेज की, जहां राजनीति को उन्होंने बेहद नजदीक से देखा और समझा। चुनावी आंकड़ों की बारीकियां, नेताओं के भाषण, जमीनी मुद्दे और जनता की प्रतिक्रियाएं, इन सभी पहलुओं को समेटते हुए उन्होंने सैकड़ों खबरें और विश्लेषण तैयार किए, जो राजनीतिक प्रक्रिया की गहरी समझ को दर्शाते हैं।

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