CBSE बोर्ड परीक्षा में क्या लेकर जाएं? साइंटिफिक कैलकुलेटर को लेकर सबसे ज्यादा कन्फ्यूजन, जान लें नियम

Feb 13, 2026 03:32 pm ISTHimanshu Tiwari लाइव हिन्दुस्तान
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cbse board exam 2026: एग्जाम हॉल में क्या ले जाना है सही और क्या है पूरी तरह मना है इसके बारे में जानना बेहद जरूरी है। परीक्षा से पहले जान लें ये आसान गाइड ताकि आखिरी समय पर न हो परेशानी।

CBSE बोर्ड परीक्षा में क्या लेकर जाएं? साइंटिफिक कैलकुलेटर को लेकर सबसे ज्यादा कन्फ्यूजन, जान लें नियम

cbse board exam 2026: परीक्षा का समय आते ही छात्रों की जिंदगी पूरी तरह बदल जाती है। कोई फॉर्मूले याद कर रहा होता है, कोई डायग्राम बना बनाकर प्रैक्टिस कर रहा होता है, तो कोई पुराने पेपर हल करने में लगा होता है। लेकिन हर साल एक बड़ी समस्या तब सामने आती है जब छात्र परीक्षा केंद्र पर पहुंचकर यह सोचने लगते हैं कि आखिर कौन सी चीज अंदर ले जाने की अनुमति है और कौन सी नहीं। जानकारी की कमी कई बार अनजाने में गलती करवा देती है, जिससे छात्रों को तनाव झेलना पड़ता है। Central Board of Secondary Education यानी सीबीएसई बोर्ड परीक्षाओं को लेकर जारी निर्देशों में साफ कहा गया है कि छात्रों को केवल जरूरी और अनुमत सामग्री ही साथ लानी चाहिए। नियमों को समझ लेना उतना ही जरूरी है जितना पढ़ाई करना, क्योंकि परीक्षा सिर्फ ज्ञान की नहीं, अनुशासन की भी होती है।

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कैलकुलेटर को लेकर सबसे ज्यादा कन्फ्यूजन

हर साल सबसे ज्यादा सवाल कैलकुलेटर को लेकर ही पूछे जाते हैं। कई छात्रों को लगता है कि गणित, अकाउंटेंसी या साइंस जैसे विषयों में कैलकुलेटर ले जाने की अनुमति होगी। लेकिन सामान्य छात्रों के लिए किसी भी प्रकार का कैलकुलेटर पूरी तरह प्रतिबंधित है। साधारण कैलकुलेटर हो या साइंटिफिक, दोनों एग्जाम हॉल में ले जाना नियमों के खिलाफ माना जाएगा। यह नियम सभी विषयों पर समान रूप से लागू होता है। अगर किसी छात्र के पास कैलकुलेटर पाया जाता है, तो उसे अनुचित साधन की श्रेणी में भी रखा जा सकता है।

किन छात्रों को मिल सकती है विशेष अनुमति

कुछ विशेष परिस्थितियों में छूट दी जाती है, लेकिन यह छूट अपने आप नहीं मिलती। दिव्यांग श्रेणी के छात्रों या कुछ खास व्यावसायिक विषयों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को बोर्ड के निर्देशानुसार अनुमति दी जा सकती है। ध्यान रखने वाली बात यह है कि ऐसी अनुमति पहले से स्कूल के माध्यम से स्वीकृत करानी होती है। बिना पूर्व अनुमति के कोई भी छात्र यह सुविधा नहीं ले सकता।

जरूरी ज्योमेट्री उपकरण ले जा सकते हैं

परीक्षा में छात्रों को बुनियादी ज्योमेट्री बॉक्स ले जाने की अनुमति होती है, लेकिन वह भी सीमित और साधारण होना चाहिए। जरूरत से ज्यादा सामान ले जाना उल्टा परेशानी का कारण बन सकता है। छात्र पारदर्शी स्केल, कंपास, डिवाइडर, प्रोट्रैक्टर, पेंसिल, इरेजर और शार्पनर जैसी चीजें ले जा सकते हैं। ये उपकरण खासतौर पर गणित और विज्ञान के पेपर में काम आते हैं। किसी तरह का इलेक्ट्रॉनिक या अतिरिक्त उपकरण ले जाने से बचना चाहिए।

भूगोल के पेपर में मैप घर से ले जाने की जरूरत नहीं

कई छात्रों को यह गलतफहमी होती है कि उन्हें भूगोल की परीक्षा के लिए मैप साथ ले जाना होगा। जबकि परीक्षा में जरूरी आउटलाइन मैप प्रश्नपत्र के साथ ही दिया जाता है। छात्रों को उसी मैप पर निर्देशानुसार काम करना होता है और उस पर रोल नंबर लिखना होता है। परीक्षा खत्म होने पर मैप शीट को उत्तर पुस्तिका के साथ ठीक तरीके से लगाकर जमा करना जरूरी होता है।

ग्राफ पेपर भी केंद्र पर ही मिलता है

गणित, अर्थशास्त्र या भौतिकी जैसे विषयों में जहां ग्राफ बनाने की जरूरत होती है, वहां ग्राफ पेपर परीक्षा केंद्र द्वारा उपलब्ध कराया जाता है। छात्रों को अपना ग्राफ पेपर लाने की अनुमति नहीं होती। इसलिए अतिरिक्त कागज, शीट या नोट्स जैसी चीजें साथ लाने से बचना चाहिए। केवल वही सामग्री इस्तेमाल करें जो केंद्र से दी जाए।

लिखने और प्रस्तुति से जुड़े अहम नियम

कई बार छात्र सही उत्तर जानते हुए भी छोटी छोटी गलतियों की वजह से अंक गंवा देते हैं। इसलिए लिखने का तरीका भी उतना ही महत्वपूर्ण है। उत्तर लिखने के लिए केवल नीले या रॉयल ब्लू पेन का इस्तेमाल करें। डायग्राम और ग्राफ हमेशा पेंसिल से बनाएं ताकि वे साफ और स्पष्ट दिखें। व्हाइटनर या कटिंग फ्लूड का प्रयोग पूरी तरह वर्जित है। अगर गलती हो जाए तो शब्द को एक लाइन से काटकर आगे लिखें। अगर अतिरिक्त उत्तर पुस्तिका ली है, तो उसे सही तरीके से मुख्य कॉपी के साथ बांधकर ही जमा करें। ढीली शीट छोड़ना नियम के खिलाफ माना जाता है।

परीक्षा में कम सामान ले जाना ही समझदारी

परीक्षा देने जाते समय बैग भरकर सामान ले जाना जरूरी नहीं है। जितना कम और जरूरी सामान होगा, उतना ही आप सहज महसूस करेंगे। अतिरिक्त चीजें जांच के दौरान रोकी भी जा सकती हैं, जिससे समय और ध्यान दोनों खराब होते हैं। परीक्षा का माहौल पहले ही तनाव वाला होता है, ऐसे में नियमों की सही जानकारी छात्रों को अनावश्यक चिंता से बचाती है और उन्हें पेपर पर पूरा ध्यान लगाने में मदद करती है। सही तैयारी के साथ सही जानकारी भी उतनी ही जरूरी होती है, ताकि परीक्षा केंद्र पर पहुंचकर किसी तरह की घबराहट न हो और पूरा फोकस सिर्फ सवालों के जवाब देने पर रहे।

Himanshu Tiwari

लेखक के बारे में

Himanshu Tiwari

शॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।

परिचय एवं अनुभव
हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।

लेखन की सोच और मकसद
हिमांशु के लिए पत्रकारिता का मतलब सिर्फ सूचना देना नहीं है, बल्कि पाठक को सोचने की जगह देना भी है। खासकर करियर और शिक्षा के क्षेत्र में वह यह मानते हैं कि एक गलत या अधूरी खबर किसी छात्र की पूरी तैयारी को भटका सकती है। इसलिए उनके लेखन में सरल भाषा, ठोस तथ्य और व्यावहारिक नजरिया हमेशा प्राथमिकता में रहता है। उनकी कोशिश रहती है कि पाठक को सिर्फ खबर की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी समझ आए कि उस खबर का उसके जीवन और भविष्य से क्या रिश्ता है।

शिक्षा और अकादमिक पृष्ठभूमि
हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।

रुचियां और निजी झुकाव
काम से इतर हिमांशु की गहरी रुचि समकालीन इतिहास, समानांतर सिनेमा और दर्शन में रही है। राजनीति और विदेश नीति पर पढ़ना-लिखना उन्हें विशेष रूप से पसंद है। इसी रुचि के चलते उन्होंने दो लोकसभा चुनावों और दर्जनों विधानसभा चुनावों की कवरेज की, जहां राजनीति को उन्होंने बेहद नजदीक से देखा और समझा। चुनावी आंकड़ों की बारीकियां, नेताओं के भाषण, जमीनी मुद्दे और जनता की प्रतिक्रियाएं, इन सभी पहलुओं को समेटते हुए उन्होंने सैकड़ों खबरें और विश्लेषण तैयार किए, जो राजनीतिक प्रक्रिया की गहरी समझ को दर्शाते हैं।

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