CBSE का स्कूलों को अल्टीमेटम! कक्षा 6 के लिए 31 मई तक चुनें तीसरी भाषा, जानें छात्रों पर क्या होगा असर
CBSE 3-Language Formula: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने सभी संबद्ध स्कूलों को निर्देश दिया है कि वे कक्षा 6 के लिए ‘तीसरी भाषा’ के विकल्प को 31 मई 2026 तक अंतिम रूप दे दें।

CBSE 3-Language Formula: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने स्कूली शिक्षा में एक बड़ा बदलाव करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। नई शिक्षा नीति (NEP 2020) के अनुरूप, बोर्ड ने सभी संबद्ध स्कूलों को निर्देश दिया है कि वे कक्षा 6 के लिए ‘तीसरी भाषा’ के विकल्प को 31 मई 2026 तक अंतिम रूप दे दें। यह कदम छात्रों को भाषाई रूप से अधिक समृद्ध बनाने और उन्हें अलग-अलग संस्कृतियों से जोड़ने के उद्देश्य से उठाया गया है।
सीबीएसई ने यह स्पष्ट किया है कि अब स्कूलों को अपने सिलेबस में भाषाओं के चयन को लेकर अधिक गंभीर होना होगा। इस नए निर्देश के बाद, स्कूलों के पास अब बहुत कम समय बचा है ताकि वे यह तय कर सकें कि उनके छात्र कौन सी तीन भाषाएं पढ़ेंगे।
क्या है ‘थ्री-लैंग्वेज फॉर्मूला’?
सीबीएसई के इस नए ढांचे के तहत, छात्रों को अब अपनी स्कूली शिक्षा के दौरान तीन भाषाओं की पढ़ाई करनी होगी। छात्रों को कम से कम दो भारतीय भाषाओं का चुनाव करना अनिवार्य होगा। तीसरी भाषा के रूप में छात्र किसी भी अन्य भाषा (भारतीय या विदेशी) को चुन सकते हैं। यह फॉर्मूला मुख्य रूप से कक्षा 6 से प्रभावी ढंग से लागू करने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि छात्र छोटी उम्र से ही बहुभाषी बन सकें।
31 मई की समय सीमा क्यों है महत्वपूर्ण?
बोर्ड ने स्कूलों को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे मई के अंत तक अपनी तैयारियों को पूरा कर लें। इसका मुख्य कारण यह है कि नया शैक्षणिक सत्र शुरू हो चुका है और छात्रों को अपनी पसंद की भाषा चुनने और उसकी किताबें उपलब्ध कराने के लिए पर्याप्त समय मिल सके। स्कूलों को न केवल भाषाओं का चयन करना है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना है कि उनके पास उन भाषाओं को सिखाने के लिए योग्य शिक्षक और संसाधन उपलब्ध हों।
छात्रों और अभिभावकों पर क्या होगा असर?
इस बदलाव का सबसे सकारात्मक पहलू यह है कि अब छात्र अपनी मातृभाषा या किसी अन्य क्षेत्रीय भाषा के साथ-साथ एक नई भाषा (जैसे संस्कृत, फ्रेंच, जर्मन या कोई अन्य भारतीय भाषा) सीख सकेंगे। एक से अधिक भाषाएं जानने से छात्रों की तर्क शक्ति और मानसिक विकास में सुधार होता है। साथ ही, यह उन्हें भविष्य में ग्लोबल लेवल पर करियर बनाने में भी मदद करेगा। कुछ स्कूलों के सामने शिक्षकों की उपलब्धता को लेकर चुनौतियां आ सकती हैं। बोर्ड ने सुझाव दिया है कि स्कूल स्थानीय संसाधनों या डिजिटल माध्यमों का उपयोग करके इस कमी को पूरा कर सकते हैं।
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