CBSE Class 12 Revaluation 2026: अगर नहीं बढ़े नंबर तो अब क्या? जानिए बोर्ड की गाइडलाइन
सीबीएसई 12वीं री-इवैल्यूएशन में नंबर नहीं बढ़ने पर बोर्ड ने जरूरी गाइडलाइन जारी की है, जिसके तहत छात्र अपने रीजनल ऑफिस में जाकर कॉपियों की खुद जांच कर सकेंगे।

सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) ने 12वीं के रिवाइज्ड नतीजे जारी कर दिए हैं। जिन्होंने बड़ी उम्मीदों के साथ अपनी कॉपियों के वेरिफिकेशन और री-इवैल्यूएशन के लिए अप्लाई किया था, मगर उनके नंबरों में एक भी अंक का बदलाव नहीं हुआ। रिजल्ट सामने आने के बाद ऐसे बच्चों और उनके पैरेंट्स के बीच की बेचैनी को समझते हुए सीबीएसई ने एक खास गाइडलाइन और स्पष्टीकरण जारी किया है। अगर आपके या आपके बच्चे के नंबर री-इवैल्यूएशन के बाद भी नहीं बढ़े हैं, तो घबराने या हताश होने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। बोर्ड ने साफ कर दिया है कि डिजिलॉकर पर 'No Change' दिखने का मतलब यह नहीं है कि आपके लिए सारे रास्ते बंद हो चुके हैं। आइए समझते हैं कि इस स्थिति को लेकर बोर्ड के कड़े नियम और आपके पास बचे हुए विकल्प क्या हैं।
अब खुद देख सकेंगे अपनी आंसर शीट
सीबीएसई ने उन छात्रों को एक बहुत बड़ा मौका दिया है जिन्हें लगता है कि उनकी कॉपियों की जांच सही से नहीं हुई और री-इवैल्यूएशन के बाद भी उनके नंबर नहीं बदले। बोर्ड की नई गाइडलाइन के मुताबिक, "जिन भी छात्रों ने कॉपियों के वेरिफिकेशन के लिए अप्लाई किया था और उनका स्टेटस "नो चेंज" (कोई बदलाव नहीं) आया है, उन्हें अपने संबंधित सीबीएसई रीजनल ऑफिस में जाकर अपनी ऑरिजनल आंसर बुक को खुद देखने और उसकी जांच करने की पूरी परमिशन दी जाएगी।" इस फिजिकल वेरिफिकेशन यानी खुद कॉपी देखने की प्रक्रिया का पूरा शेड्यूल बोर्ड बहुत जल्द अपनी ऑफिशियल वेबसाइट पर जारी करने वाला है। इसके जरिए आप अपनी आंखों से देख पाएंगे कि आपके लिखे जवाबों को किस तरह आंका गया है।
नंबर न बढ़ने पर क्या कहता है सीबीएसई का नियम?
बोर्ड ने पैरेंट्स और छात्रों को यह बात बहुत ही कड़े और स्पष्ट शब्दों में समझाई है कि री-इवैल्यूएशन या वेरिफिकेशन का मतलब यह बिल्कुल नहीं होता कि हर हाल में नंबर बढ़ाए ही जाएंगे। बोर्ड के मुताबिक, यह सिर्फ एक निष्पक्ष जांच प्रक्रिया है।
- तीन तरह के नतीजे संभव: कॉपियों की दोबारा जांच के बाद नंबर बढ़ भी सकते हैं, घट भी सकते हैं और पहले जैसे ही बने रह सकते हैं।टीचर की गलती नहीं: सीबीएसई ने साफ किया है कि री-इवैल्यूएशन में नंबर न बदलना या बदल जाना, दोनों ही सामान्य बातें हैं जो हर साल होती हैं। इसका यह मतलब नहीं है कि पहली बार कॉपी जांचने वाले टीचर ने कोई भारी लापरवाही की थी। कॉपियों का मूल्यांकन एक तय मार्किंग स्कीम के तहत होता है और री-इवैल्यूएशन का काम सिर्फ यह देखना है कि कहीं कोई मानवीय चूक तो नहीं रह गई।
जब नंबर नहीं बढ़े तो क्या फीस वापस मिलेगी?
फीस और पैसों को लेकर भी बोर्ड ने अपनी गाइडलाइन में स्थिति बिल्कुल साफ कर दी है। इस बार बोर्ड ने री-इवैल्यूएशन की फीस को काफी कम कर दिया था, जहाँ प्रति सवाल सिर्फ 25 रुपये चार्ज किए गए थे। पैसों की वापसी को लेकर नियम यह है कि केवल उन्हीं छात्रों को री-इवैल्यूएशन की फीस वापस की जाएगी जिनके नंबरों में बढ़ोतरी दर्ज हुई है। जिन छात्रों के नंबरों में कोई बदलाव नहीं हुआ है या जिनके नंबर घट गए हैं, उन्हें किसी भी तरह का रिफंड नहीं मिलेगा। हालांकि, अगर किसी छात्र का सर्वर एरर की वजह से डबल पेमेंट या ज्यादा पैसा कट गया था, तो वह पूरा पैसा उनके बैंक खाते में ऑटोमैटिक वापस आ जाएगा।
आईआईटी के एक्सपर्ट्स की निगरानी में हुआ काम
सीबीएसई ने छात्रों का भरोसा जीतने के लिए बताया कि इस बार पूरे प्रोसेस को पूरी तरह से पारदर्शी रखा गया था। इस री-इवैल्यूएशन की पूरी निगरानी देश के सबसे प्रतिष्ठित संस्थानों जैसे कि आईआईटी मद्रास और आईआईटी कानपुर के एक्सपर्ट्स की देखरेख में की गई है। हर एक कॉपी को दो-दो एक्सपर्ट इवैल्यूएटर्स ने चेक किया है। इसलिए, अगर रिजल्ट में 'नो चेंज' आया है, तो इसका मतलब है कि आपकी कॉपी की जांच पूरी तरह से सही और निष्पक्ष तरीके से की गई है।
बोर्ड की 24x7 हेल्पलाइन है तैयार
नंबर न बढ़ने की वजह से जो छात्र मानसिक तनाव या दबाव महसूस कर रहे हैं, उनके लिए सीबीएसई ने एक बेहद सराहनीय कदम उठाया है। बोर्ड ने छात्रों और पैरेंट्स की काउंसलिंग के लिए एक फ्री और 24 घंटे चलने वाली टेली-हेल्पलाइन सेवा शुरू की है। छात्र किसी भी समय 1800-11-8004 पर कॉल करके एक्सपर्ट्स से बात कर सकते हैं और अपनी उलझनों को दूर कर सकते हैं। बोर्ड ने पैरेंट्स से भी अपील की है कि वे बच्चों के नंबरों को लेकर उन पर दबाव न बनाएं, बल्कि उन्हें आने वाले नए मौकों के लिए तैयार करें।


