स्कूल से ही कैसे करें टॉप यूनिवर्सिटीज की तैयारी, यहां समझिए पूरा रोडमैप

Feb 06, 2026 12:10 pm ISTHimanshu Tiwari लाइव हिन्दुस्तान
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आज की टॉप यूनिवर्सिटीज क्यों चाहती हैं कि छात्र क्लास 9 से ही प्रोफाइल बिल्डिंग शुरू करें, और कैसे समय बन गया है सबसे बड़ा एडमिशन एडवांटेज।

स्कूल से ही कैसे करें टॉप यूनिवर्सिटीज की तैयारी, यहां समझिए पूरा रोडमैप

कुछ साल पहले तक कहानी सीधी थी। ज्यादातर छात्र क्लास 11 या 12 में पहुंचकर कॉलेज एडमिशन के बारे में गंभीरता से सोचना शुरू करते थे। अच्छे नंबर, ठीक-ठाक एक्स्ट्रा करिकुलर और बस। लेकिन आज तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। खासकर ग्लोबल और टॉप यूनिवर्सिटीज अब सिर्फ अंकों से खुश नहीं होतीं। वे यह समझना चाहती हैं कि छात्र कौन है, कैसे सोचता है, किस चीज को लेकर जुनूनी है और क्या उसकी रुचियां समय के साथ सच में विकसित हुई हैं। यही वजह है कि अब क्लास 9 से प्रोफाइल बिल्डिंग कोई लग्जरी नहीं, बल्कि एक बड़ा कॉम्पिटिटिव एडवांटेज बन चुकी है।

अभी से ही तैयारी क्यों जरूरी

आज एडमिशन ऑफिसर्स को लंबी-चौड़ी एक्टिविटी लिस्ट नहीं चाहिए। उन्हें चाहिए समय के साथ बना हुआ जुड़ाव। जब कोई छात्र क्लास 9 से शुरुआत करता है, तो उसे पढ़ाई, लीडरशिप, रिसर्च, पब्लिक स्पीकिंग, सोशल वर्क जैसे अलग-अलग क्षेत्रों को आजमाने का मौका मिलता है। बिना किसी जल्दबाजी के वह समझ पाता है कि उसे असल में क्या सूट करता है। यह सफर प्रोफाइल को “बनावटी” नहीं, बल्कि असली बनाता है। आखिरी समय में जोड़े गए सर्टिफिकेट्स से अलग, यहां कहानी अपने आप बनती है।

एक अच्छा कॉलेज परफेक्शन नहीं, बल्कि प्रोग्रेस दिखाता है। यूनिवर्सिटीज उन छात्रों को पसंद करती हैं जिनके सफर में सीखने, भटकने और दोबारा दिशा पकड़ने के पल हों। जैसे एक छात्र जिसने शुरुआत में एस्ट्रोफिजिक्स को लेकर ओलंपियाड्स और रिसर्च की, लेकिन डिबेट और मॉडल यूनाइटेड नेशंस के लंबे अनुभव के बाद उसे कानून में दिलचस्पी महसूस हुई। यही ईमानदार बदलाव उसकी पहचान बना और उसे किंग्स कॉलेज लंदन के LLB प्रोग्राम में एडमिशन मिला। यह बदलाव इसलिए असरदार रहा क्योंकि यह रणनीति नहीं, सच्चा अनुभव था।

अभी से क्या मिलेगा एडवांटेज

आज मजबूत प्रोफाइल का मतलब है किसी एक या दो क्षेत्रों में गहराई। और गहराई समय मांगती है। जब शुरुआत जल्दी होती है, तो छात्र सिर्फ हिस्सा लेने तक सीमित नहीं रहते। वे रिसर्च पेपर लिखते हैं, प्रोटोटाइप बनाते हैं, पेटेंट या लंबे सोशल प्रोजेक्ट्स पर काम करते हैं। टेलीग्राफ इंडिया में छपी रिपोर्ट की मानें तो कैलिफोर्निया का एक छात्र, जिसने फ्रेशमैन ईयर से ही प्रोफाइल पर काम शुरू किया, अपने फुटबॉल के शौक को प्लेयर सेफ्टी से जोड़ पाया। सही मेंटरशिप के साथ उसका आइडिया एक ऐसे प्रोडक्ट में बदला जो 181 देशों में यूके कॉपीराइट के तहत रजिस्टर हुआ। देर से शुरुआत करने पर ऐसा संभव ही नहीं होता।

पढ़ाई और प्रोफाइल के बीच बेहतर बैलेंस

अक्सर पैरेंट्स को डर रहता है कि जल्दी प्रोफाइल बिल्डिंग से पढ़ाई पर असर पड़ेगा। हकीकत उलटी है। जो छात्र क्लास 9 से शुरुआत करते हैं, वे धीरे-धीरे टाइम मैनेजमेंट सीखते हैं। उन्हें आख़िरी साल में भागदौड़ नहीं करनी पड़ती।

गुरुग्राम की एक छात्रा ने स्मार्ट इंडोर गार्डनिंग सिस्टम का आइडिया लिया और सालों तक उसे निखारा। सही मार्गदर्शन के साथ वह आइडिया एक स्केलेबल सॉल्यूशन बना। नतीजा, एक बड़े एंटरप्रेन्योरशिप प्लेटफॉर्म पर फाइनलिस्ट बनना और सीड फंडिंग हासिल करना। यह सब किस्मत से नहीं, तैयारी से हुआ।

एडमिशन से आगे भी काम आने वाली तैयारी

क्लास 9 से शुरू हुई प्रोफाइल बिल्डिंग सिर्फ कॉलेज एडमिशन तक सीमित नहीं रहती। इससे छात्रों में आत्मविश्वास, लीडरशिप, क्रिटिकल थिंकिंग और कम्युनिकेशन स्किल्स विकसित होती हैं। वे मेंटर्स, साथियों और संस्थानों से जुड़ते हैं, ऐसे रिश्ते जो आगे चलकर भी काम आते हैं।

सबसे बड़ी बढ़त - समय

आज यूनिवर्सिटीज़ आख़िरी समय की उपलब्धियां नहीं, बल्कि सालों में बने इंसान को चुन रही हैं। क्लास 9 से शुरुआत करने वाले छात्रों के पास वह चीज होती है जिसे बाद में बनाया नहीं जा सकता समय। और आज के बेहद कॉम्पिटिटिव एडमिशन माहौल में, यही समय सबसे बड़ी ताकत बन चुका है।

Himanshu Tiwari

लेखक के बारे में

Himanshu Tiwari

शॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।

परिचय एवं अनुभव
हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।

लेखन की सोच और मकसद
हिमांशु के लिए पत्रकारिता का मतलब सिर्फ सूचना देना नहीं है, बल्कि पाठक को सोचने की जगह देना भी है। खासकर करियर और शिक्षा के क्षेत्र में वह यह मानते हैं कि एक गलत या अधूरी खबर किसी छात्र की पूरी तैयारी को भटका सकती है। इसलिए उनके लेखन में सरल भाषा, ठोस तथ्य और व्यावहारिक नजरिया हमेशा प्राथमिकता में रहता है। उनकी कोशिश रहती है कि पाठक को सिर्फ खबर की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी समझ आए कि उस खबर का उसके जीवन और भविष्य से क्या रिश्ता है।

शिक्षा और अकादमिक पृष्ठभूमि
हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।

रुचियां और निजी झुकाव
काम से इतर हिमांशु की गहरी रुचि समकालीन इतिहास, समानांतर सिनेमा और दर्शन में रही है। राजनीति और विदेश नीति पर पढ़ना-लिखना उन्हें विशेष रूप से पसंद है। इसी रुचि के चलते उन्होंने दो लोकसभा चुनावों और दर्जनों विधानसभा चुनावों की कवरेज की, जहां राजनीति को उन्होंने बेहद नजदीक से देखा और समझा। चुनावी आंकड़ों की बारीकियां, नेताओं के भाषण, जमीनी मुद्दे और जनता की प्रतिक्रियाएं, इन सभी पहलुओं को समेटते हुए उन्होंने सैकड़ों खबरें और विश्लेषण तैयार किए, जो राजनीतिक प्रक्रिया की गहरी समझ को दर्शाते हैं।

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- अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और विदेश नीति से जुड़े विषयों का विश्लेषणात्मक लेखन
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