11वीं 13वीं JPSC के बाद JSSC CGL और CDPO भर्ती परीक्षा रद्द करने पर भी रोक
झारखंड हाईकोर्ट ने जेएसएससी सीजीएल और सीडीपीओ परीक्षा रद्द करने के सरकार की अधिसूचना पर भी शुक्रवार को रोक लगा दी। जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने सरकार को इस मामले में सात सितंबर तक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।

झारखंड हाईकोर्ट ने जेएसएससी सीजीएल और सीडीपीओ परीक्षा रद्द करने के सरकार की अधिसूचना पर भी शुक्रवार को रोक लगा दी। जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने सरकार को इस मामले में सात सितंबर तक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। अदालत ने राज्य सरकार को अपने जवाबी शपथपत्र में यह स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि सीआईडी की जांच में ऐसा क्या तथ्य सामने आया, जिसके आधार पर इतने बड़े पैमाने पर विज्ञापनों को रद्द करने का निर्णय लिया गया। इतनी बड़ी कार्रवाई की जरूरत क्यों पड़ी और इसके पीछे क्या ठोस कारण रहे। गुरुवार को हाईकोर्ट ने 11वीं से 13वीं जेपीएससी और फूड सेफ्टी अफसर की नियुक्ति के विज्ञापन को रद्द करने के आदेश पर भी रोक लगाई थी।
सुभाष मुर्मू व अन्य, आशीष अक्षत एवं अन्य, रवि कुमार हांसदा एवं अन्य और आकांक्षा मिंज और अन्य की ओर से दायर याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई करते हुए कोर्ट ने प्रार्थियों को सरकार के जवाब पर अपना पक्ष 14 सितंबर तक शपथपत्र से दाखिल करने का निर्देश दिया। अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी। अदालत ने मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि इसकी प्रतिदिन सुनवाई की जाएगी। राज्य सरकार और प्रार्थियों को निर्धारित समय-सीमा के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि सुनवाई जल्द पूरी कर शीघ्र निर्णय सुनाया जाएगा।
विभाग को आदेश की जानकारी दें
कोर्ट ने महाधिवक्ता को निर्देश दिया कि वे संबंधित विभाग को आदेश की जानकारी दें, ताकि याचिकाकर्ताओं समेत समान रूप से प्रभावित कर्मचारियों को फिलहाल अपनी सेवा जारी रखने की अनुमति दी जा सके। कोर्ट ने कहा याचिकाकर्ताओं को बिना कोई प्रक्रिया अपनाए अचानक सेवा से हटाया गया है। ऐसे में न्यायहित और सुविधा का संतुलन याचिकाकर्ताओं के पक्ष में है। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश देते हुए कहा कि शपथपत्र में स्पष्ट करना होगा कि संबंधित मामले में आपराधिक अदालत का अंतिम फैसला आने के बाद उसका परिणाम उन्हें स्वीकार्य होगा और सरकार उस फैसले के आधार
हाईकोर्ट ने रद्द किए गए ऐसे विज्ञापनों से संबंधित सभी याचिका को एक साथ सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है, जिनके आधार पर अभी तक नियुक्ति नहीं हुई है। इन मामलों पर सुनवाई के लिए 24 अगस्त को सुनवाई निर्धारित की गई है।
सुनवाई के दौरान फॉरेस्ट कंजरवेटर की नियुक्ति से संबंधित विज्ञापन रद्द किए जाने को चुनौती देने वाली याचिका पर भी तत्काल सुनवाई का आग्रह किया गया। इस पर अदालत ने कहा कि इस विज्ञापन के आधार पर अभी नियुक्ति नहीं हुई है। इसलिए इसे भी उन मामलों के साथ सूचीबद्ध किया जाए जिनमें नियुक्ति नहीं हुई है।
‘हमें पक्ष रखने का नहीं मिल रहा पर्याप्त समय ’
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अदालत से कहा कि याचिकाएं हाल ही में दाखिल हुई हैं और तत्काल सुनवाई की जा रही है। सरकार को अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर नहीं मिल रहा है। अधिवक्ता ने इसे प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत के विपरीत बताया। इस पर अदालत ने कहा कि न्यायालय को पूरे मामले की स्थिति देखनी है और तथ्यों के आधार पर निर्णय लेना है। अदालत ने सरकार को जवाब दाखिल करने का अवसर दिया है। कोर्ट ने कहा कि सरकार अपना पक्ष जवाब के माध्यम से रख सकती है।
हाईकोर्ट के स्टे के बाद कर्मियों ने मनाया जश्न
झारखंड हाईकोर्ट ने शुक्रवार दोपहर जैसे ही जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले पर रोक लगाई, सचिवालय में पूर्व से कार्यरत सहायक प्रशाखा पदाधिकारियों (एएसओ) में खुशी की लहर दौड़ गई। प्रोजेक्ट भवन के बाहर चार दिनों से लगातार प्रदर्शन कर रहे नवनियुक्त कर्मियों ने राष्ट्रगान गाकर खुशी व्यक्त की। सचिवालय के मुख्य द्वार के सामने जश्न मनाया। प्रोजेक्ट भवन से धुर्वा गोलचक्कर तक हाथों में तिरंगा लिए धन्यवाद यात्रा निकाली और कोर्ट का धन्यवाद दिया। एक-दूसरे को गले लगाकर बधाई दी। सत्यमेव जयते और न्याय की जीत हुई के नारे लगाते हुए खुशी जाहिर की। कहा कि यह न्यायपालिका की ताकत है, जिसने साबित कर दिया कि सच परेशान हो सकता है, पराजित नहीं।


