CA Final AIR 3: दिन के 14 घंटे पढ़ाई, तीन बार दोहराई… ऐसे टॉपर बने ऋषभ जैन
CA Final AIR 3: 23 वर्षीय ऋषभ जैन ने छह साल की तैयारी के बाद देश की सबसे कठिन पेशेवर परीक्षाओं में ऑल इंडिया रैंक 3 हासिल की। जानिए उनका अध्ययन तरीका, समय प्रबंधन और सफलता का पूरा सफर।

CA Final AIR 3: कभी जो सपना लगा करता था वही आज हकीकत बनकर सामने खड़ा है। 23 साल के ऋषभ जैन के लिए यह सफर आसान नहीं था, लेकिन लगातार छह वर्षों की मेहनत, त्याग और अनुशासन ने उन्हें देश के टॉपर्स की सूची में ला खड़ा किया। जब परिणाम आया और उन्हें संस्था के अध्यक्ष का फोन आया, तो वह पल उनके लिए किसी सपने से कम नहीं था। उन्हें खुद भी यकीन नहीं हो रहा था कि उन्होंने पूरे देश में तीसरी रैंक हासिल कर ली है।
साल 2020 में शुरू हुई तैयारी का यह सफर 2026 में जाकर मुकाम तक पहुंचा। ऋषभ ने 600 में से 451 अंक, यानी लगभग 75 प्रतिशत अंक हासिल किए और सबसे खास बात यह रही कि उन्होंने यह परीक्षा पहले ही प्रयास में पास कर ली। यह उपलब्धि इसलिए भी बड़ी मानी जाती है क्योंकि इस परीक्षा को देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में गिना जाता है।
परिवार से नहीं, खुद से मिली प्रेरणा
टाइम्स नाउ की रिपोर्ट की मुताबिक, अक्सर लोग मानते हैं कि ऐसी सफलता के पीछे परिवार की कोई बड़ी भूमिका होती है, लेकिन ऋषभ की कहानी थोड़ी अलग है। उनके परिवार में इस पेशे से जुड़ा कोई नहीं था। उन्होंने सामान्य सोच के तहत वाणिज्य विषय चुना और धीरे धीरे यह तय कर लिया कि उन्हें इसी क्षेत्र में आगे बढ़ना है। यह उनका खुद का लिया हुआ फैसला था, जिसने आगे चलकर उनकी जिंदगी बदल दी।
पहले पूरा पाठ्यक्रम, बाद में केवल दोहराई
ऋषभ की रणनीति बेहद साफ थी। उन्होंने परीक्षा से पहले ही पूरा पाठ्यक्रम खत्म करने का लक्ष्य बना लिया था ताकि अवकाश का समय केवल दोहराई के लिए बच सके। इस योजना का उन्हें बड़ा फायदा मिला। छह महीने के अध्ययन अवकाश में उन्होंने पूरे पाठ्यक्रम की तीन बार दोहराई की। उनका मानना है कि आखिरी समय में नया पढ़ने की बजाय पहले पढ़ी हुई चीजों को मजबूत करना ज्यादा जरूरी होता है। यही तरीका उनकी तैयारी की रीढ़ बना।
कठिन विषय से भागे नहीं, रोज किया सामना
ऋषभ के लिए सबसे चुनौतीपूर्ण विषय लेखा परीक्षण था। इसमें केवल समझना काफी नहीं होता, बल्कि अध्ययन सामग्री की भाषा को उसी रूप में याद रखना पड़ता है। इसलिए उन्होंने इस विषय को टालने के बजाय रोजाना 2 से 3 घंटे दिए। उनका कहना है कि कठिन विषय को नजरअंदाज करना सबसे बड़ी गलती होती है। जिस विषय से डर लगता है, उसी पर सबसे ज्यादा मेहनत करनी चाहिए।
रोज 14 घंटे पढ़ाई, लेकिन संतुलन के साथ
अंतिम तैयारी के दौरान ऋषभ रोज लगभग 14 घंटे पढ़ाई करते थे। हालांकि वह केवल लंबे समय तक बैठने को पढ़ाई नहीं मानते। उनका जोर इस बात पर था कि जितना भी पढ़ें, पूरे ध्यान से पढ़ें। थ्योरेटिकल और कॉन्सेप्चुअल विषयों के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए उन्होंने रोज एक थ्योरी और एक प्रैक्टिकल विषय पढ़ने का नियम बनाया। इससे पढ़ाई में एकरसता नहीं आई और दिमाग सक्रिय बना रहा।
अभ्यास परीक्षा ने सिखाया असली समय प्रबंधन
इस परीक्षा का प्रश्नपत्र लंबा होता है और समय सबसे बड़ी चुनौती बन जाता है। इसे समझने के लिए ऋषभ ने खूब अभ्यास परीक्षाएं दीं। इससे उन्हें यह समझ आया कि किस प्रश्न पर कितने मिनट देने हैं। परीक्षा के दिन वह घड़ी देखकर लिखते थे और तय समय से ज्यादा रुकने पर तुरंत आगे बढ़ जाते थे। उनका कहना है कि इस परीक्षा में एक एक सेकंड की कीमत होती है।
पढ़ाई के दौरान सोशल मीडिया से दूरी
तैयारी के समय उन्होंने खुद को सोशल मीडिया से लगभग अलग कर लिया था ताकि ध्यान भंग न हो। हालांकि जब थकान ज्यादा महसूस होती, तो वह थोड़ी देर यात्रा से जुड़े वीडियो देखकर खुद को तरोताजा कर लेते थे। इससे मानसिक दबाव कम होता और वह फिर से पढ़ाई में लग जाते।
अलग अलग स्रोतों का समझदारी से इस्तेमाल
थ्योरेटिकल विषयों के लिए उन्होंने संस्थान की अध्ययन सामग्री पर भरोसा किया, क्योंकि उसमें भाषा और प्रस्तुति परीक्षा के अनुरूप होती है। वहीं गणनात्मक विषयों के लिए उन्होंने संक्षिप्त नोट्स का सहारा लिया, जिससे महत्वपूर्ण बिंदुओं की जल्दी दोहराई हो सके। उनका कहना है कि सही सामग्री का चुनाव भी सफलता में बड़ी भूमिका निभाता है। हर चीज पढ़ने की बजाय वही पढ़ें जो जरूरी है।
भविष्य के अभ्यर्थियों के लिए उनकी सलाह
ऋषभ मानते हैं कि अभ्यास परीक्षा को कभी नहीं छोड़ना चाहिए, क्योंकि वही आपको परीक्षा का असली अनुभव देती है। जितना ज्यादा अभ्यास करेंगे, उतना आत्मविश्वास बढ़ेगा। वह अक्सर एक बात दोहराते हैं कि इंसान जितना व्यस्त रहता है, उतना ही समय निकालना सीख जाता है।



