
BTech : IIT का तोहफा, बीटेक 3 साल में छोड़ने पर मिलेगी BSc डिग्री, UPSC व MBA की राह हुई आसान
आईआईटी मद्रास में बीटेक छात्रों को अब 3 साल बाद बीएससी डिग्री के साथ कोर्स से बाहर निकलने (एग्जिट) का विकल्प मिलेगा। जो छात्र बीच पढ़ाई में यूपीएससी या एमबीए का मन बना लेते हैं, उनके लिए यह बढ़िया विकल्प है।
आईआईटी मद्रास ने बीटेक के उन छात्रों को बड़ी सुविधा दी है जो या तो किसी कारणवश इंजीनियरिंग डिग्री की पढ़ाई छोड़ना चाहते हैं या फिर डिग्री पूरी करने में उन्हें कठिनाई हो रही है आईआईटी मद्रास में बीटेक छात्रों को अब 3 साल बाद बीएससी डिग्री के साथ कोर्स से बाहर निकलने (एग्जिट) का विकल्प मिलेगा, बशर्ते वे कुल 400 में से 250 क्रेडिट हासिल कर लें। आईआईटी बीटेक 2024 बैच के छात्रों को इस ऑप्शन का फायदा 2027 से मिलना शुरू होगा। देश का नंबर 1 इंजीनियरिंग संस्थान (एनआईआरएफ इंजीनियरिंग रैंकिंग 2025 के मुताबिक) इस शैक्षणिक वर्ष से ही सीनियर छात्रों के लिए भी यह विकल्प उपलब्ध कराने की योजना बना रहा है। हालांकि ऐसे छात्रों को बीएससी डिग्री चुनने से पहले कम से कम एक बार डिग्री पूरी करने का प्रयास करना होगा।
सिविल सेवा परीक्षा, एमबीए के लिए बढ़िया ऑप्शन
आईआईटी मद्रास के डीन (एकेडमिक कोर्स) प्रो. प्रताप हरिदास ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया, 'हम स्पेशलाइजेशन के साथ बीएससी डिग्री देने की भी योजना बना रहे हैं। प्रत्येक विभाग स्पेशलाइजेशन के लिए आवश्यक कोर क्रेडिट की संख्या तय करेगा।' उन्होंने आगे कहा, 'यह बीएससी डिग्री छात्रों को उच्च शिक्षा, जैसे एमबीए में दाखिला लेने और सिविल सेवा परीक्षाओं में बैठने में मदद करेगी। जो छात्र बीटेक डिग्री के दौरान 3 साल बाद एग्जिट का ऑप्शन चुनेंगे, वे बाद में हमारी ऑनलाइन बीएस डिग्री में भी शामिल हो सकते हैं।' आपको बता दें कि बहुत से आईआईटीयन छात्र बीटेक के बाद यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा, बीपीएससी, यूपीपीएससी पीसीएस, एमपीपीएससी पीसीएस, आरपीएससी आरएएस आदि सिविल सेवा परीक्षाओं की तैयारी में जुटे जाते हैं। ऐसे छात्र अब अपना एक साल बचा सकेंगे। इन सिविल सेवा परीक्षाओं के लिए महज तीन वर्षीय डिग्री मांगी जाती है। चार साल बीटेक में खपाने की जरूरत नहीं।
कुछ छात्र विषय में रुचि न होने के कारण भी अपनी डिग्री पूरी करने में संघर्ष करते हैं। उनके लिए इंजीनियरिंग डिग्री पूरी करना काफी बोझिल हो जाता है। कुछ छात्र इंटरप्रिन्योर बनने के बाद अपना कोर्स बीच में ही छोड़ देते हैं। डीन ने कहा, 'यह ऑप्शन ऐसे छात्रों को भी एक डिग्री हासिल करने में मदद करेगा।' डिग्री कोर्सेज में कई बार दाखिला और एग्जिट की सुविधा देना राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के प्रमुख प्रावधानों में से एक है।
छात्रों का अच्छे प्रदर्शन का बोझ थोड़ा कम हुआ
आईआईटी मद्रास ने छात्रों पर अकादमिक दबाव कम करने के लिए कई सुधार भी किए हैं। इन सुधारों में प्रति सेमेस्टर न्यूनतम आवश्यक क्रेडिट की संख्या में 10 फीसदी की कमी शामिल है। हरिदास ने कहा, 'एक छात्र आसानी से एक सेमेस्टर में 66 क्रेडिट हासिल कर सकता है, लेकिन हमने प्रति सेमेस्टर न्यूनतम आवश्यक क्रेडिट को घटाकर 50 कर दिया है। हाई सीजीपीए वाले छात्रों को एक सेमेस्टर में ज्यादा क्रेडिट करने की इजाजत दी जाएगी।'
इसके अलावा आईआईटी मद्रास ने बीटेक कोर्स में 40 फीसदी तक कोर्स को इलेक्टिव बना दिया है, ताकि छात्र अपनी रुचि के विषय चुन सकें। संस्थान ने छात्रों को अधिक ऑप्शन देने के लिए अंतर-विषयक (इंटरडिसिप्लिनरी) ड्यूल डिग्री और माइनर डिग्री भी शुरू की हैं।
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