अब हिंदी में बनेंगे इंजीनियर! इस सरकारी कॉलेज में हिंदी में होगी BTech सिविल की पढ़ाई
BTech Civil in Hindi Language: मध्य प्रदेश के एक प्रमुख सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज ने घोषणा की है कि वह शैक्षणिक सत्र 2026-27 से BTech सिविल इंजीनियरिंग का कोर्स हिंदी भाषा में शुरू करने जा रहा है।

BTech Civil in Hindi: भारत में तकनीकी शिक्षा को लेकर एक बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव होने जा रहा है। अब इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए अंग्रेजी भाषा की बाधा आड़े नहीं आएगी। मध्य प्रदेश के एक प्रमुख सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज ने घोषणा की है कि वह शैक्षणिक सत्र 2026-27 से BTech सिविल इंजीनियरिंग का कोर्स हिंदी भाषा में शुरू करने जा रहा है। यह कदम नई शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत मातृभाषा में तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उठाया गया है।
सत्र 2026-27 से शुरू होंगे दाखिले
मध्य प्रदेश के विदिशा स्थित सम्राट अशोक टेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट (SATI) ने यह पहल की है। कॉलेज प्रशासन के अनुसार, आने वाले सत्र से छात्र सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी तरह से हिंदी माध्यम में कर सकेंगे। इसका सबसे बड़ा फायदा उन ग्रामीण और हिंदी भाषी क्षेत्रों के छात्रों को होगा, जो मेधावी होने के बावजूद केवल अंग्रेजी भाषा की कठिनाई के कारण इंजीनियरिंग छोड़ देते थे या पढ़ाई के दौरान संघर्ष करते थे।
कोर्स और किताबों की तैयारी
हिंदी में इंजीनियरिंग पढ़ाना एक बड़ी चुनौती है, जिसे दूर करने के लिए कॉलेज और तकनीकी शिक्षा विभाग ने कमर कस ली है। एआईसीटीई (AICTE) के सहयोग से इंजीनियरिंग की मानक किताबों का हिंदी में अनुवाद किया गया है। पढ़ाते समय इस बात का ध्यान रखा जाएगा कि मुख्य तकनीकी शब्दों को हिंदी के साथ-साथ कोष्ठक में अंग्रेजी में भी लिखा जाए, ताकि छात्रों को ग्लोबस लेवल पर काम करने में कोई परेशानी न हो। शिक्षकों को विशेष रूप से प्रशिक्षित किया जा रहा है ताकि वे कठिन इंजीनियरिंग सिद्धांतों को सरल हिंदी भाषा में छात्रों को समझा सकें।
क्यों चुना गया सिविल इंजीनियरिंग को?
विशेषज्ञों का मानना है कि सिविल इंजीनियरिंग एक ऐसा क्षेत्र है जहां फील्ड वर्क और स्थानीय लोगों से जुड़ाव अधिक होता है। हिंदी माध्यम से पढ़ाई करने वाले छात्र अपनी बात को जमीनी स्तर पर बेहतर ढंग से संवाद कर सकेंगे। साथ ही, मध्य प्रदेश सरकार ने पहले ही राज्य में एमबीबीएस (MBBS) की पढ़ाई हिंदी में शुरू कर एक मिसाल पेश की है, जिसके बाद अब इंजीनियरिंग में यह प्रयोग सफल होने की पूरी उम्मीद है।
छात्रों के लिए रोजगार के अवसर
अक्सर यह सवाल उठता है कि क्या हिंदी में पढ़ाई करने के बाद छात्रों को अच्छी नौकरी मिलेगी? कॉलेज प्रशासन का कहना है कि कंपनियों को 'हुनर' की तलाश होती है, भाषा की नहीं। लोक निर्माण विभाग (PWD), सिंचाई विभाग और अन्य सरकारी उपक्रमों में हिंदी माध्यम के इंजीनियरों की काफी मांग रहती है। कई बड़ी निर्माण कंपनियां अब ऐसे इंजीनियरों को प्राथमिकता देती हैं जो स्थानीय भाषा में मजदूरों और क्लाइंट्स के साथ बेहतर संवाद कर सकें।
लेखक के बारे में
Prachiशॉर्ट बायो: प्राची लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में कंटेंट प्रोड्यूसर हैं। पिछले 2 वर्षों से वे करियर, शिक्षा और सरकारी नौकरियों से जुड़े विषयों पर लिख रही हैं। मुश्किल खबरों को आसान भाषा में पाठकों तक पहुंचाना उनकी विशेषता है। वे 2024 से लाइव हिन्दुस्तान की करियर टीम का हिस्सा हैं।
अनुभव और करियर का सफर
प्राची ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत 'नन्ही खबर' से की थी, जहां उन्होंने जमीनी स्तर पर खबरों के महत्व को समझा। इसके बाद, उन्होंने 'सी.वाई. फ्यूचर लिमिटेड' और 'कुटुंब' जैसे प्लेटफॉर्म्स पर बतौर कंटेंट राइटर काम करते हुए अपनी लेखनी और रिसर्च स्किल्स को निखारा। लाइव हिन्दुस्तान से जुड़ने के बाद, वे करियर डेस्क पर सक्रिय हैं और छात्रों के लिए करियर विकल्पों, बोर्ड परीक्षाओं, जॉब और प्रतियोगी परीक्षाओं की बारीकियों को कवर कर रही हैं।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
प्राची ने देश के प्रतिष्ठित भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC) से इंग्लिश जर्नलिज्म में पीजी डिप्लोमा किया है। उनकी शैक्षणिक नींव दिल्ली यूनिवर्सिटी से है, जहां से उन्होंने इतिहास में ग्रेजुएशन की पढ़ाई की। इतिहास की अच्छी जानकारी होने के कारण, वे आज की खबरों को बेहतर तरीके से समझ और समझा पाती हैं। यही वजह है कि उनके लेखों में जानकारी पूरी तरह सटीक और अधिक भरोसेमंद होती है।
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रुचियां
इतिहास की समझ और पत्रकारिता के जुनून के साथ, प्राची को खाली समय में उपन्यास पढ़ना और विश्व सिनेमा देखना पसंद है, जो उनके लेखन में एक नया दृष्टिकोण जोड़ता है।
विशेषज्ञता
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