बिहार बोर्ड की सौगात, अब सरकारी स्कूलों के बच्चे भी बिना पैसे खर्च किए करेंगे JEE-NEET की तैयारी
बिहार बोर्ड ने 155 स्कूलों में मुफ्त JEE-NEET कोचिंग और 700 स्कूलों में विद्या साथी डिजिटल मंच शुरू किया है। इसके तहत गरीब छात्रों को बड़ा फायदा मिलेगा।

बिहार के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले लाखों बच्चों के लिए यह किसी सपने के सच होने जैसा है। जिन परिवारों के पास निजी कोचिंग संस्थानों की मोटी फीस भरने के पैसे नहीं थे अब उनके बच्चे भी इंजीनियरिंग और मेडिकल जैसी बड़ी परीक्षाओं की तैयारी उतने ही अच्छे माहौल में कर सकेंगे। बिहार विद्यालय परीक्षा समिति यानी BSEB ने अपने मुफ्त कोचिंग कार्यक्रम को और बड़े स्तर पर फैला दिया है, और इस बार दायरा पहले से कहीं ज्यादा चौड़ा है।
155 स्कूलों तक पहुंची JEE-NEET की मुफ्त कोचिंग
बोर्ड ने अपनी इस योजना को राज्य के 155 चुनिंदा सरस्वती विद्या निकेतन मॉडल प्लस-टू स्कूलों तक पहुंचाया है। इसका सीधा फायदा 11वीं और 12वीं में पढ़ने वाले उन विद्यार्थियों को मिलेगा, जो JEE और NEET जैसी देश की सबसे कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करना चाहते हैं, लेकिन आर्थिक तंगी उनके रास्ते में रोड़ा बनती रही है। बोर्ड का कहना है कि इस पूरी पहल को अनुभवी शिक्षकों की मदद से चलाया जा रहा है, ताकि बच्चों को निजी कोचिंग संस्थानों पर पूरी तरह निर्भर न रहना पड़े।
बताया जा रहा है कि यह सिलसिला यूं ही अचानक शुरू नहीं हुआ। इससे पहले पटना में चुनिंदा स्कूलों में शाम की कोचिंग कक्षाएं शुरू की गई थीं, और उसके बाद धीरे-धीरे इसे ऑनलाइन माध्यम से और मॉडल स्कूलों तक बढ़ाया गया। अब बच्चों को उनके सिलेबस के हिसाब से तैयार किए गए विषयवार वीडियो पाठ भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिन्हें खुद शिक्षकों ने JEE और NEET के पैटर्न को ध्यान में रखकर बनाया है।
'विद्या साथी' मंच से 700 स्कूलों को मिलेगा सहारा
सिर्फ प्रतियोगी परीक्षाओं की कोचिंग ही नहीं, बोर्ड अब पढ़ाई-लिखाई को डिजिटल तरीके से और मजबूत बनाने में भी जुटा है। इसके लिए 'विद्या साथी' नाम से एक इंटरैक्टिव लर्निंग प्लेटफॉर्म तैयार किया गया है, जिसे राज्य के करीब 700 मॉडल स्कूलों में 9वीं से 12वीं तक के बच्चों के लिए मुफ्त उपलब्ध कराया जाएगा। इस मंच के जरिए बच्चे अपने मन के सवाल शिक्षकों से सीधे पूछ सकेंगे और मुश्किल विषयों को आसानी से समझ पाएंगे। साथ ही, उन्हें पीडीएफ जैसी डिजिटल स्टडी सामग्री भी हाथोंहाथ मिल जाएगी। बोर्ड ने जिला शिक्षा अधिकारियों को साफ निर्देश दिया है कि वे स्कूलों के प्रधानाचार्यों के साथ तालमेल बिठाकर जल्द से जल्द सभी 700 मॉडल स्कूलों को इस मंच से जोड़ने का काम पूरा करें, ताकि किसी भी बच्चे को इसका लाभ लेने में देरी न हो।
आवासीय और गैर-आवासीय दोनों तरह की कोचिंग की सुविधा
जो बच्चे रहकर पढ़ाई करना चाहते हैं, उनके लिए पटना के दरियापुर स्थित पटना कॉलेजिएट स्कूल और गोलघर की बांकीपुर गर्ल्स हायर सेकेंडरी स्कूल में आवासीय कोचिंग की भी व्यवस्था है। वहीं जो घर से आना-जाना पसंद करते हैं, उनके लिए पटना, गया, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, छपरा, पूर्णिया, सहरसा, मुंगेर और भागलपुर में गैर-आवासीय केंद्र चल रहे हैं। यानी राज्य के लगभग हर बड़े हिस्से के बच्चों तक यह सुविधा पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। आने वाले दिनों में बोर्ड मुख्यालय में एक आधुनिक स्टूडियो बनाने की भी योजना है, जहां से लाइव क्लासेज चलाई जा सकेंगी और इसका सीधा प्रसारण नेटवर्क में जुड़े सभी स्कूलों तक होगा।
BSEB के चेयरमैन थियागराजन एसएम के मुताबिक, मुफ्त कोचिंग कार्यक्रम पहले से ही बच्चों को फायदा पहुंचा रहा है और इसे अनुभवी शिक्षकों की देखरेख में चलाया जा रहा है। उनका कहना है कि इस विस्तार का मकसद सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का बेहतर मौका देना और उनका अकादमिक सहयोग और मजबूत करना है।


