DSP Ujjwal Kumar: इंजीनियरिंग की नौकरी छोड़ी, ताने सुने… लेकिन BPSC में रैंक 1 लाकर कर दिया कमाल

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BPSC 69th परीक्षा में सीतामढ़ी के उज्जवल कुमार उपकार ने पहली रैंक हासिल कर डीएसपी का पद हासिल की। उनकी कामयाबी हर हिंदी माध्यम के छात्र के लिए प्रेरणादायक है।

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डीएसपी उज्जवल कुमार उपकार

DSP Ujjwal Kumar: कहते हैं कि अगर आपके इरादे चट्टान की तरह मजबूत हों और सपनों में जान हो, तो कोई भी रुकावट आपका रास्ता नहीं रोक सकती। बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की 69वीं संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा में पूरे सूबे में पहली रैंक हासिल कर उज्जवल ने न सिर्फ अपने मां-बाप का सिर फख्र से ऊंचा किया, बल्कि बिहार पुलिस सेवा में डीएसपी (DSP) का रुतबा भी हासिल किया। उनकी कहानी उन तमाम नौजवानों के लिए एक जीती-जागती मिसाल है जो आंखों में कुछ बड़ा करने का ख्वाब देखते हैं।

आखिर कौन हैं उज्जवल कुमार उपकार?

उज्जवल मूल रूप से बिहार के सीतामढ़ी जिले के नानपुर इलाके के रहने वाले हैं। एक बेहद आम और मध्यम वर्गीय परिवार से ताल्लुक रखने वाले इस नौजवान ने साबित कर दिया कि सफलता सुख-सुविधाओं की मोहताज नहीं होती। उनके पिता एक प्राइवेट टीचर के तौर पर काम करते हैं और बच्चों का भविष्य संवारते हैं, वहीं उनकी मां आंगनबाड़ी में काम करती हैं। बहुत ही सीमित संसाधनों के बीच पल-बढ़कर उज्जवल ने अपनी शुरुआती पढ़ाई सीतामढ़ी के ही एक सरकारी स्कूल से पूरी की। सरकारी स्कूल से निकलकर उन्होंने अपनी मेहनत के दम पर जेईई मेंस का कड़ा इम्तिहान पास किया और एनआईटी उत्तराखंड से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की। लेकिन उनका सफर यहीं नहीं रुका।

लोगों के ताने सुने पर हार नहीं मानी

इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने कुछ समय तक नौकरी भी की मगर दिल में तो खाकी वर्दी पहनने का जुनून सवार था। आपको जानकर हैरानी होगी कि उज्जवल ने जब अपनी इंजीनियरिंग की अच्छी-खासी नौकरी छोड़ने का फैसला किया तो शुरुआत में लोगों ने उन पर जमकर शक किया। कई लोगों ने ताने भी मारे कि बनी-बनाई जिंदगी छोड़कर ये लड़का क्या कर रहा है, लेकिन उनकी अटूट लगन ने आज हर किसी की बोलती बंद कर दी है।

हिंदी माध्यम के छात्रों के लिए रची नई तारीख

रिपोर्ट्स की मानें तो उज्जवल की जीत इसलिए भी बेहद खास है क्योंकि BPSC के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ था कि किसी विशुद्ध हिंदी माध्यम के छात्र ने पूरे एग्जाम में टॉप किया हो। अक्सर लोगों को लगता है कि बड़े इम्तिहान सिर्फ अंग्रेजी माध्यम वाले ही निकाल सकते हैं, लेकिन उज्जवल ने अपनी हिंदी माध्यम की पढ़ाई से इस मिथक को पूरी तरह चकनाचूर कर दिया है।

सही मार्गदर्शन और अचूक रणनीति का कमाल

इतने मुश्किल सफर को आसान बनाने में सही मार्गदर्शन का बड़ा हाथ होता है। उज्जवल ने अपनी तैयारी के दौरान अपने कॉन्सेप्ट्स को बहुत साफ रखा। अब उज्जवल कुमार उपकार बिहार पुलिस सेवा में डीएसपी बनकर अपनी अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

Himanshu Tiwari

लेखक के बारे में

Himanshu Tiwari

शॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।

परिचय एवं अनुभव
हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।

लेखन की सोच और मकसद
हिमांशु के लिए पत्रकारिता का मतलब सिर्फ सूचना देना नहीं है, बल्कि पाठक को सोचने की जगह देना भी है। खासकर करियर और शिक्षा के क्षेत्र में वह यह मानते हैं कि एक गलत या अधूरी खबर किसी छात्र की पूरी तैयारी को भटका सकती है। इसलिए उनके लेखन में सरल भाषा, ठोस तथ्य और व्यावहारिक नजरिया हमेशा प्राथमिकता में रहता है। उनकी कोशिश रहती है कि पाठक को सिर्फ खबर की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी समझ आए कि उस खबर का उसके जीवन और भविष्य से क्या रिश्ता है।

शिक्षा और अकादमिक पृष्ठभूमि
हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।

रुचियां और निजी झुकाव
काम से इतर हिमांशु की गहरी रुचि समकालीन इतिहास, समानांतर सिनेमा और दर्शन में रही है। राजनीति और विदेश नीति पर पढ़ना-लिखना उन्हें विशेष रूप से पसंद है। इसी रुचि के चलते उन्होंने दो लोकसभा चुनावों और दर्जनों विधानसभा चुनावों की कवरेज की, जहां राजनीति को उन्होंने बेहद नजदीक से देखा और समझा। चुनावी आंकड़ों की बारीकियां, नेताओं के भाषण, जमीनी मुद्दे और जनता की प्रतिक्रियाएं, इन सभी पहलुओं को समेटते हुए उन्होंने सैकड़ों खबरें और विश्लेषण तैयार किए, जो राजनीतिक प्रक्रिया की गहरी समझ को दर्शाते हैं।

विशेषज्ञताएं
- शिक्षा, करियर और नौकरियों से जुड़ी खबरों पर विशेष रुचि और निरंतर लेखन
- नीट, जेईई और राज्यवार बोर्ड परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों, बदलावों और परिणामों पर गहन फोकस
- UPSC, UPPSC, MPPSC, BPSC, RPSC और JPSC जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं की तैयारी, पैटर्न और नीतिगत पहलुओं पर पैनी नजर
- अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और विदेश नीति से जुड़े विषयों का विश्लेषणात्मक लेखन
- राजनीति, चुनावी आंकड़ों और जमीनी मुद्दों पर सरल और तथ्यपरक एक्सप्लेनर तैयार करने का अनुभव

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