Success Story: UPSC में 3 बार मिली असफलता, फिर भी नहीं टूटा हौसला; फिर पहले ही प्रयास में क्रैक किया BPSC

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आज मुस्कान ठाकुर की सफलता बिहार के हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है। उनका सफर यह संदेश देता है कि किसी भी बड़ी परीक्षा में एक-दो या कई असफलताओं के बाद भी हिम्मत नहीं हारनी चाहिए।

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मुस्कान ठाकुर बीपीएससी सक्सेस स्टोरी

UPSC जैसी देश की सबसे कठिन परीक्षा में कई बार कई साल लग जाते हैं। लेकिन कुछ लोग असफलताओं को अंत नहीं मानते हैं, बल्कि एक नए रास्ते पर निकल जाते हैं। कुछ ऐसी ही कहानी है मुस्कान ठाकुर की। यूपीएससी परीक्षा में लगातार तीन बार असफल होने के बाद भी मुस्कान ठाकुर ने हार नहीं मानी। उन्होंने अपनी रणनीति बदली, तैयारी जारी रखी और बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की 70वीं संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा में पहले ही प्रयास में सफलता हासिल कर ली। 252वीं रैंक के साथ चयनित होकर उन्होंने यह साबित कर दिया कि असफलता मंजिल का अंत नहीं, बल्कि सफलता की नई शुरुआत हो सकती है। चलिए इनसे मिलवाते हैं।

कौन है मुस्कान

मुस्कान ठाकुर का परिवार बिहार के बेगूसराय जिले के समसा पंचायत के वार्ड संख्या-10 से आता है। उनके पिता जितेंद्र ठाकुर गृह मंत्रालय में कार्यरत हैं। वहीं, उनके भाई मोहित ठाकुर भी एक प्रतिष्ठित पद पर हैं। उनके चाचा सुबोध ठाकुर मंसूरचक के उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में किरानी हैं, जबकि दादा करमचंद ठाकुर ने वर्षों तक गांव में लेथम मशीन चलाकर परिवार का पालन-पोषण किया।

पढ़ाई-लिखाई

जैसे कि मुस्कान के पिता जितेंद्र ठाकुर दिल्ली के गृह मंत्रालय में कार्यरत हैं, तो एनडीटीवी में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक मुस्कान का जन्म और पालन-पोषण दिल्ली में हुआ। शुरुआती शिक्षा से लेकर स्कूली पढ़ाई तक सब कुछ दिल्ली में ही हुआ। इसके बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदू कॉलेज से इकोनॉमिक्स (ऑनर्स) में ग्रेजुएशन किया।

कॉलेज जीवन के दौरान वह हिंदू कॉलेज की पार्लियामेंट से भी जुड़ी रहीं। लगातार दो सालों तक सचिव और मंत्री की जिम्मेदारी निभाने के दौरान शासन, नीति-निर्माण और प्रशासन से जुड़े विषयों में उनकी रुचि बढ़ती गई। यहीं से उनके भीतर सिविल सेवा में जाने का सपना आकार लेने लगा। मुस्कान की मेहनत रंग लाई और उन्होंने BPSC 70वीं संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा में पहले ही प्रयास में 252वीं रैंक हासिल कर प्रशासनिक सेवा में जगह बना ली। उनकी सफलता ने यह साबित कर दिया कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदारी से की जाए, तो असफलताएं भी सफलता की सीढ़ी बन जाती हैं।

कैसे की तैयारी

मुस्कान ठाकुर अपनी सफलता का सबसे बड़ा श्रेय अनुशासन और निरंतरता को देती हैं। तैयारी के दौरान वह रोज सुबह 9 बजे से शाम 7 बजे तक लाइब्रेरी में पढ़ाई करती थीं। उन्होंने हर दिन अलग-अलग विषयों के लिए समय तय किया और करेंट अफेयर्स को भी एक विषय की तरह पढ़ा। मेंस की तैयारी के लिए नियमित मॉक टेस्ट दिए, जिससे उनकी आंसर राइटिंग बेहतर हुई।

UPSC में 3 बार असफल, फिर भी नहीं मानी हार

BPSC उनका पहला प्रयास था, लेकिन इससे पहले वह UPSC की परीक्षा तीन बार दे चुकी थीं। एक बार मेंस तक पहुंचीं, लेकिन अंतिम चयन नहीं हुआ। लगातार असफलताओं के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी, अपनी गलतियों से सीखा और नई रणनीति के साथ तैयारी जारी रखी।

परिवार का मिला पूरा सहयोग

मुस्कान बताती हैं कि उनके पिता ने मेहनत करना सिखाया, मां ने हमेशा लक्ष्य पर केंद्रित रहने की प्रेरणा दी और उनकी भाभी ने करियर को लेकर लगातार उत्साहित किया। मुश्किल समय में दोस्तों का साथ भी उनके लिए बड़ी ताकत बना।

अखबार, नोट्स और रिवीजन पर रहा फोकस

तैयारी के दौरान वह रोज अखबार पढ़ती थीं, छोटे-छोटे नोट्स बनाती थीं और बार-बार उनका रिवीजन करती थीं। उनका मानना है कि सीमित संसाधनों के साथ लगातार अभ्यास करना ही सफलता की सबसे बड़ी कुंजी है।

युवाओं के लिए प्रेरणा

आज मुस्कान ठाकुर की सफलता बिहार के हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है। उनका सफर यह संदेश देता है कि किसी भी बड़ी परीक्षा में एक-दो या कई असफलताओं के बाद भी हिम्मत नहीं हारनी चाहिए। सही रणनीति, निरंतर मेहनत और आत्मविश्वास के दम पर हर लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

Dheeraj Pal

लेखक के बारे में

Dheeraj Pal

संक्षिप्त विवरण: धीरज पाल को पत्रकारिता के क्षेत्र में 7 साल का अनुभव है। लाइव हिन्दुस्तान में काम करते हुए इन्हें 4 साल हो गए हैं। धीरज एजुकेशन रिपोर्टर के तौर पर काम कर चुके हैं। अपने करियर के दौरान धीरज ने राजनीति समाचार, एजुकेशन बीट के लिए ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की है।

शैक्षणिक पृष्ठभूमि
धीरज ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए इन मीडिया स्टडीज और राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज से जनसंचार एवं पत्रकारिता से परास्नातक की पढ़ाई की। धीरज पाल ने अपने पत्रकारिता कर की शुरुआत एपीएन न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने लोकमत न्यूज हिंदी और एनडीटीवी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। हिंदुस्तान लाइव में यूपी बोर्ड से लेकर उन्होंने लोकसभा चुनाव कवर करने साथ-साथ खेल जैसे बीट पर काम किया। अब इनका एकमात्र उद्देश्य करियर और एजुकेशन से जुड़ी रुचिगत, सरल, प्रमाणिक और पाठक-हितैषी रूप में प्रस्तुत करना है।

व्यक्तिगत रुचियां
उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के निवासी धीरज पाल को पत्रकारिता और ज्योतिषीय अध्ययन के साथ-साथ घूमने, किताबें पढ़ने और क्रिकेट खेलने का शौक है।

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