success story: मां आंगबाड़ी सेविका, बिना कोचिंग पहले अटेंम्प्ट क्रैक किया BPSC; बेटा बना एसडीएम
सदर प्रखंड के रजौरा गांव निवासी किसान अजीत कुमार व आंगनबाड़ी सेविका अंशु देवी का पुत्र कांतेश कुमार ने पहले ही प्रयास में बीपीएससी परीक्षा में शानदार दोहरी सफलता हासिल कर अपनी प्रतिभा का डंका बजाया है।

जब यूपीएससी या बीपीएससी जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के फाइनल नतीजे हैं, तो इसमें से सफल उम्मीदवारों की कहानियां सामने आती हैं। कुछ उम्मीदवारों की कहानियां ऐसी होती हैं, जो लोगों के लिए प्रेरणास्त्रोत की काम करती है। साथ ही यह भी उम्मीद जगाती हैं कि अगर मेहनत किया जाए, तो सफलता जरूर मिलती है। आज हम आपको बीपीएससी की सक्सेस स्टोरी बताने जा रहे हैं, जो जुड़ी है कांतेश कुमार से। कांतेश की मां आंगनबाड़ी सेविता हैं और पिता किसान है। लेकिन उन्होंने अपनी पढ़ाई से कोई समझौता नहीं किया।
कौन है कांतेश कुमार
जी हां, सदर प्रखंड के रजौरा गांव निवासी किसान अजीत कुमार व आंगनबाड़ी सेविका अंशु देवी का पुत्र कांतेश कुमार ने पहले ही प्रयास में बीपीएससी परीक्षा में शानदार दोहरी सफलता हासिल कर अपनी प्रतिभा का डंका बजाया है। 167वीं रैंक लाकर एसडीएम व पांचवां स्थान लाकर सीडीपीओ के पद चयनित होकर अपने परिवार, गांव समाज व जिले का नाम राज्य स्तर पर बढ़ाया है। इसके अलावा, इसी परीक्षा में उन्होंने पूरे राज्य में 5वां स्थान प्राप्त कर बाल विकास परियोजना पदाधिकारी के पद पर भी अपना चयन सुनिश्चित किया है।
कांतेश की शिक्षा और करियर
कांतेश की सफलता उनकी लगातार मेहनत और स्पष्ट लक्ष्य का परिणाम है। उन्होंने साल 2017 में सिमुलतल्ला आवासीय विद्यालय से मैट्रिक की परीक्षा पास की और पूरे राज्य में 8वीं रैंक हासिल की। इसके बाद विकास विद्यालय, डुमरी से ISC (12वीं) की पढ़ाई पूरी की।
उच्च शिक्षा के लिए उन्होंने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (NIT), तमिलनाडु में दाखिला लिया और साल 2023 में सिविल इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की। पढ़ाई पूरी करने के बाद उनका चयन रक्षा मंत्रालय (Ministry of Defence) में ऑडिटर के पद पर हुआ, जहां उन्होंने अपनी सेवाएं दीं।
हालांकि, कांतेश का सपना प्रशासनिक सेवा में जाकर लोगों की सेवा करना था। इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए उन्होंने बिना किसी कोचिंग के BPSC परीक्षा की तैयारी की और पहले ही प्रयास में परीक्षा पास कर एसडीएम (Sub-Divisional Magistrate) बनने का सपना साकार कर लिया।
आईएएस बनना है अगला लक्ष्य
कांतेश का कहना है कि एसडीएम बनना उनके जीवन का पहला बड़ा लक्ष्य था, जिसे उन्होंने हासिल कर लिया है। अब उनका अगला सपना IAS अधिकारी बनकर देश की सेवा करना है। उनका मानना है कि यदि परिवार, शिक्षकों और समाज का आशीर्वाद और सहयोग इसी तरह मिलता रहा, तो वह निश्चित रूप से अपना यह सपना भी पूरा करेंगे।
युवाओं के लिए संदेश
उन्होंने युवाओं को व किसी भी प्रतियोगी परीक्षा में शामिल होने वालों को सन्देश दिया कि नियमित रूप से यदि छह घंटे ही पढ़ाई करें तो लगातार करते रहें। एनसीईआरटी की पुस्तक पढ़ें। ऑनलाइन प्लेटफार्म से बेहतर कंटेंट लेकर खुद नोट तैयार करें। उन्होने अपनी सफलता का श्रेय दादा स्व विवेकानंद राय के विशेष मार्गदर्शन के अलावा माता -पिता व शिक्षकों को दिया है।
लेखक के बारे में
Dheeraj Palसंक्षिप्त विवरण:
धीरज पाल को पत्रकारिता के क्षेत्र में 7 साल का अनुभव है। लाइव हिन्दुस्तान में काम करते हुए इन्हें 4 साल हो गए हैं। धीरज एजुकेशन रिपोर्टर के तौर पर काम कर चुके हैं। अपने करियर के दौरान धीरज ने राजनीति समाचार, एजुकेशन बीट के लिए ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की है।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
धीरज ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए इन मीडिया स्टडीज और राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज से जनसंचार एवं पत्रकारिता से परास्नातक की पढ़ाई की। धीरज पाल ने अपने पत्रकारिता कर की शुरुआत एपीएन न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने लोकमत न्यूज हिंदी और एनडीटीवी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। हिंदुस्तान लाइव में यूपी बोर्ड से लेकर उन्होंने लोकसभा चुनाव कवर करने साथ-साथ खेल जैसे बीट पर काम किया। अब इनका एकमात्र उद्देश्य करियर और एजुकेशन से जुड़ी रुचिगत, सरल, प्रमाणिक और पाठक-हितैषी रूप में प्रस्तुत करना है।
व्यक्तिगत रुचियां
उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के निवासी धीरज पाल को पत्रकारिता और ज्योतिषीय अध्ययन के साथ-साथ घूमने, किताबें पढ़ने और क्रिकेट खेलने का शौक है।
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