BPSC : बिहार में सिविल जज के 173 पदों पर निकली बहाली, आवेदन की आखिरी तरीख से पहले भरें फॉर्म
बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) ने सिविल जज के 173 पदों पर भर्ती निकाली है। लॉ ग्रेजुएट्स 30 अप्रैल 2026 तक bpsc.bih.nic.in पर जाकर अपना ऑनलाइन फॉर्म आसानी से भर सकते हैं।

क्या आप भी कानून की पढ़ाई पूरी करने के बाद अदालत में जज की कुर्सी पर बैठने का ख्वाब देख रहे हैं? अगर हां तो आपके लिए बिहार से एक बेहद शानदार और पक्की खबर सामने आई है। बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) ने 33वीं बिहार न्यायिक सेवा परीक्षा 2026 का ऐलान कर दिया है। इसके तहत सिविल जज (जूनियर डिवीजन) के पदों पर बंपर बहाली निकाली गई है। आयोग ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट bpsc.bih.nic.in पर 25 फरवरी 2026 को इसका पूरा नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। इस शानदार भर्ती अभियान के जरिए कुल 173 पदों को भरा जाना है। जिन नौजवानों ने एलएलबी (LLB) की पढ़ाई की है और वकालत का अच्छा-खासा तजुर्बा रखते हैं, उनके लिए अपने करियर को संवारने का यह एक सुनहरा मौका है। इस बहाली के लिए ऑनलाइन फॉर्म भरने का सिलसिला शुरू हो चुका है और आप 30 अप्रैल 2026 तक अपना आवेदन जमा कर सकते हैं।
वैकेंसी का पूरा हिसाब-किताब
इस बार बीपीएससी ने कुल 173 पदों पर वेकंसी निकाली है जिसे अलग-अलग वर्गों के हिसाब से बांटा गया है ताकि समाज के हर तबके को आरक्षण का सही और पूरा फायदा मिल सके। अगर हम सामान्य यानी अनारक्षित वर्ग (UR) की बात करें तो उनके लिए सबसे ज्यादा 69 सीटें तय की गई हैं। इसी तरह, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के हिस्से में 17 सीटें आई हैं। अनुसूचित जाति (SC) के उम्मीदवारों के लिए 28 पद और अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए 02 पद खास तौर पर आरक्षित किए गए हैं। इसके अलावा, अत्यंत पिछड़ा वर्ग (EBC) के लिए 36 और पिछड़ा वर्ग (BC) के लिए 21 पदों पर बहाली की जाएगी। कुल मिलाकर यह 173 पदों का एक बड़ा और शानदार मौका है जिसे हाथ से बिल्कुल नहीं जाने देना चाहिए।
तारीखें जो आपके लिए बेहद जरूरी हैं
फॉर्म भरने की आपाधापी में अक्सर हम अहम तारीखें भूल जाते हैं, इसलिए इन्हें ध्यान में रखना बहुत जरूरी है। इस भर्ती का आधिकारिक नोटिफिकेशन 23 फरवरी 2026 को जारी किया गया था, जबकि ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया ठीक दो दिन बाद यानी 25 फरवरी 2026 से शुरू हो गई। आपके पास अपना फॉर्म भरने के लिए काफी वक्त है, क्योंकि इसकी आखिरी तारीख 30 अप्रैल 2026 तय की गई है। इसके साथ ही एक बात और ध्यान देने वाली है कि आपकी उम्र की गणना 01 अगस्त 2025 के आधार पर की जाएगी। वहीं आपके पास वकालत के अनुभव की जो शर्त है उसकी गिनती 23 फरवरी 2026 तक के हिसाब से की जाएगी।
कौन कर सकता है आवेदन?
सिविल जज की इस अहम कुर्सी तक पहुंचने के लिए सिर्फ लॉ की डिग्री का होना ही काफी नहीं है, बल्कि कुछ व्यावहारिक तजुर्बा भी आपके पास होना चाहिए। सबसे पहली शर्त तो यही है कि आपके पास बार काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा मान्यता प्राप्त किसी भी कॉलेज या यूनिवर्सिटी से एलएलबी (LL.B.) की डिग्री होनी चाहिए। इसके बाद आती है अनुभव की बात। 23 फरवरी 2026 तक आपके पास एक वकील के तौर पर लगातार 3 साल की प्रैक्टिस का अनुभव होना बेहद जरूरी है। इस अनुभव का सर्टिफिकेट आपको किसी प्रिंसिपल ज्यूडिशियल ऑफिसर या फिर ऐसे सीनियर वकील से प्रमाणित करवाना होगा, जिनके पास खुद 10 साल से ज्यादा का अनुभव हो। इसके अलावा, अगर आपने कहीं 'लॉ क्लर्क' के रूप में अपनी सेवाएं दी हैं तो उसे भी अनुभव में गिना जाएगा। साथ ही उम्मीदवार का मानसिक और शारीरिक रूप से एकदम फिट होना भी उतना ही जरूरी है।
उम्र की सीमा और फीस का क्या है नियम?
आयोग ने उम्र को लेकर भी स्थिति एकदम साफ कर दी है। इस परीक्षा में शामिल होने के लिए आपकी उम्र कम से कम 22 साल होनी चाहिए। अगर हम अधिकतम उम्र की बात करें तो सामान्य वर्ग के पुरुष उम्मीदवारों के लिए यह सीमा 35 साल है। हालांकि, सामान्य वर्ग की महिलाओं, अत्यंत पिछड़ा वर्ग, पिछड़ा वर्ग, एससी, एसटी, ईडब्ल्यूएस और दिव्यांग उम्मीदवारों को इसमें काफी राहत दी गई है। इन सभी वर्गों के लिए अधिकतम उम्र 40 साल रखी गई है। जहां तक आवेदन शुल्क यानी फीस का सवाल है, तो यह हर किसी के लिए बहुत ही मामूली रखा गया है। चाहे आप सामान्य या ओबीसी वर्ग से आते हों, या फिर एससी/एसटी वर्ग से, सभी उम्मीदवारों को केवल 100 रुपये का ही भुगतान करना होगा।
कैसे होगा आपका चयन?
जज बनने का यह सफर कुल तीन से चार अहम पड़ावों से होकर गुजरेगा। सबसे पहले आपको प्रारंभिक परीक्षा देनी होगी, जो पूरी तरह से ऑब्जेक्टिव टाइप होगी। यह परीक्षा मुख्य रूप से उम्मीदवारों की छंटनी के लिए होती है, खासकर तब जब फॉर्म भरने वालों की तादाद बहुत ज्यादा हो। इसे पास करने के बाद आपको मुख्य परीक्षा में बैठने का मौका मिलेगा। इसमें कुछ पेपर अनिवार्य होते हैं, जबकि 3 पेपर आपको अपनी मर्जी के हिसाब से चुनने होते हैं। जो उम्मीदवार मेन्स में बाजी मार लेते हैं, उन्हें 100 नंबर के इंटरव्यू के लिए बुलाया जाता है। अंत में, सफल होने वाले उम्मीदवारों के सारे कागजातों की गहरी जांच की जाती है, जिसके बाद उन्हें नियुक्ति दी जाती है।
ऑनलाइन आवेदन कैसे करें?
अगर आप सारी शर्तें पूरी करते हैं और जज बनने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं, तो बिना आखिरी तारीख का इंतजार किए अपना फॉर्म भर लें। इसके लिए सबसे पहले आपको बीपीएससी की आधिकारिक वेबसाइट bpsc.bih.nic.in पर जाना होगा। वहां होमपेज पर ऑनलाइन अप्लाई करने का एक सेक्शन मिलेगा, जहां से आपको बीपीएससी ऑनलाइन एप्लीकेशन पोर्टल पर जाना है। वहां 33वीं बिहार न्यायिक सेवा परीक्षा 2026 वाले लिंक पर क्लिक करके सबसे पहले अपना नया रजिस्ट्रेशन पूरा करें। अपनी सारी जानकारी जैसे नाम, पता, पढ़ाई-लिखाई और अनुभव एकदम सही-सही भरें। इसके बाद अपनी पासपोर्ट साइज फोटो, साइन और जरूरी सर्टिफिकेट बताए गए साइज में अपलोड कर दें। अंत में 100 रुपये की फीस ऑनलाइन जमा करके फॉर्म को फाइनल सबमिट कर दें। भविष्य की जरूरत के लिए फॉर्म का प्रिंट निकालकर अपने पास सुरक्षित रख लेना एक समझदारी भरा कदम होगा।
लेखक के बारे में
Himanshu Tiwariशॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।
परिचय एवं अनुभव
हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।
लेखन की सोच और मकसद
हिमांशु के लिए पत्रकारिता का मतलब सिर्फ सूचना देना नहीं है, बल्कि पाठक को सोचने की जगह देना भी है। खासकर करियर और शिक्षा के क्षेत्र में वह यह मानते हैं कि एक गलत या अधूरी खबर किसी छात्र की पूरी तैयारी को भटका सकती है। इसलिए उनके लेखन में सरल भाषा, ठोस तथ्य और व्यावहारिक नजरिया हमेशा प्राथमिकता में रहता है। उनकी कोशिश रहती है कि पाठक को सिर्फ खबर की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी समझ आए कि उस खबर का उसके जीवन और भविष्य से क्या रिश्ता है।
शिक्षा और अकादमिक पृष्ठभूमि
हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।
रुचियां और निजी झुकाव
काम से इतर हिमांशु की गहरी रुचि समकालीन इतिहास, समानांतर सिनेमा और दर्शन में रही है। राजनीति और विदेश नीति पर पढ़ना-लिखना उन्हें विशेष रूप से पसंद है। इसी रुचि के चलते उन्होंने दो लोकसभा चुनावों और दर्जनों विधानसभा चुनावों की कवरेज की, जहां राजनीति को उन्होंने बेहद नजदीक से देखा और समझा। चुनावी आंकड़ों की बारीकियां, नेताओं के भाषण, जमीनी मुद्दे और जनता की प्रतिक्रियाएं, इन सभी पहलुओं को समेटते हुए उन्होंने सैकड़ों खबरें और विश्लेषण तैयार किए, जो राजनीतिक प्रक्रिया की गहरी समझ को दर्शाते हैं।
विशेषज्ञताएं
- शिक्षा, करियर और नौकरियों से जुड़ी खबरों पर विशेष रुचि और निरंतर लेखन
- नीट, जेईई और राज्यवार बोर्ड परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों, बदलावों और परिणामों पर गहन फोकस
- UPSC, UPPSC, MPPSC, BPSC, RPSC और JPSC जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं की तैयारी, पैटर्न और नीतिगत पहलुओं पर पैनी नजर
- अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और विदेश नीति से जुड़े विषयों का विश्लेषणात्मक लेखन
- राजनीति, चुनावी आंकड़ों और जमीनी मुद्दों पर सरल और तथ्यपरक एक्सप्लेनर तैयार करने का अनुभव


