BPSC 71वीं मेन्स परीक्षा का आगाज, पहले दिन निबंध का पेपेर; जानिए आसान था या मुश्किल
BPSC 71st mains exam Essay paper analysis: बिहार लोक सेवा आयोग की 71वीं मुख्य परीक्षा का आगाज हो गया है। पहले दिन हिंदी और निबंध के पेपर में अभ्यर्थियों के चेहरे खिले नजर आए।

BPSC 71st mains exam Essay paper analysis: बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की बहुप्रतीक्षित 71वीं संयुक्त मुख्य (लिखित) प्रतियोगिता परीक्षा शनिवार से राजधानी पटना के विभिन्न केंद्रों पर शुरू हो गई। प्रशासनिक गलियारों में जाने का सपना देख रहे हजारों अभ्यर्थियों के लिए यह दिन उम्मीदों और उत्साह से भरा रहा। पटना के 22 केंद्रों पर आयोजित इस परीक्षा के पहले दिन उपस्थिति का ग्राफ काफी ऊंचा रहा, जिससे साफ है कि युवाओं में बिहार प्रशासनिक सेवा और पुलिस सेवा को लेकर जबरदस्त जुनून है। पहले दिन सामान्य हिंदी और निबंध का पेपर था। आइए जानते हैं यह पेपर कैसा रहा...
दो पालियों में हुई परीक्षा
बिहार प्रशासनिक सेवा और बिहार पुलिस सेवा समेत कुल 1298 पदों पर भर्ती के लिए आयोजित इस परीक्षा के पहले दिन दो सत्रों में एग्जाम लिया गया।
पहली पाली: सुबह के सत्र में सामान्य हिंदी का पेपर हुआ। आंकड़ों के मुताबिक, इसमें 85.2% अभ्यर्थियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
दूसरी पाली: दोपहर के सत्र में निबंध (Essay) का पेपर हुआ, जिसमें करीब 85.1% अभ्यर्थी शामिल हुए।
पटना के मिलर स्कूल और बीएन कॉलेजिएट जैसे केंद्रों पर सुबह से ही परीक्षार्थियों की लंबी कतारें देखी गईं। सुबह 6:45 बजे से ही अशोक राजपथ के पास परीक्षार्थी जुटने लगे थे, जबकि गेट 7:30 बजे खोल दिए गए।
निबंध के पेपर ने बढ़ाया हौसला
परीक्षा देकर बाहर निकले परीक्षार्थियों के चेहरों पर एक सुकून भरी मुस्कान दिखी। विशेष रूप से निबंध के पेपर को लेकर अभ्यर्थियों में काफी सकारात्मक प्रतिक्रिया रही। कई अभ्यर्थियों ने बताया कि सवालों का स्तर बहुत ज्यादा कठिन नहीं था। अभ्यर्थियों का कहना था कि जिन्होंने बीपीएससी के बदले हुए पैटर्न और पिछले कुछ सालों के प्रश्नपत्रों का गहराई से अध्ययन किया है, उनके लिए पेपर काफी स्कोरिंग हो सकता है।
एक अभ्यर्थी ने बताया, "निबंध के विषयों में विविधता थी, लेकिन वे समसामयिक मुद्दों और तार्किक सोच पर आधारित थे। सिलेबस पर पकड़ रखने वालों को ज्यादा मुश्किल नहीं हुई होगी।" जानकारों का मानना है कि निबंध का पेपर स्कोर बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगा।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम: दो स्तर पर हुई जांच
आयोग ने परीक्षा की शुचिता बनाए रखने के लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए थे। किसी भी केंद्र पर बिना गहन तलाशी के प्रवेश की अनुमति नहीं थी। अभ्यर्थियों को केंद्र के अंदर जाने से पहले दो स्तर की सुरक्षा जांच से गुजरना पड़ा। ई-एडमिट कार्ड की हार्ड कॉपी और मूल पहचान पत्र (ID) का मिलान करने के बाद ही उन्हें सीट तक जाने दिया गया।
परीक्षा केंद्रों पर माइक के जरिए लगातार घोषणाएं की जा रही थीं ताकि परीक्षार्थियों को समय का ध्यान रहे। दूसरी पाली के लिए दोपहर 1:00 बजे तक ही प्रवेश की अनुमति दी गई थी, जिससे अनुशासन बना रहा। प्रशासन की ओर से पूरी कोशिश की गई कि परीक्षा शांतिपूर्ण और बिना किसी बाधा के संपन्न हो।
1298 पदों पर होगी परीक्षा
गौरतलब है कि 71वीं मुख्य परीक्षा में पदों की संख्या (1298) अच्छी-खासी है, जिससे अभ्यर्थियों के पास सफल होने का सुनहरा मौका है। पहले दिन के रुझान बताते हैं कि इस बार कॉम्पीटिशन तगड़ा होने वाला है, लेकिन पेपर का संतुलित स्तर गंभीर तैयारी करने वाले छात्रों के पक्ष में जा सकता है। अब सभी की नजरें आने वाले दिनों में होने वाले सामान्य अध्ययन (GS) के पेपरों पर टिकी हैं, जो इस परीक्षा की मेरिट लिस्ट तय करने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
लेखक के बारे में
Himanshu Tiwariशॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।
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हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।
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हिमांशु के लिए पत्रकारिता का मतलब सिर्फ सूचना देना नहीं है, बल्कि पाठक को सोचने की जगह देना भी है। खासकर करियर और शिक्षा के क्षेत्र में वह यह मानते हैं कि एक गलत या अधूरी खबर किसी छात्र की पूरी तैयारी को भटका सकती है। इसलिए उनके लेखन में सरल भाषा, ठोस तथ्य और व्यावहारिक नजरिया हमेशा प्राथमिकता में रहता है। उनकी कोशिश रहती है कि पाठक को सिर्फ खबर की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी समझ आए कि उस खबर का उसके जीवन और भविष्य से क्या रिश्ता है।
शिक्षा और अकादमिक पृष्ठभूमि
हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।
रुचियां और निजी झुकाव
काम से इतर हिमांशु की गहरी रुचि समकालीन इतिहास, समानांतर सिनेमा और दर्शन में रही है। राजनीति और विदेश नीति पर पढ़ना-लिखना उन्हें विशेष रूप से पसंद है। इसी रुचि के चलते उन्होंने दो लोकसभा चुनावों और दर्जनों विधानसभा चुनावों की कवरेज की, जहां राजनीति को उन्होंने बेहद नजदीक से देखा और समझा। चुनावी आंकड़ों की बारीकियां, नेताओं के भाषण, जमीनी मुद्दे और जनता की प्रतिक्रियाएं, इन सभी पहलुओं को समेटते हुए उन्होंने सैकड़ों खबरें और विश्लेषण तैयार किए, जो राजनीतिक प्रक्रिया की गहरी समझ को दर्शाते हैं।
विशेषज्ञताएं
- शिक्षा, करियर और नौकरियों से जुड़ी खबरों पर विशेष रुचि और निरंतर लेखन
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- अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और विदेश नीति से जुड़े विषयों का विश्लेषणात्मक लेखन
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