BPSC 70वीं के नतीजों में कैमूर का जलवा, दो बने डीएसपी, एक को मिला ईओ का पद
बीपीएससी 70वीं के नतीजों में कैमूर के युवाओं ने कमाल कर दिया है। जिले के अभिनव और अतुल डीएसपी बने हैं, जबकि अमन ने ईओ का पद हासिल कर जिले का नाम रोशन किया है।

कहते हैं कि अगर आपके इरादे मजबूत हों और मेहनत सच्ची हो, तो कोई भी मंजिल दूर नहीं होती। इसी बात को सच कर दिखाया है बिहार के कैमूर जिले के तीन होनहार युवाओं ने। बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) की 70वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा के नतीजे जैसे ही सामने आए, कैमूर जिले में जश्न का माहौल बन गया। अभिनव कुमार सिंह, अतुल कुमार और अमन मल्होत्रा ने अपनी कामयाबी का परचम लहराते हुए न सिर्फ अपने माता-पिता का सिर फख्र से ऊंचा किया है, बल्कि पूरे जिले के लिए एक बड़ी और शानदार मिसाल कायम की है।
जैसे ही बीपीएससी के रिजल्ट की खबर कैमूर पहुंची, लोगों के चेहरों पर खुशी साफ छलकने लगी। गांव की चौपालों से लेकर शहर के चौक-चौराहों तक, हर तरफ बस इन्ही तीन होनहार युवाओं की चर्चा है। किसी के घर बधाइयों का तांता लगा हुआ है, तो कोई खुशी-खुशी अपने पड़ोसियों को मिठाइयां खिला रहा है। इन युवाओं में से दो ने पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) का अहम और रुतबे वाला ओहदा हासिल किया है, जबकि एक ने नगर विकास एवं आवास विभाग में नगर कार्यपालक पदाधिकारी (ईओ) की कुर्सी पर अपनी जगह पक्की कर ली है। इन तीनों की कहानी उन तमाम युवाओं के लिए एक बड़ा सबक है, जो दिन-रात एक करके सरकारी नौकरी की तैयारियों में जुटे हुए हैं।
183वीं रैंक हासिल कर बने डीएसपी
सबसे पहले बात करते हैं दुर्गावती प्रखंड के अवर्हियां गांव के रहने वाले अभिनव कुमार सिंह की। अभिनव ने पूरे बिहार में 183वीं रैंक हासिल कर डीएसपी का पद अपने नाम किया है। इनके पिता अभय कुमार सिंह, जिन्हें लोग प्यार से नंदा यादव भी कहते हैं, बेटे की इस बड़ी कामयाबी पर फूले नहीं समा रहे हैं। सच पूछिए तो अभिनव का सफर काफी दिलचस्प रहा है। गांव के स्कूल से शुरुआती पढ़ाई पूरी करने के बाद वे पटना यूनिवर्सिटी पहुंचे और वहां से ग्रेजुएशन करने के बाद इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से अपनी मास्टर डिग्री पूरी की। आपको जानकर थोड़ी हैरानी हो सकती है कि साल 2024 में ही अभिनव बीपीएससी के जरिए प्लस-टू के टीचर बन गए थे। उनके पास एक अच्छी-खासी सेटल नौकरी थी, लेकिन उनके भीतर खाकी वर्दी पहनने और पुलिस सर्विस में जाने का एक अलग ही जुनून था। उन्होंने आराम की जिंदगी से समझौता करने के बजाय अपनी मेहनत जारी रखी और आखिरकार डीएसपी बनकर ही दम लिया।
246वीं रैंक ला लहराया परचम
वहीं, चैनपुर प्रखंड के चंदा गांव से ताल्लुक रखने वाले अतुल कुमार ने भी शानदार प्रदर्शन करते हुए 246वीं रैंक पाई है और अब वे एक डीएसपी के तौर पर अपनी सेवाएं देंगे। एक किसान पिता गोपाल प्रसाद सिंह और शिक्षिका मां संगीता देवी के बेटे अतुल की यह सफलता बताती है कि अगर परिवार का साथ और सही माहौल मिले, तो बच्चा सचमुच आसमान छू सकता है। खेती-किसानी से जुड़े एक सामान्य परिवार से निकलकर इतने बड़े अधिकारी की कुर्सी तक पहुंचने का अतुल का यह सफर बेहद प्रेरणादायक है। उनके गांव चंदा में तो जैसे दीवाली और होली एक ही दिन आ गई है। रिश्तेदार हों या गांव के बड़े-बुजुर्ग, हर कोई अतुल के घर पहुंचकर उन्हें आशीर्वाद दे रहा है।
कैमूर की इस बेहतरीन कामयाबी की लिस्ट में तीसरा बड़ा नाम है अमन मल्होत्रा का। चैनपुर नगर पंचायत के वार्ड नंबर 1 के रहने वाले अमन ने 278वीं रैंक के साथ नगर कार्यपालक पदाधिकारी (ईओ) का पद हासिल किया है। अमन के पिता अरुण मल्होत्रा पेशे से ठेकेदार हैं और मां आशा देवी एक कुशल गृहिणी हैं। अमन की कहानी थोड़ी अलग होने के साथ-साथ बेहद शानदार भी है।
दरअसल, अमन पहले ही संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) जैसी देश की सबसे कठिन मानी जाने वाली परीक्षा पास कर चुके हैं और उन्हें आईआरएस (IRS) कैडर भी मिल चुका है। अमन के चाचा डॉ. चंद्रशेखर सिंह बताते हैं कि अमन ने बीपीएससी का यह एग्जाम अपनी यूपीएससी परीक्षा से पहले ही दिया था। लगातार इतनी बड़ी और मुश्किल परीक्षाओं में झंडे गाड़ना ये साफ तौर पर साबित करता है कि अमन की तैयारी और उनका विजन कितना क्लीयर था।


