क्या एआई ने चेक की 70वीं बीपीएससी मुख्य परीक्षा की कॉपियां? क्या है हकीकत, आयोग ने किया खुलासा

लाइव हिन्दुस्तान
Follow us on Google News
share

 बीपीएससी ने 70वीं मुख्य परीक्षा की कॉपियां एआई से चेक होने की अफवाहों को पूरी तरह फर्जी बताया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि मूल्यांकन अनुभवी प्रोफेसरों द्वारा ऑन स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) के जरिए हुआ है।

bpsc 70th exam copies checking ai rumors osm truth latest news
बीपीएससी

आज के दौर में सोशल मीडिया पर कब कौन सी खबर आग की तरह फैल जाए, कोई नहीं जानता। खासकर जब बात सरकारी नौकरियों और करियर की हो, तो छात्रों की धड़कनें तेज होना लाजमी है। पिछले कुछ दिनों से बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी ) की 70वीं संयुक्त (लिखित) प्रतियोगी परीक्षा को लेकर एक अजीबोगरीब दावा हवा में तैर रहा था। कहा जा रहा था कि इस बार इंसानों ने नहीं, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) ने छात्रों की कॉपियां जांची हैं। इस खबर ने उन हजारों नौजवानों की रातों की नींद उड़ा दी थी, जिन्होंने दिन रात एक करके यह इम्तिहान दिया था। लेकिन अब खुद बीपीएससी ने सामने आकर इन तमाम अफवाहों पर करारा तमाचा जड़ा है। आयोग ने साफ कर दिया है कि ये सारी बातें कोरी कल्पना हैं और सच्चाई इससे कोसों दूर है।

अफवाहों पर बीपीएससी का कड़ा प्रहार

बीपीएससी ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल से एक अहम जानकारी साझा करते हुए इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। आयोग ने दो टूक शब्दों में कहा है कि कॉपियां किसी रोबोट या एआई ने नहीं, बल्कि देश के जाने माने और अनुभवी शिक्षाविदों ने चेक की हैं। सोशल मीडिया पर उछाली जा रही इन बातों को आयोग ने सिर्फ छात्रों को गुमराह करने और उनके दिमाग में बेवजह का कन्फ्यूजन पैदा करने की एक हरकत करार दिया है।

क्या है ओएसएम का पूरा सच?

आयोग ने तफ्सील से बताया कि कॉपियां जांचने का काम दरअसल ऑन स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) सिस्टम के जरिए हुआ है। अब आपके जेहन में ये सवाल उठ रहा होगा कि आखिर ये ओएसएम क्या बला है? आसान लफ्जों में कहें तो, यह एक ऐसा सुरक्षित डिजिटल तरीका है जहां कागज की कॉपियों को स्कैन करके कंप्यूटर स्क्रीन पर लाया जाता है, और फिर असली इंसान (यानी प्रोफेसर) उसे पढ़कर नंबर देते हैं।

बीपीएससी ने यह भी साफ किया कि यह कोई नया, रातों रात लाया गया सिस्टम नहीं है। जनवरी 2023 से ही आयोग इस तकनीक का बखूबी इस्तेमाल कर रहा है। आपको बता दें कि इससे पहले 67वीं, 68वीं और 69वीं संयुक्त (मुख्य) प्रतियोगी परीक्षाओं की कॉपियां भी इसी बेहद सुरक्षित और पारदर्शी तरीके से जांची जा चुकी हैं।

चार महीने तक चला विशेषज्ञों का काम

70वीं परीक्षा के मामले में आयोग ने पूरी जिम्मेदारी के साथ बताया कि पहले से तय कड़े पैमानों के आधार पर देश की जानी मानी यूनिवर्सिटीज के प्रोफेसरों को यह जिम्मा सौंपा गया था। ये कोई आम लोग नहीं, बल्कि अपने अपने विषयों के महारथी और तजुर्बेकार शिक्षाविद थे। इन विशेषज्ञों ने पूरे चार महीने का लंबा वक्त लेकर एक एक कॉपी को बारीकी से परखा है। इसलिए, एआई द्वारा बिना समझे बूझे नंबर बांटने की बात पूरी तरह से बेबुनियाद साबित होती है।

डेटा सुरक्षा और फुलप्रूफ सिस्टम

अक्सर जब बात डिजिटल सिस्टम की होती है, तो हैकिंग या डेटा से छेड़छाड़ का डर सताने लगता है। छात्रों के इस डर को दूर करते हुए बीपीएससी ने अपने सुरक्षा इंतजामों का भी पूरा खाका पेश किया है। आयोग का कहना है कि ऑन स्क्रीन मार्किंग से जुड़ा सारा का सारा डेटा उनके अपने बेहद सुरक्षित सर्वर्स पर महफूज है। इतना ही नहीं, किसी भी तरह की अनहोनी या तकनीकी खराबी से निपटने के लिए डिजास्टर रिकवरी सर्वर भी बनाए गए हैं, जिन्हें तय मानकों के हिसाब से गुप्त और सुरक्षित जगहों पर रखा गया है।

सिस्टम को फुलप्रूफ बनाने के लिए हर स्तर पर कड़े चेक और बैलेंस मौजूद हैं। मतलब ये कि कौन सी कॉपी किस प्रोफेसर ने चेक की, कब की, और कितने नंबर दिए, इसका पूरा एक डिजिटल ट्रेल मौजूद है। कोई भी गतिविधि सिस्टम की नजर से बच नहीं सकती। इसलिए डेटा या आंसर शीट के साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ का दावा पूरी तरह से मनगढ़ंत और झूठा है। आखिर में, बीपीएससी ने उम्मीदवारों को एक बड़ी सलाह देते हुए कहा है कि वे सोशल मीडिया पर वायरल हो रही ऐसी गैर जिम्मेदाराना बातों पर आंख मूंदकर भरोसा न करें और अपने खुद के विवेक का इस्तेमाल करें।

Himanshu Tiwari

लेखक के बारे में

Himanshu Tiwari

शॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।

परिचय एवं अनुभव
हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।

लेखन की सोच और मकसद
हिमांशु के लिए पत्रकारिता का मतलब सिर्फ सूचना देना नहीं है, बल्कि पाठक को सोचने की जगह देना भी है। खासकर करियर और शिक्षा के क्षेत्र में वह यह मानते हैं कि एक गलत या अधूरी खबर किसी छात्र की पूरी तैयारी को भटका सकती है। इसलिए उनके लेखन में सरल भाषा, ठोस तथ्य और व्यावहारिक नजरिया हमेशा प्राथमिकता में रहता है। उनकी कोशिश रहती है कि पाठक को सिर्फ खबर की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी समझ आए कि उस खबर का उसके जीवन और भविष्य से क्या रिश्ता है।

शिक्षा और अकादमिक पृष्ठभूमि
हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।

रुचियां और निजी झुकाव
काम से इतर हिमांशु की गहरी रुचि समकालीन इतिहास, समानांतर सिनेमा और दर्शन में रही है। राजनीति और विदेश नीति पर पढ़ना-लिखना उन्हें विशेष रूप से पसंद है। इसी रुचि के चलते उन्होंने दो लोकसभा चुनावों और दर्जनों विधानसभा चुनावों की कवरेज की, जहां राजनीति को उन्होंने बेहद नजदीक से देखा और समझा। चुनावी आंकड़ों की बारीकियां, नेताओं के भाषण, जमीनी मुद्दे और जनता की प्रतिक्रियाएं, इन सभी पहलुओं को समेटते हुए उन्होंने सैकड़ों खबरें और विश्लेषण तैयार किए, जो राजनीतिक प्रक्रिया की गहरी समझ को दर्शाते हैं।

विशेषज्ञताएं
- शिक्षा, करियर और नौकरियों से जुड़ी खबरों पर विशेष रुचि और निरंतर लेखन
- नीट, जेईई और राज्यवार बोर्ड परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों, बदलावों और परिणामों पर गहन फोकस
- UPSC, UPPSC, MPPSC, BPSC, RPSC और JPSC जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं की तैयारी, पैटर्न और नीतिगत पहलुओं पर पैनी नजर
- अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और विदेश नीति से जुड़े विषयों का विश्लेषणात्मक लेखन
- राजनीति, चुनावी आंकड़ों और जमीनी मुद्दों पर सरल और तथ्यपरक एक्सप्लेनर तैयार करने का अनुभव

और पढ़ें
Hindi News के साथ करियर सेक्शन में पढ़ें लेटेस्ट एजुकेशन न्यूज़, सरकारी जॉब , एग्जाम , एडमिशन से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण खबरें। हर अपडेट सबसे पहले पाने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।
Hindi Newsकरियर न्यूज़क्या एआई ने चेक की 70वीं बीपीएससी मुख्य परीक्षा की कॉपियां? क्या है हकीकत