NEET और JEE छोड़ पहले मैथ्स का वर्ल्ड टॉपर बना, अब 3.55 करोड़ की स्कॉलरशिप जीती
17 वर्षीय प्रणव को अमेरिका की प्रतिष्ठित ब्राउन यूनिवर्सिटी से 3.55 करोड़ रुपये की स्कॉलरशिप मिली है। इस स्कॉलरशिप में उनकी चार साल की ग्रेजुएशन की पढ़ाई, ट्यूशन फीस और वहाँ रहने का खर्च शामिल है।

भारत में मैथ्स और साइंस के होनहार छात्र आमतौर पर 10वीं के बाद इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा जेईई मेन और मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट यूजी की कोचिंग में जुट जाते हैं। लेकिन तमिलनाडु के छात्र प्रणव इलांगो ने कामयाबी के लिए एक अलग राह चुनी। 17 वर्षीय प्रणव को अमेरिका की प्रतिष्ठित ब्राउन यूनिवर्सिटी से 3.55 करोड़ रुपये की स्कॉलरशिप मिली है। इस स्कॉलरशिप में उनकी चार साल की ग्रेजुएशन की पढ़ाई, ट्यूशन फीस और वहाँ रहने का खर्च शामिल है। अमेरिका की यूनिवर्सिटी से मिली स्कॉलरशिप से वे पब्लिक हेल्थ और एप्लाइड मैथ्स जैसे विषयों की पढ़ाई करेंगे। प्रणव का लक्ष्य अपनी शिक्षा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के ज्ञान का उपयोग करके समाज के कल्याण के लिए काम करना है।
ब्राउन यूनिवर्सिटी में दाखिला पाना बेहद कठिन
ब्राउन यूनिवर्सिटी में दाखिला पाना बेहद कठिन माना जाता है, क्योंकि यहां केवल 5% आवेदकों को ही दाखिला मिलता है। प्रणव इलांगो एक मध्यमवर्गीय परिवार से आते हैं। उनके माता और पिता दोनों ही शिक्षक हैं
ब्राउन यूनिवर्सिटी का फ्लेक्सिबल करिकुलम उसे और ज्यादा एक्सप्लोर करने में मदद करेगा
ब्राउन यूनिवर्सिटी के प्रणव के लिए खास होने का एक और कारण इसका फ्लेक्सिबल, ओपन करिकुलम है। यह उसे प्रोविडेंस, रोड आइलैंड में यूनिवर्सिटी के रिसर्च-फोकस्ड कैंपस में पढ़ाई करते हुए अलग-अलग सब्जेक्ट्स को एक्सप्लोर करने का मौका देगा। ब्राउन यूनिवर्सिटी उन आठ प्राइवेट यूनिवर्सिटीज में से एक है जो यूनाइटेड स्टेट्स में आइवी लीग बनाती हैं। यूनिवर्सिटी एलिजिबल स्टूडेंट्स को इंस्टीट्यूशनल ग्रांट्स के ज़रिए फाइनेंशियल मदद भी देती है ताकि पढ़ाई का खर्च पूरा हो सके।
दुनिया में मैथ्स में डंका
इससे पहले प्रणव ने वर्ष 2023-24 की कैम्ब्रिज इंटरनेशनल आईजीसीएसई (IGCSE) मैथ्स परीक्षा में पूरी दुनिया में शीर्ष स्थान (वर्ल्ड टॉपर) हासिल किया था। अपनी तैयारी के दौरान प्रणव ने नींद और आराम तक का त्याग कर दिया था।
13 साल की उम्र से ही तैयारी शुरू की
प्रणव ने महज 13 साल की उम्र में ही अपनी तैयारी शुरू कर दी थी। वे 'डेक्सटेरिटी ग्लोबल' के नेशनल एजुकेटर डेवलपमेंट प्रोग्राम से जुड़े, जहां उन्हें अंतरराष्ट्रीय शिक्षा के लिए मार्गदर्शन और ट्रेनिंग मिली। उनकी यह ट्रेनिंग केवल पढ़ाई (एकेडमिक्स) तक सीमित नहीं थी, बल्कि उन्हें लीडरशिप और प्रॉब्लम सॉल्विंग की भी ट्रेनिंग दी गई।
प्रणव इलांगो की अचीवमेंट खास क्यों है
प्रणव का सफर इसलिए अलग है क्योंकि उन्होंने बहुत कम उम्र में ही इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी में एडमिशन की तैयारी शुरू कर दी थी।
प्रणव ने सिर्फ ट्रेडिशनल एंट्रेंस एग्जाम पर फोकस करने के बजाय, उन्होंने एकेडमिक्स, प्रोजेक्ट्स और टेक्नोलॉजी के प्रैक्टिकल एप्लीकेशन के जरिए अपनी प्रोफाइल बनाई। मैथ्स, AI, डेटा साइंस और पब्लिक हेल्थ का उनका कॉम्बिनेशन भी उनकी एकेडमिक जर्नी को एक साफ दिशा देता है।
उनकी अचीवमेंट दूसरे इंडियन स्टूडेंट्स को इंस्पायर कर सकती है जो ट्रेडिशनल JEE और NEET के रास्ते से हटकर टॉप इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी में मौके तलाशना चाहते हैं।


