IIT BHU से पढ़ाई, मां के निधन के बाद नहीं मानी हार, 22 की उम्र में बनें बिहार के सबसे युवा SDM

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कहते हैं कि अगर ईमानदारी से मेहनत की जाए, तो मंजिल हासिल करने में ज्यादा देर नहीं लगती है। एक ऐसी ही कहानी है बिहार के युवा एसडीएम नसीन कुमार निशांत की। जिन्होंने कई चुनौतियों का सामना किया।

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नसीन कुमार निशांत की सक्सेस स्टोरी

कहते हैं कि अगर ईमानदारी से मेहनत की जाए, तो मंजिल हासिल करने में ज्यादा देर नहीं लगती है। एक ऐसी ही कहानी है बिहार के युवा एसडीएम नसीन कुमार निशांत की। जिन्होंने कई चुनौतियों का सामना किया। बेहद कम उम्र में मां का गुजर जाना, उनके जीवन का सबसे बड़ा धक्का लगा। यहां तक लोगों के ताने सहे, लेकिन फिर भी हार नहीं मानी। उन्होंने महज 22 साल की उम्र में ना सिर्फ बीपीएससी क्रैक किया, बल्कि बिहार के सबसे युवा एसडीएम की लिस्ट में भी अपना दर्ज करा लिया। हालांकि उनके लिए यह सफर आसान नहीं था। चलिए आज इनकी सक्सेस स्टोरी जानते हैं।

कौन हैं नसीन कुमार निशांत

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक नसीन कुमार निशांत का जन्म 13 अप्रैल 1996 को पुपरी में हुआ। उनके पिता महेंद्र एक वकील हैं और मां मंजू कुमारी थीं, जो पेशे से एक शिक्षिका थीं। नसीन शुरू से ही पढ़ाई में तेज थे। निशांत ने छठी से दसवीं तक की पढ़ाई डीएवी स्कूल पुपरी सीतामढ़ी से की। फिर दरभंगा के स्कूल में 12वीं कक्षा में दाखिल लिया। नसीन दसवीं में टॉपर रहे थे। पढ़ाई में तेज होने की वजह से उन्होंने आईआईटी बीएचयू में एडमिशन लिया और यहां से इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की।

कम उम्र में मां का निधन

नसीन की जिंदगी का सबसे मुश्किल दौर तब आया, जब महज 20 साल की उम्र में उन्होंने अपनी मां को खो दिया। मां के निधन से वे पूरी तरह टूट गए थे। घर में मातम का माहौल था और दूसरी ओर उनकी सफलता को लेकर लोगों के ताने भी सुनने पड़ते थे। मां के जाने के बाद परिवार की पूरी जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई। इस कठिन समय में भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और अपनी जिम्मेदारियों को पूरी संवेदनशीलता और मजबूती के साथ निभाया।

आईआईटी से पढ़ाई

बता दें कि नसीन ने आईआईटी की पढ़ाई करने के बाद एक कॉर्पोरेट कंपनी में काम भी किया। लेकिन उन्हें सरकारी अफसर बनना था। इसलिए नौकरी छोड़कर पूरे समर्पण के साथ BPSC की तैयारी शुरू की, जो उनके जीवन का एक साहसी निर्णय था। बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) ने जून 2021 में 64वीं बिहार प्रशासनिक सेवा परीक्षा का रिजल्ट घोषित किया था, जिसमें अपने पहले ही प्रयास में नसीन कुमार प्रशांत ने 140वीं रैंक प्राप्त कर महज 22 साल की उम्र में एसडीएम बनने में सफलता हासिल की।

कोचिंग के लिए नहीं थी फीस

एक मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक नसीन कुमार निशांत कहते हैं कि उनका एनआईटी में चयन हो गया था, मगर वे आईआईटी से माइनिंग इंजीनियर की डिग्री हासिल करना चाहते थे। इसलिए राजस्थान के कोटा चले आए। तब परिवार की आर्थिक स्थिति सही नहीं थी। परिजनों ने सिर्फ 35 हजार रुपए दिए।

संचालक के पकड़े पैर

नसीन के पास 35 हजार रुपए ही थे जबकि कोटा में कोचिंग की फीस ही 76 हजार रुपए थी। वहीं, खाने-पीने का खर्च अलग। इस पर नसीन ने कोचिंग संचालक के पैर पकड़ लिए और उन्हें भरोसा दिलाया कि वो दसवीं का टॉपर रहा है। आईआईटी की परीक्षा पास कर सकता है। फीस कम करके उसे दाखिला दिया जाए। कोटा में कोचिंग वालों ने नसीन के सामने शर्त रखी कि एक माह बाद टेस्ट होगा, जिसमें अगर वो 200 नंबर आता है तो फीस कम हो सकती है। नसीन उसमें 211 नंबर लाए। फिर नाममात्र फीस में कोचिंग की और आईआईटी बीएचयू से इंजीनियरिंग की।

Dheeraj Pal

लेखक के बारे में

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संक्षिप्त विवरण: धीरज पाल को पत्रकारिता के क्षेत्र में 7 साल का अनुभव है। लाइव हिन्दुस्तान में काम करते हुए इन्हें 4 साल हो गए हैं। धीरज एजुकेशन रिपोर्टर के तौर पर काम कर चुके हैं। अपने करियर के दौरान धीरज ने राजनीति समाचार, एजुकेशन बीट के लिए ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की है।

शैक्षणिक पृष्ठभूमि
धीरज ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए इन मीडिया स्टडीज और राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज से जनसंचार एवं पत्रकारिता से परास्नातक की पढ़ाई की। धीरज पाल ने अपने पत्रकारिता कर की शुरुआत एपीएन न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने लोकमत न्यूज हिंदी और एनडीटीवी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। हिंदुस्तान लाइव में यूपी बोर्ड से लेकर उन्होंने लोकसभा चुनाव कवर करने साथ-साथ खेल जैसे बीट पर काम किया। अब इनका एकमात्र उद्देश्य करियर और एजुकेशन से जुड़ी रुचिगत, सरल, प्रमाणिक और पाठक-हितैषी रूप में प्रस्तुत करना है।

व्यक्तिगत रुचियां
उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के निवासी धीरज पाल को पत्रकारिता और ज्योतिषीय अध्ययन के साथ-साथ घूमने, किताबें पढ़ने और क्रिकेट खेलने का शौक है।

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