
मंजरीक मृणाल पहुंचे विधानसभा, माइक्रो-चिप्स, नैनो-टेक से रहा नाता, अब करेंगे सदन की इंजीनियरिंग
Bihar Chunav 2025: बिहार की वारिसनगर की जनता ने इस बार मंजरीक मृणाल को विधायक चुनकर विधानसभा भेजा है। मंजरीक का नाता राजनीति से नहीं बल्कि सेमीकंडक्टर तकनीक, माइक्रो-नैनो मैन्युफैक्चरिंग और इंडस्ट्रियल रिसर्च से रहा है।
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के मद्देनजर वारिसनगर की जनता ने इस बार एक ऐसे प्रतिनिधि को चुना है जिसका सफर राजनीति की पारंपरिक राहों से नहीं गुजरता। डॉ. मंजरीक मृणाल आईआईएससी बैंगलोर में वैज्ञानिक रहे हैं, पहली ही चुनावी पारी में जेडीयू के टिकट पर वारिसनगर से चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे हैं। वे उन चंद उम्मीदवारों में शामिल हैं जिन्होंने उच्च शिक्षा, अंतरराष्ट्रीय अनुभव और वैज्ञानिक मानसिकता के साथ चुनावी राजनीति में कदम रखा और जनता ने उन्हें खुले दिल से स्वीकार किया।
राजनीति में कई उच्च शिक्षित दावेदार इस बार टिक नहीं पाए लेकिन डॉ. मृणाल की जीत ने यह साबित कर दिया कि बिहार के मतदाता अब नए तरह के नेतृत्व को मौका देने के लिए तैयार हैं। सेमीकंडक्टर तकनीक, माइक्रो-नैनो मैन्युफैक्चरिंग और इंडस्ट्रियल रिसर्च से जुड़े उनके लंबे अनुभव ने उन्हें अलग पहचान दी है। उन्होंने आईआईएससी में भारत का पहला स्वदेशी लिथोग्राफी सिस्टम तैयार करने में प्रमुख भूमिका निभाई थी, जो देश की चिप निर्माण क्षमता के लिए एक ऐतिहासिक कदम माना जाता है।
विज्ञान की दिशा में खूब किया काम
हिन्दुस्तान टाइम्स से बातचीत में वह बताते हैं कि विज्ञान ने उन्हें समस्याओं को हल करने, बेहतर सिस्टम बनाने और नतीजे देने की क्षमता सिखाई। यही सोच उन्हें राजनीति में लाई। एचपी लैब्ल में काम करने, यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास में पढ़ाने और वैश्विक उद्योगों के साथ शोध करने के बाद उनका मानना है कि बिहार अब उस मोड़ पर है जहां आधुनिक तकनीक, उद्योग और वैज्ञानिक सोच को नीतियों में जोड़ा जा सकता है। वे कहते हैं कि विज्ञान में नवाचार होता है और राजनीति में उसका क्रियान्वयन और वे दोनों को साथ लेकर चलना चाहते हैं।
किस दिशा में ध्यान देना चाहते हैं मंजरीक मृणाल
गौरतलब है कि बिहार की सबसे बड़ी चुनौती रोजगार और पलायन है पर उनका मानना है कि पिछले 15-20 वर्षों में बनी विकास की नींव अब बड़े बदलावों का आधार बन सकती है। वे मानते हैं कि राज्य अब केवल श्रमिक भेजने वाला प्रदेश नहीं रहेगा, बल्कि उद्योग और तकनीक आधारित नौकरियां पैदा करने वाला राज्य बन सकता है। रोड, बिजली, सुरक्षा और संस्थागत सुधारों ने जहां आधार दिया है, वहीं अगला चरण उन्नत मैन्युफैक्चरिंग, एग्री-टेक, फूड प्रोसेसिंग, कौशल विकास और आधुनिक टेक आधारित रोजगार पर केंद्रित होना चाहिए।
सेमीकंडक्टर के भविष्य पर क्या बोले मृणाल
प्रधानमंत्री द्वारा चुनाव रैलियों में बिहार के सेमीकंडक्टर भविष्य की चर्चा पर वे कहते हैं कि सेमीकंडक्टर का अर्थ केवल अरबों डॉलर की फैब लगाना नहीं है। असल में यह एक विशाल इकोसिस्टम है जिसमें पैकेजिंग, असेंबली, कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग, सप्लाई चेन और स्किल डेवेलपमेंट शामिल है। डॉ. मृणाल मानते हैं कि बिहार इस इकोसिस्टम में चरणबद्ध तरीके से प्रवेश कर सकता है और देश के प्रमुख पैकेजिंग-असेंबली हब के रूप में उभर सकता है। इससे रोजगार, उद्योग और तकनीकी क्षमता, तीनों में बड़ा परिवर्तन आएगा।
किन मोर्चों पर बिहार को बताया मजबूत
अंतरराष्ट्रीय अकादमिक और शोध अनुभव के आधार पर वे बताते हैं कि निवेशक तीन चीजें देखते हैं- स्थिरता, मानव संसाधन और विस्तार की क्षमता। उनके अनुसार बिहार आज इन तीनों मोर्चों पर मजबूत स्थिति में खड़ा है। वे विशेष तौर पर मैन्युफैक्चरिंग, एग्री-टेक, फूड प्रोसेसिंग, सेमीकंडक्टर-अडजेसेंट यूनिट्स, और स्किल-रिसर्च पार्क को निवेश के बड़े अवसर क्षेत्रों के रूप में पहचानते हैं।
बिहार को अग्रणी राज्यों की सूची में लाने के लिए वे कहते हैं कि नौकरी निर्माण, उद्योग की मौजूदगी, बाजार की जरूरतों के अनुसार कौशल विकास, और कृषि में वैल्यू एडिशन जैसे बुनियादी मोर्चों पर तेज़ और वैज्ञानिक तरीके से काम करना होगा। उनकी राय में समाधान आज के समय की टेक्नोलॉजी और आर्थिक जरूरतों के अनुरूप होने चाहिए, न कि दशक पुराने तरीकों पर आधारित।





