पिता बेचते हैं टायर, बेटी बनी बिहार 10वीं टॉपर, 492 अंक से चमकी सबरीन

Mar 29, 2026 03:21 pm ISTHimanshu Tiwari लाइव हिन्दुस्तान
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बिहार बोर्ड मैट्रिक रिजल्ट 2026 में वैशाली की सबरीन परवीन ने 492 अंक लाकर टॉप किया। सबरीन ने संयुक्त रूप से बिहार में अव्वल अंक हासिल किया।

पिता बेचते हैं टायर, बेटी बनी बिहार 10वीं टॉपर, 492 अंक से चमकी सबरीन

वैशाली की गलियों से निकली एक साधारण सी लड़की आज पूरे बिहार के लिए मिसाल बन गई है। सबरीन परवीन ने 492 अंक हासिल कर मैट्रिक परीक्षा 2026 में संयुक्त रूप से पहला स्थान पाया है। उनके पिता पश्चिम बंगाल में टायर की छोटी सी दुकान चलाते हैं, लेकिन बेटी के सपनों की उड़ान इतनी ऊंची रही कि उसने मेहनत और लगन से पूरे बिहार में कामयाबी हासिल की। सबरिन परवीन वैशाली जिले के छौराही की रहने वाली हैं। उनके घर की आर्थिक स्थिति बहुत मजबूत नहीं रही लेकिन पढ़ाई को लेकर सबरीन का जुनून कभी कम नहीं हुआ।

कई बार ऐसा होता है कि संसाधनों की कमी बच्चों के सपनों के रास्ते में रुकावट बन जाती है, लेकिन सबरीन ने इसे अपनी ताकत बना लिया। उन्होंने हर चुनौती को पार करते हुए यह साबित कर दिया कि मेहनत के सामने हालात भी झुक जाते हैं। सबरीन के पिता ने बताया कि बेटी की रिजल्ट आने के बाद वह पूरे परिवार काफी खुश है। रिजल्ट आने के पश्चात उनके घर पर आसपास के लोग आकर बधाई दे रहे हैं। उन्होंने बताया कि वह पश्चिम बंगाल के रामपुरहाट में टायर की दुकान चलाते हैं।

यहां देखें बिहार बोर्ड 10वीं परीक्षा का लाइव अपडेट्स

492 अंक के साथ टॉप पर कब्जा

सबरिन परवीन ने 500 में से 492 अंक हासिल किए, यानी 98.4 प्रतिशत। इसी स्कोर के साथ उन्होंने जमुई की पुष्पांजलि कुमारी के साथ संयुक्त रूप से पहला स्थान हासिल किया।

लड़कियों ने फिर मारी बाजी

इस साल का रिजल्ट एक बार फिर यह साबित करता है कि छात्राएं पढ़ाई में लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं। कुल 81.79 फीसदी छात्र पास हुए, जिनमें 6 लाख 1 हजार 390 लड़के और 6 लाख 34 हजार 353 छात्राएं शामिल हैं। साफ है कि इस बार भी लड़कियों ने आगे रहकर बाजी मारी है। पिछले कुछ सालों से यह ट्रेंड लगातार देखने को मिल रहा है, और सबरीन परवीन की सफलता इसी बदलाव की बड़ी मिसाल बनकर सामने आई है।

इतने छात्रों ने दी परीक्षा

बिहार बोर्ड की मैट्रिक परीक्षा 2026 में कुल 15 लाख 10 हजार 928 परीक्षार्थियों ने हिस्सा लिया। इतने बड़े स्तर पर परीक्षा आयोजित करना और फिर समय पर रिजल्ट जारी करना अपने आप में बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। कॉपियों का मूल्यांकन 2 मार्च से शुरू हुआ और 13 मार्च तक पूरा कर लिया गया। इसके बाद महज 16 दिनों में रिजल्ट जारी कर दिया गया, जिससे छात्रों को लंबा इंतजार नहीं करना पड़ा।

29 मार्च को ही आया रिजल्ट

दिलचस्प बात यह रही कि इस साल भी रिजल्ट 29 मार्च को ही जारी किया गया, जैसा पिछले साल हुआ था। इससे यह संकेत मिलता है कि बोर्ड अब अपने तय शेड्यूल पर काम कर रहा है और प्रक्रिया पहले से ज्यादा व्यवस्थित हो चुकी है। मैट्रिक परीक्षा 2026 का रिजल्ट शिक्षा मंत्री सुनील कुमार और बिहार बोर्ड के अध्यक्ष आनंद किशोर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए जारी किया। इस दौरान पास प्रतिशत, टॉपर्स और अन्य जरूरी आंकड़ों की जानकारी साझा की गई।

Himanshu Tiwari

लेखक के बारे में

Himanshu Tiwari

शॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।

परिचय एवं अनुभव
हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।

लेखन की सोच और मकसद
हिमांशु के लिए पत्रकारिता का मतलब सिर्फ सूचना देना नहीं है, बल्कि पाठक को सोचने की जगह देना भी है। खासकर करियर और शिक्षा के क्षेत्र में वह यह मानते हैं कि एक गलत या अधूरी खबर किसी छात्र की पूरी तैयारी को भटका सकती है। इसलिए उनके लेखन में सरल भाषा, ठोस तथ्य और व्यावहारिक नजरिया हमेशा प्राथमिकता में रहता है। उनकी कोशिश रहती है कि पाठक को सिर्फ खबर की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी समझ आए कि उस खबर का उसके जीवन और भविष्य से क्या रिश्ता है।

शिक्षा और अकादमिक पृष्ठभूमि
हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।

रुचियां और निजी झुकाव
काम से इतर हिमांशु की गहरी रुचि समकालीन इतिहास, समानांतर सिनेमा और दर्शन में रही है। राजनीति और विदेश नीति पर पढ़ना-लिखना उन्हें विशेष रूप से पसंद है। इसी रुचि के चलते उन्होंने दो लोकसभा चुनावों और दर्जनों विधानसभा चुनावों की कवरेज की, जहां राजनीति को उन्होंने बेहद नजदीक से देखा और समझा। चुनावी आंकड़ों की बारीकियां, नेताओं के भाषण, जमीनी मुद्दे और जनता की प्रतिक्रियाएं, इन सभी पहलुओं को समेटते हुए उन्होंने सैकड़ों खबरें और विश्लेषण तैयार किए, जो राजनीतिक प्रक्रिया की गहरी समझ को दर्शाते हैं।

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