BSEB Matric result 2026 : बिहार बोर्ड में पास होने के लिए कितने नंबर चाहिए? जानिए कैसे मिलते हैं ग्रेस मार्क्स
Bihar board Matric result 2026 : बिहार बोर्ड 10वीं का रिजल्ट जारी हो गया है। आइए जानते हैं बिहार बोर्ड 10वीं परीक्षा में पास होने के लिए पासिंग मार्क्स और ग्रेस मार्क्स के नियमों की पूरी जानकारी।

बिहार बोर्ड (BSEB) 10वीं यानी मैट्रिक की परीक्षा आज जारी कर दिया गया है। यहां देखें बिहार बोर्ड 10वीं का रिजल्ट। सबको बस अपने शानदार रिजल्ट का बेसब्री से इंतजार है। परीक्षा खत्म होने के बाद से ही हर छात्र के जेहन में सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि आखिर पास होने के लिए कम से कम कितने नंबर चाहिए? और अगर एकाध नंबर कम रह गए, तो क्या बोर्ड ग्रेस मार्क्स देगा? अगर आप भी इन्हीं सवालों को लेकर टेंशन में हैं, तो फिक्र बिल्कुल छोड़ दीजिए। आइए जानते हैं बिहार बोर्ड में पास होने का सटीक फॉर्मूला क्या है और बोर्ड किस तरह ग्रेस मार्क्स देकर छात्रों का कीमती साल बर्बाद होने से बचाता है।
पास होने के लिए कितने नंबर हैं जरूरी?
बिहार बोर्ड के नियमों के मुताबिक, मैट्रिक की परीक्षा में पास होने के लिए हर छात्र को कम से कम 30 प्रतिशत नंबर लाना लाजमी है। आइए इसे थोड़ा और आसान तरीके से समझते हैं…
सब्जेक्ट के हिसाब से मार्क्स: 10वीं में मुख्य रूप से 5 सब्जेक्ट होते हैं (गणित, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान, हिंदी और अंग्रेजी/संस्कृत/उर्दू)। हर पेपर 100 नंबर का होता है। आपको हर एक विषय में कम से कम 30 नंबर (यानी 30%) लाने ही होते हैं।
टोटल पासिंग मार्क्स: अगर कुल नंबरों की बात करें, तो 500 नंबर की परीक्षा में से आपके कुल मार्क्स कम से कम 150 होने चाहिए।
जरूरी बात: ध्यान रहे, सिर्फ कुल मिलाकर 150 नंबर ले आना काफी नहीं है। अगर आपके 200 नंबर भी आ गए हैं, लेकिन किसी एक सब्जेक्ट में 30 से कम नंबर (मान लीजिए 28 नंबर) रह गए, तो आपको उस विषय में फेल माना जाएगा। ऐसे में या तो आपको ग्रेस मार्क्स का सहारा मिलता है या फिर कंपार्टमेंट परीक्षा का विकल्प चुनना पड़ता है।
क्या होता है ग्रेस मार्क्स?
ग्रेस मार्क्स (Grace Marks) या कृपांक, बोर्ड की तरफ से मिलने वाली वो संजीवनी बूटी है जो किसी छात्र को बाल बाल फेल होने से बचा लेती है। कई बार ऐसा होता है कि कोई छात्र बाकी सभी विषयों में बहुत बेहतरीन नंबर लाता है, लेकिन किसी एक सब्जेक्ट में सिर्फ एक या दो नंबर से अटक जाता है। ऐसी स्थिति में बोर्ड अपनी तरफ से कुछ एक्स्ट्रा नंबर देकर उस छात्र को पास कर देता है। इन मुफ्त के नंबरों को ही ग्रेस मार्क्स कहा जाता है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि छात्र की मेहनत और पूरा एक साल दोनों बच जाते हैं।
ग्रेस मार्क्स मिलने के नियम क्या हैं?
बिहार बोर्ड की ग्रेस मार्क्स पॉलिसी काफी छात्र हितैषी (Student friendly) मानी जाती है। हालांकि, ये एक्स्ट्रा नंबर सबको नहीं मिलते। इसके लिए बोर्ड ने कुछ खास नियम बनाए हैं:
1. एक विषय में फेल होने पर: अगर कोई छात्र किसी एक विषय में अधिकतम 8 प्रतिशत (यानी 8 नंबर) तक की कमी से फेल हो रहा है, तो बोर्ड उसे ग्रेस मार्क्स देकर पास कर देता है।
2. दो विषयों में फेल होने पर: अगर कोई छात्र किन्हीं दो विषयों में फेल हो रहा है और दोनों में उसे 4 4 प्रतिशत (यानी 4 4 नंबर तक) की कमी पड़ रही है, तो उसे ग्रेस मार्क्स देकर अगली कक्षा में प्रमोट कर दिया जाता है।
3. एग्रीगेट मार्क्स अच्छे होने पर: अगर किसी छात्र ने कुल मिलाकर 75 प्रतिशत या उससे ज्यादा नंबर हासिल किए हैं, लेकिन किसी एक विषय में 10 प्रतिशत से भी कम नंबर की वजह से अटक रहा है, तो बोर्ड उसे स्पेशल केस मानकर पास घोषित कर देता है।
4. डिवीजन में ग्रेस: कई बार ऐसा भी होता है कि किसी छात्र को फर्स्ट डिवीजन (300 नंबर) लाने में महज 1 या 2 नंबर कम पड़ रहे होते हैं (जैसे किसी के 298 या 299 नंबर आएं)। ऐसे मामलों में भी बोर्ड अक्सर थोड़ा रहम दिखाते हुए ग्रेस मार्क्स देकर उसका डिवीजन सुधार देता है।
अगर ग्रेस मार्क्स के बाद भी पास न हों तो क्या करें?
अगर किसी छात्र के नंबर ग्रेस मार्क्स की तय लिमिट से भी ज्यादा कम हैं (मान लीजिए पास होने के लिए 10 या 15 नंबर कम हैं), तो वहां ग्रेस का नियम काम नहीं करता। लेकिन ऐसे छात्रों को भी निराश होने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। बिहार बोर्ड ऐसे बच्चों के लिए कंपार्टमेंट परीक्षा का आयोजन करता है। आप जिस भी एक या दो विषय में फेल हुए हैं, उसका पेपर कुछ ही महीनों बाद दोबारा देकर अपना साल आसानी से बचा सकते हैं।
आगे क्या करें?
रिजल्ट का दिन जैसे जैसे करीब आ रहा है, अफवाहों का बाजार भी गर्म होने लगा है। छात्रों और उनके अभिभावकों को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी फर्जी वेबसाइट या लिंक पर क्लिक न करें। अपने रिजल्ट से जुड़ी हर सही जानकारी के लिए सिर्फ बिहार बोर्ड की ऑफिशियल वेबसाइट biharboardonline.bihar.gov.in या results.biharboardonline.com पर ही नजर बनाए रखें। फिलहाल, अपनी की गई मेहनत पर भरोसा रखें। बोर्ड की चेकिंग प्रक्रिया और ग्रेस मार्क्स का सिस्टम ज्यादातर छात्रों के फेवर में ही काम करता है।
लेखक के बारे में
Himanshu Tiwariशॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।
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हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।
लेखन की सोच और मकसद
हिमांशु के लिए पत्रकारिता का मतलब सिर्फ सूचना देना नहीं है, बल्कि पाठक को सोचने की जगह देना भी है। खासकर करियर और शिक्षा के क्षेत्र में वह यह मानते हैं कि एक गलत या अधूरी खबर किसी छात्र की पूरी तैयारी को भटका सकती है। इसलिए उनके लेखन में सरल भाषा, ठोस तथ्य और व्यावहारिक नजरिया हमेशा प्राथमिकता में रहता है। उनकी कोशिश रहती है कि पाठक को सिर्फ खबर की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी समझ आए कि उस खबर का उसके जीवन और भविष्य से क्या रिश्ता है।
शिक्षा और अकादमिक पृष्ठभूमि
हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।
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काम से इतर हिमांशु की गहरी रुचि समकालीन इतिहास, समानांतर सिनेमा और दर्शन में रही है। राजनीति और विदेश नीति पर पढ़ना-लिखना उन्हें विशेष रूप से पसंद है। इसी रुचि के चलते उन्होंने दो लोकसभा चुनावों और दर्जनों विधानसभा चुनावों की कवरेज की, जहां राजनीति को उन्होंने बेहद नजदीक से देखा और समझा। चुनावी आंकड़ों की बारीकियां, नेताओं के भाषण, जमीनी मुद्दे और जनता की प्रतिक्रियाएं, इन सभी पहलुओं को समेटते हुए उन्होंने सैकड़ों खबरें और विश्लेषण तैयार किए, जो राजनीतिक प्रक्रिया की गहरी समझ को दर्शाते हैं।
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