उधार की किताबों से पढ़ाई, बिहार बोर्ड 10वीं में 5वीं रैंक; सब्जी बेचने वाले के बेटे विकास गुप्ता ने किया कमाल

Himanshu Tiwari हिन्दुस्तान, चैनपुर
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गांव के सब्जी विक्रेता के बेटे विकास कुमार गुप्ता ने मैट्रिक में 486 अंक लाकर राज्य में पांचवां स्थान हासिल किया। अब उसका सपना UPSC पास कर देश सेवा करना है।

उधार की किताबों से पढ़ाई, बिहार बोर्ड 10वीं में 5वीं रैंक; सब्जी बेचने वाले के बेटे विकास गुप्ता ने किया कमाल

कहते हैं हालात अगर कमजोर हों तो सपने भी छोटे हो जाते हैं लेकिन सूबे के कैमूर के औखरा गांव के विकास कुमार गुप्ता ने इस सोच को पूरी तरह गलत साबित कर दिया। एक ऐसे परिवार से आने वाले विकास जहां रोजमर्रा का खर्च भी मुश्किल से चलता है उसने मैट्रिक परीक्षा में 486 अंक लाकर पूरे राज्य में पांचवां और अपने जिले में पहला स्थान हासिल कर लिया। बिहार बोर्ड 10वीं परीक्षा का आज रिजल्ट जारी कर दिया गया, जिसमें विकास गुप्ता ने शानदार अंक हासिल कर अपने परिवार, अपने क्षेत्र और अपने स्कूल का नाम रोशन किया है।

ठेला लगाकर घर चलाते हैं पिता

विकास के पिता अनिल कुमार गुप्ता गांव की गलियों में ठेला लगाकर सब्जी बेचते हैं। इसी कमाई से घर का खर्च, बच्चों की पढ़ाई और बीमार पत्नी का इलाज चलता है। मुश्किल हालात के बावजूद उन्होंने कभी अपने बेटे की पढ़ाई में कमी नहीं आने दी। पिता का कहना है कि “बेटा जितना पढ़ना चाहे पढ़े, जरूरत पड़ी तो मैं सब कुछ गिरवी रख दूंगा।”

उधार की किताबों से की पढ़ाई

विकास हाटा स्थित श्री श्री 108 आत्मा स्वामी विवेकानंद महाराज परमहंस उच्च विद्यालय का छात्र है। वह रोज अपने गांव से करीब डेढ़ किलोमीटर पैदल चलकर स्कूल जाता था। घर की आर्थिक हालत ऐसी थी कि सभी किताबें खरीदना आसान नहीं था। ऐसे में उसने अपने सीनियर छात्रों से किताबें मांगकर पढ़ाई पूरी की। यही नहीं, वह रोज करीब 11 घंटे पढ़ाई करता था।

रिजल्ट देखा तो खुशी से झूम उठा पूरा परिवार

रविवार को जब मैट्रिक का रिजल्ट आने की खबर मिली तो विकास ने मोबाइल पर अपना रिजल्ट चेक किया। जैसे ही टॉपर लिस्ट में अपना नाम देखा, वह खुशी से झूम उठा। घर में यह खबर पहुंचते ही माहौल बदल गया। मां-बाप की आंखों में खुशी के आंसू थे और रिश्तेदारों के फोन लगातार आने लगे।

अब UPSC का सपना

विकास का सपना अब और बड़ा हो चुका है। वह 12वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद UPSC की तैयारी करना चाहता है। उसका कहना है कि वह इस परीक्षा को पास कर देश की सेवा करना चाहता है।

गुरुजनों और माता-पिता को दिया सफलता का श्रेय

विकास अपनी इस कामयाबी का श्रेय अपने माता-पिता और शिक्षकों को देता है। स्कूल के प्रधानाध्यापक रामस्नेही राम भी उसके प्रदर्शन से बेहद खुश हैं। मां रीना देवी बताती हैं कि उनका बेटा शुरू से ही पढ़ाई में तेज था और उसे कभी पढ़ने के लिए दबाव नहीं डालना पड़ा।

Himanshu Tiwari

लेखक के बारे में

Himanshu Tiwari

शॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।

परिचय एवं अनुभव
हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।

लेखन की सोच और मकसद
हिमांशु के लिए पत्रकारिता का मतलब सिर्फ सूचना देना नहीं है, बल्कि पाठक को सोचने की जगह देना भी है। खासकर करियर और शिक्षा के क्षेत्र में वह यह मानते हैं कि एक गलत या अधूरी खबर किसी छात्र की पूरी तैयारी को भटका सकती है। इसलिए उनके लेखन में सरल भाषा, ठोस तथ्य और व्यावहारिक नजरिया हमेशा प्राथमिकता में रहता है। उनकी कोशिश रहती है कि पाठक को सिर्फ खबर की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी समझ आए कि उस खबर का उसके जीवन और भविष्य से क्या रिश्ता है।

शिक्षा और अकादमिक पृष्ठभूमि
हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।

रुचियां और निजी झुकाव
काम से इतर हिमांशु की गहरी रुचि समकालीन इतिहास, समानांतर सिनेमा और दर्शन में रही है। राजनीति और विदेश नीति पर पढ़ना-लिखना उन्हें विशेष रूप से पसंद है। इसी रुचि के चलते उन्होंने दो लोकसभा चुनावों और दर्जनों विधानसभा चुनावों की कवरेज की, जहां राजनीति को उन्होंने बेहद नजदीक से देखा और समझा। चुनावी आंकड़ों की बारीकियां, नेताओं के भाषण, जमीनी मुद्दे और जनता की प्रतिक्रियाएं, इन सभी पहलुओं को समेटते हुए उन्होंने सैकड़ों खबरें और विश्लेषण तैयार किए, जो राजनीतिक प्रक्रिया की गहरी समझ को दर्शाते हैं।

विशेषज्ञताएं
- शिक्षा, करियर और नौकरियों से जुड़ी खबरों पर विशेष रुचि और निरंतर लेखन
- नीट, जेईई और राज्यवार बोर्ड परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों, बदलावों और परिणामों पर गहन फोकस
- UPSC, UPPSC, MPPSC, BPSC, RPSC और JPSC जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं की तैयारी, पैटर्न और नीतिगत पहलुओं पर पैनी नजर
- अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और विदेश नीति से जुड़े विषयों का विश्लेषणात्मक लेखन
- राजनीति, चुनावी आंकड़ों और जमीनी मुद्दों पर सरल और तथ्यपरक एक्सप्लेनर तैयार करने का अनुभव

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