Success Story: रवि कुमार बने बिहार बीएड परीक्षा के टॉपर, सेल्फ स्टडी के दम पर हासिल की पहली रैंक
कटिहार के रवि कुमार ने घर पर रहकर 8-10 घंटे की सेल्फ स्टडी और ट्यूशन पढ़ाने के अनुभव के दम पर बिहार बीएड प्रवेश परीक्षा में पहला स्थान हासिल कर टॉप किया है।

Bihar BEd Topper: बीएड प्रवेश परीक्षा का परिणाम जारी हुआ तो कटिहार के बसंत विहार बैगना के रहने वाले रवि कुमार के परिवार में ही नहीं, पूरे मोहल्ले में जश्न का माहौल दिखने लगा। रवि ने बीएड की प्रवेश परीक्षा में पहला स्थान हासिल किया है। रवि कुमार को यह सफलता उनके निरंतर प्रयास से मिली है। शुक्रवार को बीएड का रिजल्ट जारी होने के साथ ही रवि कुमार को बधाई देने वालों का तांता लगा रहा।
ट्यूशन पढ़ाने के अनुभव और सेल्फ स्टडी से मिली सफलता
दस वर्षों से स्कूली बच्चों को ट्यूशन पढ़ा रहे रवि कुमार ने कहा कि सफलता के लिए मेहनत और इंतजार दोनों करना पड़ता है। बीएड का परिणाम आने के बाद ट्यूशन पढ़ाकर निकले रवि कुमार ने बताया कि उन्होंने बीएड की परीक्षा के लिए घर पर रहकर ही सेल्फ स्टडी की। पठन-पाठन से लंबे समय से जुड़े होने की वजह से वे टॉपर की सूची में शामिल हो पाए है।
रवि कुमार का मानना है कि सफलता के लिए मेहनत के साथ-साथ धैर्य और इंतजार भी बहुत जरूरी है। उन्होंने परीक्षा के लिए किसी बाहरी कोचिंग का सहारा नहीं लिया, बल्कि घर पर रहकर ही हर दिन 8 से 10 घंटे की कड़ी सेल्फ स्टडी की।
महेश्वरी एकेडमी से लेकर टॉपर बनने तक का सफर
बसंत विहार बैगना कटिहार वार्ड नंबर 24 के रहने वाले रवि कुमार मानते हैं कि किसी भी परीक्षा के लिए सच्ची लगन होने पर सफलता कहीं पर भी रहकर पायी जा सकती है। वर्ष 2013 में महेश्वरी एकेडमी से मैट्रिक, सुर तुलसी कॉलेज से इंटर और केबी झा कॉलेज से अंग्रेजी में स्नातक करने के बाद रवि कुमार ने प्रतियोगी परीक्षा के लिए खुद को तैयार करना शुरू कर दिया। उन्होंने बताया कि हर दिन आठ से दस घंटे की सेल्फ स्टडी के साथ-साथ हर कक्षा के छात्रों को पढ़ाने से ज्ञान में लगातार वृद्धि हुई, जिसका फायदा रिजल्ट में दिख रहा है। उन्होंने कहा कि उनका सपना है कि वे एक बेहतर शिक्षक बनें। इसी कड़ी में वे लगातार प्रयासरत हैं।
एक ही घर में दो-दो टॉपर: माता-पिता का बढ़ा मान
रवि के पिता हरेराम गुप्ता किराना दुकान चलाते हैं जबकि मां संगीता गुप्ता गृहिणी हैं। इन्होंने अपने बच्चों को पढ़ाई के लिए प्रेरित किया। रवि कुमार की बहन नंदिनी कुमारी ने भी इसी वर्ष इंटर आर्ट्स में जिले में पहला स्थान पाकर टॉप किया। एक ही घर से दो-दो टॉपरों के निकलने से पूरे क्षेत्र के छात्र बेहद प्रेरित महसूस कर रहे हैं। रवि की यह कहानी साबित करती है कि अगर आपके भीतर सच्ची लगन है, तो आप कहीं पर भी रहकर सफलता का परचम लहरा सकते हैं।


