
BHU Phd : बीएचयू में पीएचडी की फीस तीन गुना बढ़ाई, कहां कितना शुल्क में इजाफा
बीएचयू में पीएचडी में एकेडमिक और डेवलपमेंट के साथ हर सेमेस्टर में चार हजार रुपये परीक्षा शुल्क लगेगा। फीस के अलावा कई तरह की पेनाल्टी के भी प्रावधान किए गए हैं। बढ़े शुल्क से छात्र तनाव में हैं।
बीएचयू में अब पीएचडी करने के लिए शोधार्थियों को लगभग तीन गुना फीस जमा करनी होगी। वार्षिक लगभग साढ़े चार हजार रुपये के स्थान पर सत्र 2024 से छात्रों को हर सेमेस्टर छह हजार रुपये का शुल्क जमा करना पड़ेगा। इस निर्णय से शोधछात्र तनाव में हैं। उन्होंने बीएचयू प्रशासन से इस निर्णय पर पुनर्विचार की मांग की है। बीएचयू के 14 संकायों में कला, सामाजिक विज्ञान, विज्ञान सहित अंतरविषयक शोध के लिए इस वर्ष 1789 सीटें निर्धारित हुई हैं।
इस बीच पांच जनवरी के आदेश में सत्र 2024-25 से सभी शोधछात्रों से छह हजार रुपये प्रति सेमेस्टर शुल्क लेने के आदेश जारी किए गए हैं। इस शुल्क के अंतर्गत एक हजार रुपये एकेडमिक फीस, एक हजार रुपये विकास शुल्क और चार हजार रुपये परीक्षा शुल्क भी जमा करना होगा। छात्रों का कहना है कि पीएचडी में कोर्सवर्क की परीक्षा मात्र एक बार पहले साल में होती है। ऐसे में हर सेमेस्टर परीक्षा शुल्क बेमतलब लिया जा रहा है।
नई योजना के मुताबिक अब छात्रों को री-रजिस्ट्रेशन कराने की स्थिति में 10 हजार रुपये का अतिरिक्त शुल्क भरना होगा। इसके साथ विकास और शिक्षण शुल्क भी दो-दो हजार रुपये हो जाएगा। फीस जमा करने में एक महीने की देरी पर 500 रुपये और छह महीने तक की देरी पर एक हजार रुपये का विलंब शुल्क भी भरना होगा। फीस जमा करने में छह महीने से ज्यादा देर होने पर रजिस्ट्रेशन निरस्त कर दिया जाएगा।
विश्वविद्यालय में दस हजार से ज्यादा शोध छात्र
बीएचयू में मौजूदा समय में 10 हजार से ज्यादा विद्यार्थी शोधकार्यों में लगे हुए हैं। शोध अनुभाग के आंकड़ों की मानें तो लगभग दो हजार शोध इस वर्ष पूरे हो जाने की उम्मीद है। नियमों के मुताबिक एक शोधार्थी को पीएचडी पूरी करने के लिए न्यूनतम तीन और अधिकतम सात साल का समय दिया जाता है। तीन वर्ष से ज्यादा का समय लगने पर छठे साल तक हर साल विभागाध्यक्ष से एक्सटेंशन लेना होता है। इसके बाद विशेष परिस्थितियों में कुलपति पीएचडी के लिए एक्सटेंशन पर अनुमति देते हैं। बीएचयू की तरफ से नॉन नेट शोधार्थी को चार साल तक और नेट-जेआरएफ शोधार्थियों को पांच साल तक ही शोधवृत्ति देने की व्यवस्था है। छात्रों ने शोधवृत्ति की राशि और समय बढ़ाने की मांग भी बीएचयू से की है।





