
BHU : अब ड्युअल डिग्री की तरफ बढ़ा बीएचयू, कॉलेजों में इसी साल से PhD, कई नए कोर्स भी
बीएचयू और इससे संबद्ध कॉलेज नए सत्र से कई नए कोर्स शुरू करेंगे। कॉलेजों में इसी वर्ष से पीएचडी शुरू करने के साथ ही बीएचयू ड्युअल डिग्री पर काम चल रहा है।
बीएचयू और इससे संबद्ध महाविद्यालय नए सत्र से कई नए कोर्स शुरू करेंगे। गुरुवार को देररात तक चली एकेडमिक काउंसिल की बैठक में कई प्रस्तावों पर मुहर लगी। महाविद्यालयों में इसी वर्ष से पीएचडी शुरू करने के साथ ही बीएचयू ड्युअल डिग्री पाठ्यक्रम शुरू करने पर भी काम कर रहा है। इसके अलावा कई नए कोर्सेज के लिए भी प्रस्ताव आमंत्रित किए गए हैं। गुरुवार को विज्ञान संस्थान के महामना सभागार में कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी की अध्यक्षता में यह बैठक लगभग साढ़े सात घंटे चली। बैठक में सदस्य सचिव कुलसचिव मौजूद रहे। इनके अलावा कुल 181 आंतरिक और बाह्य सदस्य भी बैठक में जुड़े। विद्वत परिषद की बैठक में नियमानुसार सभी संस्थान, संकाय, विभाग और केंद्रों के अध्यक्ष और प्रभारी शामिल होते हैं।

27 सितंबर को हुई पिछली बैठक में संस्कृत विद्या धर्मविज्ञान संकाय में एमए योग पाठ्यक्रम सहित कई स्पेशल पाठ्यक्रमों पर भी मुहर लग चुकी थी। इस बैठक में बीए-बीएड ड्युअल डिग्री के साथ ही फ्रेंच और विदेशी भाषाओं में मल्टीडिसिप्लिनरी पाठ्यक्रमों पर लंबी चर्चा हुई। भारत अध्ययन केंद्र के अंतर्गत नौ वैल्यू एडेड पाठ्यक्रमों की सीटें बढ़ाने पर भी बात हुई। एमएमवी, वसंत महिला महाविद्यालय और वसंत कन्या महाविद्यालय में एमए होम साइंस पाठ्यक्रमों के सिलेबस नए सिरे से बनाने पर भी विद्वत परिषद की मुहर लगी।
आईएमएस बीएचयू में ‘अत्रि चक्रवर्ती स्वर्ण पदक’ और ‘प्रो. एसएम दासगुप्ता स्मृति स्वर्ण पदक’ को नेशनल मेडिकल काउंसिल के मानकों के अनुरूप करने का फैसला लिया गया। कला संकाय के अंतर्गत पर्यटन एवं आतिथ्य प्रबंधन केंद्र के अंतर्गत स्नातक, पीएचडी और स्पेशल कोर्सेज चलाने पर भी विद्वत परिषद ने मुहर लगा दी। इसके अलावा विभिन्न पाठ्यक्रमों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुसार प्रवेश के मानक बदलने पर भी चर्चा की गई।
डीलिट् नहीं कर सकेंगे तीन आवेदक
बीएचयू की एकेडमिक काउंसिल लंबे समय से डीलिट् की स्वीकृति का इंतजार कर रहे तीन आवेदकों को स्वीकृति देने से इनकार कर दिया। कहा गया कि डीलिट् कार्यक्रम बंद हो चुका है, ऐसे में इसकी अनुमति नहीं दी जा सकती। कला संकाय के अंतर्गत डॉ. मुनकेश कुमार शुक्ला, डॉ. ज्ञानप्रकाश मिश्र और डॉ. अरविंद कुमार विश्वविद्यालय से अनुमति की प्रतीक्षा कर रहे थे। हालांकि इस निर्णय से आवेदक संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि उन्होंने डीलिट् के लिए आवेदन वर्ष-2022 में किया था। 2023 में संकाय के शोध समिति ने अनुमति भी दे दी, मगर उन्हें फीस जमा नहीं करने दिया गया। इसके बाद 2024 में डीलिट् पाठ्यक्रम पर रोक लगी। ऐसे में उनकी दावेदारी अस्वीकृति लायक नहीं थी।





