
BHU : बीएचयू की डिग्रियों में अब एक से एक सुरक्षा फीचर, डुप्लीकेट निकालते ही लिख जाएगा कॉपीड
बीएचयू के 105वें दीक्षांत समारोह में स्नातकों को मिलने वाली डिग्रियां कई तरह के सुरक्षा फीचर्स से लैस होंगी। विशेष तरह के कागज पर खास स्याही से प्रिंट कराई जा रही इन डिग्रियों के वर्षों तक खराब होने की आशंका नहीं रहेगी
बीएचयू के 105वें दीक्षांत समारोह में स्नातकों को मिलने वाली डिग्रियां कई तरह के सुरक्षा फीचर्स से लैस होंगी। विशेष तरह के कागज पर खास स्याही से प्रिंट कराई जा रही इन डिग्रियों के वर्षों तक खराब होने की आशंका नहीं रहेगी। इसके साथ ही जालसाजों के लिए भी यह चुनौती होगी। कारण कि किसी भी तरह इस डिग्री की फोटोकॉपी, स्कैन या फोटोग्राफी करने पर उसकी प्रति पर ‘कॉपीड’ अंकित हो जाएगा।

इस साल अपना 105वां दीक्षांत समारोह आयोजित कर रहे बीएचयू ने डिग्रियों के सुरक्षा फीचर्स पर काम करने के साथ ही इन्हें अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाया है। डिग्रियों में बदलाव पर पिछले साल से ही काम शुरू हो गया था और पिछले दीक्षांत समारोह में भी इन्हें कई बदलावों के साथ जारी किया गया था।
इस साल की डिग्रियों में क्यूआर कोड, बीएचयू का वाटर मार्क, होलोग्राम, कुलपति के हस्ताक्षर और खास प्रकार का खराब न होने वाला कागज शामिल होगा। डिग्रियों को इस तरह बनाया गया है कि इनके लैमिनेशन की भी कोई जरूरत नहीं होगी। पिछले वर्ष से बीएचयू ने डिग्रियों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप भी बना दिया है। 1919 से मिल रही डिग्रियों में डिग्रीधारक के नाम के आगे ‘श्री’ या ‘सुश्री’ लिखा जाता था। विदेशी संस्थानों में पढ़ने या नौकरी करने जाने पर इसे भी नाम का हिस्सा मान लिया जाता था। इस समस्या के दृष्टिगत अब नाम के आगे से श्री या सुश्री हटा दिया गया है। इसके अलावा पीएचडी की डिग्रियों में ‘एडमिटेड’ की जगह अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार ‘अवार्डेड’ भी लिखा जाने लगा है। डिग्रियों में बीएचयू के लोगो सहित हिन्दी और संस्कृत का प्रयोग यथावत रखा गया है।



