बिहार के 14 फीसदी छात्रों की बीएचयू बना पहली पसंद, जानें अन्य राज्यों का हाल
काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में प्रवेश के लिए उत्तर प्रदेश ही नहीं बल्कि देश के कोने-कोने के छात्र-छात्राएं उत्साहित रहते हैं। इस वर्ष स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में भरी गईं लगभग छह हजार सीटें 34 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के अभ्यर्थियों में बंटी हैं।

सर्वविद्या की राजधानी काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में प्रवेश के लिए उत्तर प्रदेश ही नहीं बल्कि देश के कोने-कोने के छात्र-छात्राएं उत्साहित रहते हैं। इस वर्ष स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में भरी गईं लगभग छह हजार सीटें 34 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के अभ्यर्थियों में बंटी हैं। प्रवेश लेने वालों में बिहार-झारखंड के अलावा पश्चिम बंगाल और ओडिसा के छात्रों की भी बड़ी संख्या है।
प्रवेश के आंकड़ों को टटोलने पर पता चला कि सबसे ज्यादा उत्तर प्रदेश के छात्रों ने ही बीएचयू की पीजी सीटों पर दावेदारी की है। लगभग 58 फीसदी सीटों पर उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों के छात्रों को प्रवेश मिला है। पीजी में 50 फीसदी से ज्यादा प्रवेश उन छात्रों को मिले हैं जो बीएचयू से ही स्नातक हुए हैं। पीजी प्रवेश में बिहार के विभिन्न जिलों के छात्रों की संख्या 14 फीसदी के करीब है। जबकि झारखंड के 4.5 फीसदी छात्रों ने बीएचयू को पढ़ाई के लिए चुना। इसी तरह ओडिसा और बंगाल से भी बीएचयू में प्रवेश लेने वालों का आंकड़ा चार-चार फीसदी के आसपास है। महाराष्ट्र और पंजाब से एक-एक और दक्षिण भारत के विभिन्न राज्यों (कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना) से लगभग तीन फीसदी छात्रों ने बीएचयू में प्रवेश लिया है।
संघशासित राज्यों की संख्या भी अच्छी
संघशासित राज्यों के छात्रों की संख्या भी अच्छी है। इनमें लद्दाख, पुडुचेरी और जम्मू-कश्मीर के छात्र शामिल हैं। पूर्वोत्तर के राज्यों असम, अरुणाचल और सिक्किम से भी बड़ी संख्या में छात्र बीएचयू पहुंचे हैं। विभिन्न विषयों में विशेषज्ञता के लिए देशभर के छात्रों ने बीएचयू का रुख किया है। प्रवेश समिति के चेयरमैन प्रो. भास्कर भट्टाचार्य ने कहा कि इन आंकड़ों से यह भी स्पष्ट है कि बनारस के अलावा उत्तर प्रदेश और बिहार के छात्रों को भी बीएचयू में प्रवेश के पूरे मौके उपलब्ध हैं। साथ ही इससे बीएचयू की ‘लघु भारत’ की छवि पर भी मुहर लगती है।


