BEd या DElEd कोर्स में क्या फर्क हैं? सरकारी टीचर बनने के लिए कौन सा कोर्स है बेस्ट, किसकी कितनी वैल्यू?
BEd vs DElEd: टीचर बनने या टीचिंग लाइन में अपना करियर बनाने के लिए अभ्यर्थियों को बीएड या डीएलएड में से कौन-सा कोर्स करना चाहिए? आइए जानते हैं कि 12वीं के बाद आपके लिए कौन सा कोर्स रहेगा बेहतर?

BEd and DElEd Difference: अगर आपका सपना एक सरकारी या प्राइवेट स्कूल में शिक्षक बनकर देश के भविष्य को संवारने का है, तो यह खबर खास आपके लिए है। अक्सर छात्रों के मन में यह उलझन रहती है कि वे 12वीं या ग्रेजुएशन पूरी करने के बाद बीएड करें या फिर डीएलएड। सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद अब शिक्षक बनने के नियम पूरी तरह बदल चुके हैं। अगर आप भी टीचिंग के क्षेत्र में कदम रखना चाहते हैं, तो इन दोनों कोर्सेज के बीच का अंतर और अपनी सही राह चुनना आपके लिए बेहद जरूरी है।
क्या होता है B.Ed और D.El.Ed कोर्स?
डीएलएड (D.El.Ed): इसे 'डिप्लोमा इन एलिमेंट्री एजुकेशन' कहा जाता है। कई राज्यों में इसे बीटीसी या जेबीटी के नाम से भी जाना जाता है। यह 2 साल का एक डिप्लोमा कोर्स है, जिसे छात्र कक्षा 12वीं पास करने के बाद (न्यूनतम 50% अंकों के साथ) सीधे कर सकते हैं।
बीएड (B.Ed): इसे 'बैचलर ऑफ एजुकेशन' कहा जाता है। यह एक प्रोफेशनल डिग्री कोर्स है। इसे करने के लिए उम्मीदवार का किसी भी विषय में ग्रेजुएट (स्नातक) होना अनिवार्य है। ग्रेजुएशन में कम से कम 50% अंक होने पर ही इसमें एडमिशन मिलता है।
बीएड और डीएलएड में क्या है अंतर?
शिक्षक बनने के लिए बीएड (B.Ed) और डीएलएड (D.El.Ed) दोनों के नियम और कार्यक्षेत्र पूरी तरह अलग हैं; जहां बीएड एक डिग्री कोर्स है जिसे छात्र केवल ग्रेजुएशन के बाद ही कर सकते हैं, वहीं दूसरी तरफ डीएलएड 2 साल का एक डिप्लोमा कोर्स है, जिसे राजस्थान और बिहार जैसे ज्यादातर राज्यों में 12वीं में 50% अंक होने पर, जबकि उत्तर प्रदेश (UP) में ग्रेजुएशन के बाद किया जा सकता है। दोनों कोर्सेज में सबसे बड़ा अंतर नौकरियों के स्तर का है— सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के अनुसार, अब केवल डीएलएड डिप्लोमा धारक ही देश में कक्षा 1 से 5 तक के प्राइमरी टीचर बनने के पात्र हैं, जबकि बीएड डिग्री धारक उम्मीदवार केवल कक्षा 5 से ऊपर अपर प्राइमरी से लेकर सेकेंडरी स्तर तक की कक्षाओं में अध्यापन कार्य के लिए ही आवेदन कर सकते हैं।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बदला नौकरियों का स्कोप
पहले बीएड करने वाले छात्र भी प्राथमिक स्कूलों में शिक्षक बन सकते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के नए आदेश के अनुसार दोनों का कार्यक्षेत्र पूरी तरह अलग कर दिया गया है:
प्राइमरी स्कूल (कक्षा 1 से 5वीं): यदि आप छोटे बच्चों को पढ़ाना चाहते हैं, तो आपके पास डीएलएड का होना अनिवार्य है। सुप्रीम कोर्ट ने बीएड डिग्री धारकों को प्राइमरी शिक्षक भर्ती की रेस से पूरी तरह बाहर कर दिया है।
अपर प्राइमरी और हाईस्कूल (कक्षा 6वीं से 10वीं): यदि आप जूनियर हाईस्कूल, टीजीटी (TGT) या केंद्रीय विद्यालयों में सीनियर छात्रों को पढ़ाना चाहते हैं, तो आपके पास बीएड की डिग्री होना जरूरी है। बीएड के बाद आप पीजीटी (PGT) करके 12वीं तक के शिक्षक भी बन सकते हैं।
आपके लिए कौन सा कोर्स रहेगा बेहतर?
अगर आपका मुख्य लक्ष्य सिर्फ और सिर्फ सरकारी नौकरी जल्दी पाना है और आप छोटे बच्चों को आसानी से संभाल सकते हैं, तो डीएलएड आपके लिए एक शानदार विकल्प है क्योंकि इसमें प्रतिस्पर्धा बीएड की तुलना में थोड़ी कम होती है। दूसरी तरफ, अगर आप उच्च शिक्षा, बड़े स्कूलों या शिक्षा विभाग में ऊंचे पदों (जैसे ब्लॉक एजुकेशन ऑफिसर) पर जाना चाहते हैं, तो ज्यादा स्कोप के लिए आपको बीएड का रास्ता चुनना चाहिए। ध्यान रहे कि कोर्स पूरा करने के बाद आपको सीटेट (CTET) या राज्य स्तरीय टीईटी (TET) परीक्षा भी पास करनी होगी।
लेखक के बारे में
Prachiशॉर्ट बायो: प्राची लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में कंटेंट प्रोड्यूसर हैं। पिछले 2 वर्षों से वे करियर, शिक्षा और सरकारी नौकरियों से जुड़े विषयों पर लिख रही हैं। मुश्किल खबरों को आसान भाषा में पाठकों तक पहुंचाना उनकी विशेषता है। वे 2024 से लाइव हिन्दुस्तान की करियर टीम का हिस्सा हैं।
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