केले के पत्ते से निकला कमाल का आइडिया, 9वीं की छात्रा ने बनाया नवजातों को वायरस से बचाने वाला खास 'इन्क्यूबेटर'

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वेदिका के इस अनोखे आइडिया को पहले वॉशिंगटन स्टेट साइंस एंड इंजीनियरिंग फेयर में पहचान मिली, जहां उन्होंने पहला स्थान हासिल किया।

banana leaf inspired idea 9th grade student creates incubator liner to protect newborns from infections
कौन हैं वेदिका देवराजन (Pics- isef.net)

कक्षा 9 के ज्यादातर छात्र अपनी पढ़ाई में लगे रहते हैं। लेकिन इसी कक्षा की छात्रा वेदिका देवराजन ने कमाल का काम किया है। अक्सर बड़े वैज्ञानिक आइडिया किसी महंगी लैब या जटिल मशीन से नहीं, बल्कि हमारे आसपास की किसी साधारण चीज से निकलते हैं। अमेरिका के वॉशिंगटन की 9वीं कक्षा की छात्रा वेदिका देवराजन की कहानी इसका बेहतरीन उदाहरण है। वेदिका ने केले के पत्ते की बनावट से प्रेरणा लेकर ऐसा इन्क्यूबेटर लाइनर तैयार करने का प्रोजेक्ट बनाया है, जो समय से पहले जन्मे और कमजोर नवजात बच्चों को अस्पताल में होने वाले संक्रमण के खतरे से बचाने में मदद कर सकता है। उनके इस प्रोजेक्ट का नाम BananaBaby है।

वेदिका के इस अनोखे आइडिया को पहले वॉशिंगटन स्टेट साइंस एंड इंजीनियरिंग फेयर में पहचान मिली, जहां उन्होंने पहला स्थान हासिल किया। इसके बाद उन्हें दुनिया की प्रतिष्ठित स्कूली विज्ञान प्रतियोगिता 2026 रेजेनरॉन इंटरनेशनल साइंस एंड इंजीनियरिंग फेयर(ISEF) में हिस्सा लेने का मौका मिला। यहां उन्हें Materials Science श्रेणी में तीसरा पुरस्कार और 1,200 डॉलर की पुरस्कार राशि मिली।

क्यों निकाला समस्या का हल?

बता दें कि अगर समय से पहले बच्चे का जन्म होता है या फिर पैदा होने के बाद बच्चे कमजोर होते हैं, तो उन्हें अक्सर इन्क्यूबेटर में रखा जाता है। यह एक ऐसा मशीन है, जो एक नियंत्रित वातावरण देता है, जिसमें बच्चे के लिए तापमान और दूसरी जरूरी परिस्थितियों को बनाए रखा जाता है। लेकिन इन्क्यूबेटर के अंदर नमी और तापमान में बदलाव के कारण उसकी सतहों पर पानी की बूंदें यानी कंडेन्सेशन जमा हो सकती हैं। यह नमी सूक्ष्मजीवों के लिए अनुकूल परिस्थितियां पैदा कर सकती है और वायरस का खतरा बढ़ा सकती है। नवजात बच्चों के लिए यह चिंता और गंभीर होती है, क्योंकि उनका इम्यून सिस्टम अभी पूरी तरह विकसित नहीं हुआ होता।

वेदिका ने पूरी इन्क्यूबेटर मशीन को बदलने के बजाय उसके अंदर इस्तेमाल होने वाले लाइनर यानी अंदर की परत को बेहतर बनाने का विचार किया। उनका उद्देश्य ऐसी सतह तैयार करना था, जो बनने वाली नमी को एक जगह जमा होने देने के बजाय उसे नियंत्रित दिशा में आगे बढ़ाने में मदद करे।

कैसे आया आइडिया

वेदिका ने इस समस्या का समाधान खोजने के लिए प्रकृति की ओर देखा। उन्होंने केले के पत्ते की सतह पर मौजूद नसों यानी लाइन्स के पैटर्न पर ध्यान दिया। केले के पत्ते की नसें एक खास दिशा में समानांतर तरीके से फैली होती हैं और पानी की गति को प्रभावित करती हैं। वेदिका ने सोचा कि अगर इसी तरह की संरचना कृत्रिम रूप से बनाई जाए, तो क्या इसका इस्तेमाल इन्क्यूबेटर के अंदर बनने वाली नमी को नियंत्रित करने के लिए किया जा सकता है?इसी सोच से BananaBaby का आइडिया सामने आया। यह प्रकृति से प्रेरणा लेकर तकनीकी समाधान खोजने की प्रक्रिया बायोमिमिक्री का उदाहरण है।

कैसे काम करता है बनानाबेबी?

वेदिका ने Musa प्रजाति के केले के पत्ते की नसों के पैटर्न से प्रेरित एक खास मोल्ड तैयार किया। ISEF की जानकारी के अनुसार, इसके लिए PDMS (Polydimethylsiloxane) मोल्ड का इस्तेमाल किया गया। इससे तैयार लाइनर की सतह सपाट नहीं है, बल्कि उसमें केले के पत्ते जैसी दिशात्मक संरचना है। सामान्य सपाट सतह पर पानी की बूंदें एक जगह जमा रह सकती हैं। इसके विपरीत BananaBaby की संरचना का उद्देश्य कंडेन्सेशन को एक निश्चित दिशा में आगे बढ़ने में मदद करना है। यानी इसका मकसद सिर्फ इन्क्यूबेटर के अंदर की सतह को बदलना नहीं, बल्कि नमी को बेहतर तरीके से नियंत्रित करना और वायरस के लिए अनुकूल परिस्थितियों को कम करने की संभावना तलाशना है।

इंटरनेशनल मंच तक कैसे पहुंची वेदिका

BananaBaby को सबसे पहले वाशिंगपोस्ट स्टेट साइंस एंड इंजीनियरिंग फेयर में पहला स्थान मिला। इसके बाद वेदिका ने 2026 Regeneron ISEF में हिस्सा लिया। लेक वाशिंगटन स्कूल डिस्ट्रिक्ट के अनुसार, इस प्रतियोगिता में 65 से अधिक देशों के 1700 से ज्यादा हाई-स्कूल शोधकर्ताओं ने भाग लिया। वेदिका को मटेरियल्स साइंस श्रेणी में तीसरा पुरस्कार और 1,200 डॉलर मिले। उन्हें नॉन-ट्रिवअल फेलोशिप स्कॉरशिप के जरिए भी सम्मानित किया गया वेदिका की कहानी बताती है कि विज्ञान हमेशा बड़ी मशीनों और जटिल प्रयोगों से शुरू नहीं होता। कभी-कभी एक केले के पत्ते को ध्यान से देखने से भी ऐसा सवाल पैदा हो सकता है, जो आगे चलकर स्वास्थ्य और तकनीक की दुनिया में नई संभावनाओं का रास्ता खोल दे।

Dheeraj Pal

लेखक के बारे में

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संक्षिप्त विवरण: धीरज पाल को पत्रकारिता के क्षेत्र में 7 साल का अनुभव है। लाइव हिन्दुस्तान में काम करते हुए इन्हें 4 साल हो गए हैं। धीरज एजुकेशन रिपोर्टर के तौर पर काम कर चुके हैं। अपने करियर के दौरान धीरज ने राजनीति समाचार, एजुकेशन बीट के लिए ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की है।

शैक्षणिक पृष्ठभूमि
धीरज ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए इन मीडिया स्टडीज और राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज से जनसंचार एवं पत्रकारिता से परास्नातक की पढ़ाई की। धीरज पाल ने अपने पत्रकारिता कर की शुरुआत एपीएन न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने लोकमत न्यूज हिंदी और एनडीटीवी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। हिंदुस्तान लाइव में यूपी बोर्ड से लेकर उन्होंने लोकसभा चुनाव कवर करने साथ-साथ खेल जैसे बीट पर काम किया। अब इनका एकमात्र उद्देश्य करियर और एजुकेशन से जुड़ी रुचिगत, सरल, प्रमाणिक और पाठक-हितैषी रूप में प्रस्तुत करना है।

व्यक्तिगत रुचियां
उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के निवासी धीरज पाल को पत्रकारिता और ज्योतिषीय अध्ययन के साथ-साथ घूमने, किताबें पढ़ने और क्रिकेट खेलने का शौक है।

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