UPSC 2025 में बलिया का डंका, मोनिका को 16वीं रैंक, दरोगा की बेटी समेत 5 को सिविल सेवा परीक्षा में सफलता

Mar 07, 2026 06:59 am ISTHimanshu Tiwari हिन्दुस्तान, बलिया
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ballia upsc results 2025: यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2025 के रिजल्ट आ गए हैं, और बलिया के होनहार बच्चों ने चमक बिखेरी है। मोनिका श्रीवास्तव ने AIR 16 हासिल की, जबकि रवि, अनिंद्य, शिक्षा और आदित्य ने भी यह प्रतिष्ठित परीक्षा शानदार ढंग से पास की।

UPSC 2025 में बलिया का डंका, मोनिका को 16वीं रैंक, दरोगा की बेटी समेत 5 को सिविल सेवा परीक्षा में सफलता

ballia upsc results 2025: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने सिविल सेवा मुख्य परीक्षा-2025 के अंतिम नतीजे शुक्रवार को घोषित कर दिए हैं, और इन नतीजों ने बागी बलिया यानी भृगु की नगरी में जश्न का माहौल बना दिया है। आमतौर पर अपनी क्रांतिकारी मिट्टी के लिए पहचाने जाने वाले बलिया जिले ने इस बार साबित कर दिया है कि यहां के युवाओं में प्रशासनिक कौशल और मेधा की भी कोई कमी नहीं है। जिले के पांच होनहारों ने देश की सबसे कठिन और प्रतिष्ठित परीक्षा में कामयाबी का परचम लहराया है। किसी ने अपनी मां का अधूरा सपना पूरा किया है, तो किसी ने अपनी पुरानी रैंक में सुधार कर बड़ा मुकाम हासिल किया है। आइए, बलिया के इन होनहार अफसरों की प्रेरणादायक कहानियों को करीब से जानते हैं।

मोनिका श्रीवास्तव: 16वीं रैंक के साथ बजाया कामयाबी का डंका

खड़सरा की रहने वाली मोनिका श्रीवास्तव ने पूरे देश में 16वीं रैंक (All India Rank 16) हासिल कर जिले का सीना फख्र से चौड़ा कर दिया है। यह सफलता उन्हें रातों-रात नहीं मिली, बल्कि इसके पीछे उनके पांच प्रयासों की कड़ी तपस्या है। पढ़ाई में शुरू से ही अव्वल रहने वाली मोनिका ने साल 2016 में आईआईटी गुवाहाटी (IIT Guwahati) से कंप्यूटर साइंस में बीटेक किया था। इसके बाद उन्होंने कुछ कंपनियों में नौकरी भी की, लेकिन उनका लक्ष्य कुछ और ही था।

मोनिका का सफर कामयाबियों से भरा रहा है। साल 2021 में उन्होंने बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की परीक्षा में महिला वर्ग में पहला और ओवरऑल छठी रैंक हासिल की थी। इसके बाद 2023 के यूपीएससी रिजल्ट में उन्हें 455वीं रैंक मिली और उनका चयन आईआरटीएस (IRTS - रेलवे सर्विस) में हुआ। लेकिन उनका सफर यहीं नहीं रुका। अब 16वीं रैंक के साथ उन्होंने साबित कर दिया है कि अगर जिद हो, तो कोई भी मुकाम हासिल किया जा सकता है। मोनिका के पिता ब्रजेश कुमार श्रीवास्तव बिहार में जिला परिषद में अवर अभियंता हैं, और मां भारती शिक्षिका के पद से रिटायर हो चुकी हैं। खड़सरा स्थित उनके आवास पर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है।

रवि शेखर सिंह: परिखरा में रहकर की तैयारी, मिली 176वीं रैंक

जिले के सोहांव ब्लॉक के दौलतपुर निवासी रवि शेखर सिंह ने 176वीं रैंक हासिल की है। दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रतिष्ठित हंसराज कॉलेज से जियोलॉजी (भूगर्भ विज्ञान) में ऑनर्स करने वाले रवि शेखर ने दिल्ली में महज एक साल कोचिंग की। इसके बाद उन्होंने बलिया शहर से सटे परिखरा में रहकर 'सेल्फ स्टडी' का रास्ता चुना। उनका वैकल्पिक विषय भूगोल था।

जब यूपीएससी का परिणाम आया, तो रवि शेखर बलिया में ही थे। कामयाबी की खबर मिलते ही उन्होंने सबसे पहले अपने परिजनों के साथ बाबा बालेश्वर नाथ मंदिर और शहर के अन्य मंदिरों में जाकर मत्था टेका। लोगों ने फूल-मालाओं और अबीर-गुलाल के साथ अपने इस लाल का जोरदार स्वागत किया। उनके पिता दिलीप सिंह डाक विभाग में सहायक पोस्टमास्टर के पद से रिटायर हैं।

अनिंद्य पाण्डेय: पिछली बार से लगाई बड़ी छलांग

रेवती क्षेत्र के रामपुर निवासी कमलेश पाण्डेय के बेटे अनिंद्य पाण्डेय ने इस बार 158वीं रैंक हासिल की है। अनिंद्य के लिए भी यह सफर निरंतर सुधार का रहा है। उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा-2024 में भी सफलता हासिल की थी, तब उन्हें 271वीं रैंक मिली थी। इस बार उन्होंने सौ से ज्यादा पायदान की शानदार छलांग लगाकर अपनी काबिलियत का लोहा मनवाया है।

शिक्षा पाठक: दरोगा की बेटी ने किया कमाल

हल्दी क्षेत्र के पियरौंटा की रहने वाली शिक्षा पाठक ने 453वीं रैंक के साथ सफलता का परचम लहराया है। शिक्षा के पिता अरुण पाठक यूपी पुलिस में सब-इंस्पेक्टर (SI) के पद से रिटायर हुए हैं, और उनकी मां शीला पाठक एक गृहिणी हैं। शिक्षा ने बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से अपनी ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की और उसके बाद पूरी लगन से यूपीएससी की तैयारी में जुट गईं। एक पुलिस अधिकारी के घर का अनुशासन उनकी इस शानदार कामयाबी में साफ झलकता है।

आदित्य कृष्ण तिवारी: छोड़ी नौकरी और पूरा किया मां का सपना

चितबड़ागांव कस्बे के आजाद नगर मुहल्ले के रहने वाले आदित्य कृष्ण तिवारी की कहानी बेहद भावुक और प्रेरणादायक है। आदित्य ने दूसरे प्रयास में 540वीं रैंक हासिल की है। उनकी शुरुआती पढ़ाई बक्सर (बिहार) से हुई। उनकी मां कंचन तिवारी बिहार में ही सीनियर डिप्टी कलेक्टर के पद पर तैनात थीं, लेकिन साल 2012 में हार्ट अटैक से उनका निधन हो गया।

आदित्य ने दिल्ली टेक्निकल यूनिवर्सिटी (DTU) से बीटेक किया और दो साल तक नौकरी भी की। लेकिन अपनी अफसर मां के सपनों को पूरा करने की जिद ने उन्हें नौकरी छोड़ने पर मजबूर कर दिया। उन्होंने इस्तीफा दिया और पूरी ताकत से सिविल सेवा की तैयारी में लग गए। आज उनकी कामयाबी निश्चित तौर पर उनकी स्वर्गीय मां को एक सच्ची श्रद्धांजलि है।

Himanshu Tiwari

लेखक के बारे में

Himanshu Tiwari

शॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।

परिचय एवं अनुभव
हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।

लेखन की सोच और मकसद
हिमांशु के लिए पत्रकारिता का मतलब सिर्फ सूचना देना नहीं है, बल्कि पाठक को सोचने की जगह देना भी है। खासकर करियर और शिक्षा के क्षेत्र में वह यह मानते हैं कि एक गलत या अधूरी खबर किसी छात्र की पूरी तैयारी को भटका सकती है। इसलिए उनके लेखन में सरल भाषा, ठोस तथ्य और व्यावहारिक नजरिया हमेशा प्राथमिकता में रहता है। उनकी कोशिश रहती है कि पाठक को सिर्फ खबर की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी समझ आए कि उस खबर का उसके जीवन और भविष्य से क्या रिश्ता है।

शिक्षा और अकादमिक पृष्ठभूमि
हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।

रुचियां और निजी झुकाव
काम से इतर हिमांशु की गहरी रुचि समकालीन इतिहास, समानांतर सिनेमा और दर्शन में रही है। राजनीति और विदेश नीति पर पढ़ना-लिखना उन्हें विशेष रूप से पसंद है। इसी रुचि के चलते उन्होंने दो लोकसभा चुनावों और दर्जनों विधानसभा चुनावों की कवरेज की, जहां राजनीति को उन्होंने बेहद नजदीक से देखा और समझा। चुनावी आंकड़ों की बारीकियां, नेताओं के भाषण, जमीनी मुद्दे और जनता की प्रतिक्रियाएं, इन सभी पहलुओं को समेटते हुए उन्होंने सैकड़ों खबरें और विश्लेषण तैयार किए, जो राजनीतिक प्रक्रिया की गहरी समझ को दर्शाते हैं।

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