ऑस्ट्रेलिया में पढ़ाई का सपना देखने वालों को झटका, नियमों में हुआ बड़ा बदलाव; वीजा मिलना नहीं रहा आसान
ऑस्ट्रेलिया ने भारतीय छात्रों के लिए वीजा नियमों को कड़ा करते हुए एविडेंस लेवल 3 लागू कर दिया है, जिससे अब कागजी कार्रवाई और जांच ज्यादा सख्त होगी।

विदेश जाकर पढ़ाई करने का ख्वाब देखने वाले भारतीय नौजवानों के लिए एक मायूस करने वाली खबर सामने आई है। अगर आप भी कंगारूओं के देश यानी ऑस्ट्रेलिया जाकर अपने सुनहरे भविष्य का ताना-बाना बुन रहे हैं, तो जरा ठहरिए और अपनी तैयारियों को फिर से परख लीजिए। ऑस्ट्रेलिया सरकार ने भारतीय छात्रों के लिए स्टूडेंट वीजा के नियमों का पेंच एक बार फिर से कस दिया है। हालात ये हैं कि अब वहां का वीजा हासिल करना लोहे के चने चबाने जैसा हो सकता है।
राज्यसभा में गुरुवार 2 अप्रैल 2026 को केंद्र सरकार ने इस बात की आधिकारिक तस्दीक कर दी है कि ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने 'सिंपलीफाइड स्टूडेंट वीजा फ्रेमवर्क' (SSVF) के तहत भारतीय वीजा आवेदकों के लिए 'एविडेंस रिक्वायरमेंट' (सबूतों और दस्तावेजों की जरूरत) को लेवल 2 (EL2) से बढ़ाकर लेवल 3 (EL3) कर दिया है। आसान और सीधी जुबान में समझें तो 8 जनवरी 2026 से वो पुराने और बेहद सख्त नियम फिर से लागू कर दिए गए हैं जो सितंबर 2025 से पहले चला करते थे।
सख्त हो जाएंगे नियम
विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने संसद में एक सवाल के लिखित जवाब में साफ किया कि हां, यह बदलाव हकीकत है। उनसे पूछा गया था कि क्या ऑस्ट्रेलिया ने भारत को फिर से हाई-रिस्क वाली कैटेगरी में डाल दिया है? इस बड़े बदलाव का सीधा सा मतलब है कि अब आपकी फाइल की बाल की खाल निकाली जाएगी। कागजी कार्रवाई पहले से कहीं ज्यादा होगी, पड़ताल एकदम सख्त होगी और जरा सी भी ऊंच-नीच या शक होने पर वीजा सीधा रिजेक्ट हो सकता है।
ऑस्ट्रेलियाई सरकार क्यों लाना चाह रही है ये नियम
ऑस्ट्रेलियाई गृह विभाग का दावा है कि उनका यह फैसला असल और ईमानदार छात्रों के लिए प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने और इमिग्रेशन सिस्टम में हो रही धांधली को रोकने के लिए है। लेकिन एजुकेशन एक्सपर्ट्स और जानकारों की मानें तो लेवल 3 में धकेले जाने का मतलब है कि अब छात्रों को अपनी माली हालत, बैंक बैलेंस, पढ़ाई के पुराने रिकॉर्ड और पढ़ाई पूरी होने के बाद वापस भारत लौटने के अपने इरादे के एकदम पुख्ता सबूत देने होंगे। वीजा प्रोसेसिंग में अब पहले के मुकाबले काफी ज्यादा वक्त लगेगा और कागजात तैयार करने का भारी-भरकम खर्च भी सीधे छात्रों की जेब पर ही पड़ेगा। अब स्टेटमेंट ऑफ पर्पस (SOP) बेहद सोच-समझकर लिखना होगा क्योंकि एक छोटी सी गलती भारी पड़ सकती है।
सिर्फ ऑस्ट्रेलिया ने ही नहीं किए नियम सख्त
वैसे अगर दुनियाभर के हालात पर नजर डालें, तो सिर्फ ऑस्ट्रेलिया ही नहीं, कई और बड़े पश्चिमी देश इन दिनों विदेशी छात्रों के मामले में आंखें तरेर रहे हैं। अमेरिका का ही हाल देख लीजिए। हालिया आंकड़ों के मुताबिक, वहां जाने वाले भारतीय छात्रों की तादाद में सीधे 6.9 फीसदी की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। अमेरिका ने भी बैकग्राउंड चेक और वीजा कंप्लायंस नियमों में इतनी सख्ती कर दी है कि F-1 वीजा का अप्रूवल रेट धड़ाम से नीचे गिर गया है। अमेरिका के दरवाजे तंग होने के बाद छात्रों ने भारी तादाद में कनाडा का रुख करना शुरू किया था लेकिन हाउसिंग संकट और वहां की बदलती नीतियों की वजह से अब वहां भी हालात बहुत मुफीद नहीं रहे।
भारत सरकार भी मानती है स्थिति की गंभीरता
हालांकि, इन सबके बीच घबराने की पूरी तरह से जरूरत नहीं है। अगर आपकी नीयत एकदम साफ है, आपके पास पढ़ाई का बेहतरीन और सच्चा रिकॉर्ड है और आपके बैंक खाते में वहां रहकर पढ़ाई करने लायक पर्याप्त रकम मौजूद है तो आपका वीजा जरूर लगेगा। बस अब आपको पहले से ज्यादा चौकन्ना रहना होगा। भारत सरकार भी इस पूरे मामले पर हाथ पर हाथ धरे नहीं बैठी है। विदेश मंत्रालय का कहना है कि भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच शिक्षा के क्षेत्र में रिश्ते काफी मजबूत हैं और यह साझेदारी दोनों देशों के फायदे के लिए है। आज के वक्त में कई बड़ी ऑस्ट्रेलियाई यूनिवर्सिटीज खुद भारत में अपने कैंपस खोल रही हैं। सरकार ने भरोसा दिलाया है कि वह लगातार ऑस्ट्रेलियाई अधिकारियों के साथ बातचीत कर रही है ताकि उच्च शिक्षा और रिसर्च के लिए ऑस्ट्रेलिया जाने वाले होनहार भारतीय छात्रों को किसी भी तरह की गैर-जरूरी परेशानी का सामना न करना पड़े।
लेखक के बारे में
Himanshu Tiwariशॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।
परिचय एवं अनुभव
हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।
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हिमांशु के लिए पत्रकारिता का मतलब सिर्फ सूचना देना नहीं है, बल्कि पाठक को सोचने की जगह देना भी है। खासकर करियर और शिक्षा के क्षेत्र में वह यह मानते हैं कि एक गलत या अधूरी खबर किसी छात्र की पूरी तैयारी को भटका सकती है। इसलिए उनके लेखन में सरल भाषा, ठोस तथ्य और व्यावहारिक नजरिया हमेशा प्राथमिकता में रहता है। उनकी कोशिश रहती है कि पाठक को सिर्फ खबर की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी समझ आए कि उस खबर का उसके जीवन और भविष्य से क्या रिश्ता है।
शिक्षा और अकादमिक पृष्ठभूमि
हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।
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काम से इतर हिमांशु की गहरी रुचि समकालीन इतिहास, समानांतर सिनेमा और दर्शन में रही है। राजनीति और विदेश नीति पर पढ़ना-लिखना उन्हें विशेष रूप से पसंद है। इसी रुचि के चलते उन्होंने दो लोकसभा चुनावों और दर्जनों विधानसभा चुनावों की कवरेज की, जहां राजनीति को उन्होंने बेहद नजदीक से देखा और समझा। चुनावी आंकड़ों की बारीकियां, नेताओं के भाषण, जमीनी मुद्दे और जनता की प्रतिक्रियाएं, इन सभी पहलुओं को समेटते हुए उन्होंने सैकड़ों खबरें और विश्लेषण तैयार किए, जो राजनीतिक प्रक्रिया की गहरी समझ को दर्शाते हैं।
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- अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और विदेश नीति से जुड़े विषयों का विश्लेषणात्मक लेखन
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