10 साल की उम्र में मां को खोया, उसी सपने ने बना दिया अफसर... आशीष की UPSC कहानी दिल छू लेगी
आशीष शर्मा ने बचपन में मां को खो दिया था। मां का सपना पूरा करने के लिए उन्होंने 6 साल तक कठिन मेहनत की और पांचवें प्रयास में संघ लोक सेवा आयोग परीक्षा में 186वीं रैंक हासिल कर अफसर बन गए।

Ashish Sharma UPSC Success Story : कुछ सपने ऐसे होते हैं जो इंसान अपने लिए नहीं बल्कि अपने अपनों के लिए जीता है। आशीष शर्मा की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। बचपन में मां को खोने वाले इस बेटे ने उनकी आखिरी इच्छा को अपनी जिंदगी का लक्ष्य बना लिया। आशीष जब सिर्फ 10 साल के थे तभी उनकी मां का निधन हो गया। इतनी छोटी उम्र में मां का साथ छूट जाना उनके लिए सबसे बड़ा दुख था। लेकिन मां का एक सपना हमेशा उनके दिल में जिंदा रहा, उन्हें बड़ा अफसर बनते देखने का सपना। आशीष बताते हैं कि 10वीं कक्षा से ही उन्होंने तय कर लिया था कि उन्हें संघ लोक सेवा आयोग यानी यूपीएससी की परीक्षा देनी है। मां की याद और उनका सपना समय के साथ और मजबूत होता चला गया। छह साल की कठिन मेहनत, 5 प्रयास के बाद आशीष ने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में 186वीं रैंक हासिल की। आइए जानते हैं आशीष शर्मा ने कैसे यूपीएससी का सफर तय किया और उसमें सफलता हासिल की।
ग्वालियर से शुरू हुआ संघर्ष
आशीष ने ग्वालियर के जी.डी. गोयनका स्कूल से पढ़ाई की। इसके बाद जीवाजी विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान, इतिहास और समाजशास्त्र में स्नातक किया। परीक्षा की तैयारी के दौरान उन्होंने वैकल्पिक विषय के रूप में मानवशास्त्र चुना। यह फैसला थोड़ा अलग था, क्योंकि ज्यादातर विद्यार्थी दूसरे पारंपरिक विषय चुनते हैं। लेकिन आशीष कुछ नया पढ़ना चाहते थे। 12वीं में जीव विज्ञान पढ़ने की वजह से उन्हें यह विषय समझने में भी आसानी हुई। बाद में यही विषय उनकी सबसे बड़ी ताकत बना।
पहली बार में साक्षात्कार तक पहुंचे, फिर भी नहीं मिली सफलता
संघ लोक सेवा आयोग की यात्रा आशीष के लिए आसान नहीं रही। पहली ही कोशिश में उन्होंने प्रारंभिक परीक्षा और मुख्य परीक्षा पास कर ली थी। वे साक्षात्कार तक भी पहुंचे, लेकिन अंतिम सूची में उनका नाम सिर्फ 20 अंकों से पीछे रह गया। यह उनके लिए बड़ा झटका था। इसके बाद भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। लगातार मेहनत जारी रखी। तीसरे प्रयास में फिर साक्षात्कार तक पहुंचे, लेकिन सफलता नहीं मिली। समय बीतता गया और पांचवां प्रयास उनके जीवन का सबसे महत्वपूर्ण मोड़ बन गया। यह उनका लगभग आखिरी मौका था। इस बार उन्होंने अपनी तैयारी का तरीका बदल दिया।
जवाब लिखने की शैली ने बदल दी किस्मत
आशीष को समझ आ गया था कि उन्हें मुख्य परीक्षा में सबसे ज्यादा सुधार करना होगा। उन्होंने जवाब लिखने की शैली पर विशेष ध्यान देना शुरू किया। पहले वे छोटे जवाब लिखते थे, लेकिन इस बार उन्होंने हर उत्तर को ज्यादा विस्तार और बेहतर ढंग से लिखना शुरू किया। उत्तरों में अधिक बिंदु, चित्र, नक्शे और सारणी जोड़ने लगे। उन्होंने सफल अभ्यर्थियों की उत्तर पुस्तिकाएं भी खूब पढ़ीं। वहां से उन्होंने सीखा कि सामान्य जवाब को प्रभावशाली कैसे बनाया जा सकता है। इस मेहनत का असर साफ दिखाई दिया। मानवशास्त्र में उनके अंक पहले की तुलना में काफी बढ़ गए। उन्होंने अपने उत्तरों में वर्तमान घटनाओं के उदाहरण भी जोड़ने शुरू किए, जिससे जवाब ज्यादा मजबूत हो गए।
साक्षात्कार का वह पल आज भी याद है
साक्षात्कार के दौरान एक ऐसा पल भी आया जिसे आशीष आज तक नहीं भूले। साक्षात्कार मंडल के एक सदस्य ने उनसे कहा कि उनका जन्मदिन भगवान राम से जुड़ा माना जाता है। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि इसका परीक्षा से कोई संबंध नहीं है, वे सिर्फ उन्हें खुश करना चाहते थे। तनाव भरे माहौल में यह छोटा-सा पल आशीष के चेहरे पर मुस्कान ले आया। हालांकि उनसे उनके गृह जिले मुरैना और वहां के डकैतों के इतिहास को लेकर भी सवाल पूछे गए। लेकिन उन्होंने हर सवाल का शांत और संतुलित जवाब दिया।
मां की कमी हर कदम पर महसूस हुई
आशीष के लिए यह सिर्फ पढ़ाई की लड़ाई नहीं थी। यह एक भावनात्मक संघर्ष भी था। वे कहते हैं कि मां को खोने का दर्द कभी खत्म नहीं हुआ। शायद यही वजह रही कि अफसर बनने का सपना उनके दिल में और गहराई से बसता गया। हर असफलता के बाद वे टूटे जरूर, लेकिन रुके नहीं।
यूपीएससी में मिली 186वीं रैंक
यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में 186वीं रैंक लाना यह एक बेटे की वर्षों की मेहनत, संघर्ष और मां से किए गए वादे की कहानी है। 6 साल की कठिन मेहनत, 5 प्रयास और कई असफलताओं के बाद आखिरकार आशीष शर्मा ने वह सपना पूरा कर दिखाया, जो कभी उनकी मां ने देखा था।
लेखक के बारे में
Himanshu Tiwariशॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।
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हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।
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हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।
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काम से इतर हिमांशु की गहरी रुचि समकालीन इतिहास, समानांतर सिनेमा और दर्शन में रही है। राजनीति और विदेश नीति पर पढ़ना-लिखना उन्हें विशेष रूप से पसंद है। इसी रुचि के चलते उन्होंने दो लोकसभा चुनावों और दर्जनों विधानसभा चुनावों की कवरेज की, जहां राजनीति को उन्होंने बेहद नजदीक से देखा और समझा। चुनावी आंकड़ों की बारीकियां, नेताओं के भाषण, जमीनी मुद्दे और जनता की प्रतिक्रियाएं, इन सभी पहलुओं को समेटते हुए उन्होंने सैकड़ों खबरें और विश्लेषण तैयार किए, जो राजनीतिक प्रक्रिया की गहरी समझ को दर्शाते हैं।
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- UPSC, UPPSC, MPPSC, BPSC, RPSC और JPSC जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं की तैयारी, पैटर्न और नीतिगत पहलुओं पर पैनी नजर
- अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और विदेश नीति से जुड़े विषयों का विश्लेषणात्मक लेखन
- राजनीति, चुनावी आंकड़ों और जमीनी मुद्दों पर सरल और तथ्यपरक एक्सप्लेनर तैयार करने का अनुभव


