JEE में हुए फेल फिर ठुकराई IIT की सीट, खुद बदली अपनी किस्मत, आज हैं IIT बॉम्बे के प्रोफेसर

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अर्जुन जैन ने पहली बार 2001 में 2 साल की जमकर तैयारी करने के बाद जेईई की परीक्षा दी थी। लेकिन इसमें वो असफल रहें। इसके बावजूद उन्होंने इंजीनियरिंग की राह नहीं बदली। पैसों की तंगी की वजह से कोटा में एक और साल कोचिंग कर पाना उनके लिए मुश्किल था।

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अर्जुन जैन की सक्सेस स्टोरी

कहते हैं कि अगर करियर को लेकर सही समय पर सही फैसले लिए जाए जाए, तो इंसान को सफल होने से कोई नहीं रोक सकता है। कुछ ऐसी ही कहानी है अर्जुन जैन की। पहली बार जब वह जेईई में फेल हो गए थे, तब उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि इसके जरिए जिस संस्थान में कभी पढ़ने का मौका मिलता, एक दिन उसी कॉलेज में प्रोफेसर बनकर लौटेंगे। जी हां, अर्जुन जैन आईआईटी बॉम्बे के प्रोफेसर हैं। वो एप्पल और मर्सडीज जैसी ग्लोबल कंपनी के लिए काम भी कर चुके हैं। लेकिन यहां तक पहुंचने की उनकी जर्नी काफी दिलचस्प है। साथ ही इनकी जर्नी ये भी सिखाती है कि फेल होने के बाद कैसे खुद की राह बनाया जा सकता है और सफलता भी प्राप्त की जा सकती है। चलिए आज सक्सेस स्टोरी में बात अर्जुन जैन की बात करते हैं।

जेईई में फेल, नहीं छोड़ी इंजीनियरिंग की राह

बता दें कि अर्जुन जैन ने पहली बार 2001 में 2 साल की जमकर तैयारी करने के बाद जेईई की परीक्षा दी थी। लेकिन इसमें वो असफल रहें। इसके बावजूद उन्होंने इंजीनियरिंग की राह नहीं बदली। पैसों की तंगी की वजह से कोटा में एक और साल कोचिंग कर पाना उनके लिए मुश्किल था। इसलिए उन्होंने बेंगलुरु के आरवी कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग में कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग में एडमिशन ले लिया। यह फैसला आगे चलकर उनके करियर के लिए काफी अच्छा साबित हुआ। कॉलेज में अर्जुन ने अपनी पढ़ाई के अलावा कंप्यूटर साइंस को गहराई से समझना शुरू किया। वह IEEE जर्नल में प्रकाशित रिसर्च पेपर पढ़ने लगे और रिसर्च के क्षेत्र में उनकी रुचि बढ़ती गई।

दोबारा जेईई में आई 3363

इसके बावजूद उनका मन आईआईटी से पढ़ाई करने में लगा रहा। इसी दौरान उन्होंने एक बार फिर जेईई परीक्षा देने का फैसला किया। इस बार उन्होंने हॉस्टल के कमरे से ही तैयारी की। यह तैयारी कॉलेज की पढ़ाई के साथ-साथ हो रही थी। हालांकि दूसरी कोशिश में उनकी AIR 3363 आई। इस रैंक के आधार पर उन्हें IIT-BHU में पेट्रोकेमिकल इंजीनियरिंग में सीट मिल गई। लेकिन कोर्स उनके रुचि मुताबिक नहीं थी। इस वजह से आईआईटी की सीट भी छोड़नी पड़ी। इसके बाद उन्होंने आरवी कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से अपनी इंजीनियरिंग की डिग्री पूरी की और इसके बाद रिसर्च के क्षेत्र में आगे बढ़ते रहे।

पीएचडी के बाद बतौर रिचर्सर किया काम

इसके बाद अर्जुन जैन ने यूनिवर्सिटी ऑफ सारलैंड से कंप्यूटर साइंस में पीएचडीकी। पीएचड पूरी करने के बाद उन्होंने न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी के कूरेंट इंस्टीट्यूट में पोस्टडॉक्टोरल रिसर्चर के तौर पर काम किया। उनकी रिसर्च का मुख्य फील्ड कंप्यूटर विजन और डीप लर्निंग रहा। पोस्टडॉक्टोरल रिसर्च के दौरान उन्होंने यैन लेकुन समेत कई रिसर्चर्स के साथ काम किया। उन्होंने डीप लर्निंग की मदद से इंसानों के शरीर की मुद्रा का अनुमान लगाने से जुड़ी तकनीकों पर रिसर्च की।

इतना ही नहीं रिसर्च के दौरान अर्जुन जैन ने अपना बिजनेस भी शुरू किया। उन्होंने परसेप्टिव कोड नाम की कंपनी बनाई, जो ह्यूमन पोज एस्टीमेशन पर उनके रिसर्च से विकसित तकनीक पर आधारित थी। बाद में इस तकनीक की इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी (IP) Mercedes ने खरीद ली। इसके बाद इस तकनीक का इस्तेमाल Mercedes के वाहन सिस्टम से जुड़े कामों में किया गया।

आईआईटी बॉम्बे के बने प्रोफेसर

उनका सफर और दिलचस्प तब हो गया, जब वो साल 2016 में IIT बॉम्बे में असिस्टेंट प्रोफेसर के तौर पर शामिल हुए। कभी यहां से उनका पढ़ाई करने का सपना हुआ करता था। इसके बाद अर्जुन जैन ने अकादमिक रिसर्च और इंडस्ट्री, दोनों क्षेत्रों में काम किया। उन्होंने Apple में सीनियर रिसर्चर के तौर पर काम किया, जहां उनका काम कंप्यूटर विजन और वाहनों से जुड़ी सेंसिंग तकनीकों पर केंद्रित था। Apple में काम करने के बाद उन्होंने बेंगलुरु में फास्ट कोड एआई की स्थापना की। उनका काम AI, कंप्यूटर विज़न और रिसर्च-आधारित तकनीकों से जुड़ा रहा।

Dheeraj Pal

लेखक के बारे में

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संक्षिप्त विवरण: धीरज पाल को पत्रकारिता के क्षेत्र में 7 साल का अनुभव है। लाइव हिन्दुस्तान में काम करते हुए इन्हें 4 साल हो गए हैं। धीरज एजुकेशन रिपोर्टर के तौर पर काम कर चुके हैं। अपने करियर के दौरान धीरज ने राजनीति समाचार, एजुकेशन बीट के लिए ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की है।

शैक्षणिक पृष्ठभूमि
धीरज ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए इन मीडिया स्टडीज और राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज से जनसंचार एवं पत्रकारिता से परास्नातक की पढ़ाई की। धीरज पाल ने अपने पत्रकारिता कर की शुरुआत एपीएन न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने लोकमत न्यूज हिंदी और एनडीटीवी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। हिंदुस्तान लाइव में यूपी बोर्ड से लेकर उन्होंने लोकसभा चुनाव कवर करने साथ-साथ खेल जैसे बीट पर काम किया। अब इनका एकमात्र उद्देश्य करियर और एजुकेशन से जुड़ी रुचिगत, सरल, प्रमाणिक और पाठक-हितैषी रूप में प्रस्तुत करना है।

व्यक्तिगत रुचियां
उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के निवासी धीरज पाल को पत्रकारिता और ज्योतिषीय अध्ययन के साथ-साथ घूमने, किताबें पढ़ने और क्रिकेट खेलने का शौक है।

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