APAAR ID: आधार की कमी से रुका लगभग 30 लाख बच्चों का अपार आईडी कार्ड , सरकारी स्कूलों में 74% छात्रों का रजिस्ट्रेशन पूरा

Feb 12, 2026 08:42 am ISTPrachi लाइव हिन्दुस्तान
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APAAR ID Card: केंद्र सरकार की 'वन नेशन, वन स्टूडेंट आईडी' योजना के तहत बिहार के सरकारी स्कूलों में अपार (APAR) कार्ड बनाने की प्रक्रिया तेज हो गई है। सरकारी स्कूलों में अभी भी 29,98,278 (लगभग 30 लाख) बच्चे ऐसे हैं जिनका आधार कार्ड नहीं बना है।

APAAR ID: आधार की कमी से रुका लगभग 30 लाख बच्चों का अपार आईडी कार्ड , सरकारी स्कूलों में 74% छात्रों का रजिस्ट्रेशन पूरा

APAAR ID Card: केंद्र सरकार की 'वन नेशन, वन स्टूडेंट आईडी' योजना के तहत बिहार के सरकारी स्कूलों में अपार (APAAR) कार्ड बनाने की प्रक्रिया तेज हो गई है। आंकड़ों के अनुसार, राज्य के सरकारी स्कूलों में नामांकित कुल 1.65 करोड़ बच्चों में से 73.92% यानी 1,22,69,756 छात्रों का अपार कार्ड 11 फरवरी 2026 तक बनाया जा चुका है।

यह 12 अंकों का एक विशिष्ट कोड है, जो विद्यार्थी के शैक्षणिक सफर का डिजिटल आधार बनेगा। हालांकि, अभी यह सरकारी तौर पर पूरी तरह अनिवार्य नहीं है, लेकिन शैक्षणिक संस्थानों द्वारा इसे अनिवार्य किया जा रहा है ताकि बच्चों का ट्रैक रिकॉर्ड सुरक्षित रहे।

क्यों जरूरी है अपार आईडी?

अपार आईडी न होने पर छात्रों को भविष्य में कई तकनीकी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। इसकी उपयोगिता इन क्षेत्रों में मुख्य है:

डिजिटल रिकॉर्ड: मार्कशीट और डिग्री जैसे एकेडमिक रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने के लिए।

आसान माइग्रेशन: एक स्कूल से दूसरे स्कूल में ट्रांसफर के समय डॉक्यूमेंट की झंझट खत्म होगी।

सरकारी लाभ: सकॉलरशिप और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे पाने में आसानी होगी।

आंकड़ों की जुबानी: प्राथमिक कक्षाओं में चुनौती

राज्य में छठी से बारहवीं तक के बच्चों में अपार कार्ड बनाने की दर काफी अच्छी है, लेकिन प्राथमिक स्तर (पहली से पांचवीं) पर यह प्रक्रिया धीमी है:

छठी से बारहवीं तक: 67.48 लाख बच्चों का कार्ड बन चुका है (कुल बने कार्ड का 55%)।

पहली से पांचवीं तक: 55.21 लाख बच्चों का ही कार्ड बन पाया है।

बड़ी बाधा - आधार कार्ड: सरकारी स्कूलों में अभी भी 29,98,278 (लगभग 30 लाख) बच्चे ऐसे हैं जिनका आधार कार्ड नहीं बना है। पहली कक्षा में कई बच्चों का नामांकन प्रोविजनल रूप से लिया गया था। आधार सेंटर की कमी के कारण प्रधानाध्यापकों के लिए इन बच्चों का आधार और फिर अपार कार्ड बनवाना एक बड़ी चुनौती बन गया है।

आधार कार्ड की भूमिका: क्यों है यह अनिवार्य?

अपार आईडी बनाने के लिए आधार कार्ड प्राथमिक आवश्यकता है। आधार कार्ड का महत्व शिक्षा के अलावा अन्य क्षेत्रों में भी जरूरी है:

वित्तीय और सरकारी सेवाएं: नया बैंक खाता, लोन, राशन, पेंशन और एलपीजी सब्सिडी प्राप्त करने के लिए।

पहचान प्रमाण: नौकरी, पासपोर्ट बनवाने, होटल बुकिंग और यात्रा के दौरान निवास प्रमाणित करने के लिए।

डिजिटल केवाईसी: सिम कार्ड लेने या ऑनलाइन निवेश के लिए ई-केवाईसी में।

टैक्स संबंधी कार्य: पैन कार्ड से लिंक करने और आईटीआर भरने के लिए।

सरकारी स्कूलों में अब भी 29,98,278 बच्चे ऐसे हैं जिनका आधार कार्ड नहीं है।

● राज्य में पहली से बारहवीं तक के कुल बच्चे : 16598489

● 11 फरवरी तक अपार बन चुका है: 12269756

● कुल नामांकित बच्चों की तुलना में अपार कार्ड बनने का प्रतिशत : 73.92

● छठी से बारहवीं तक के बच्चों का अपार कार्ड बना : 6748365

● पहली से पांचवीं तक के बच्चों का अपार कार्ड बना : 5521391

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लेखक के बारे में

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शॉर्ट बायो: प्राची लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में कंटेंट प्रोड्यूसर हैं। पिछले 2 वर्षों से वे करियर, शिक्षा और सरकारी नौकरियों से जुड़े विषयों पर लिख रही हैं। मुश्किल खबरों को आसान भाषा में पाठकों तक पहुंचाना उनकी विशेषता है। वे 2024 से लाइव हिन्दुस्तान की करियर टीम का हिस्सा हैं।

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