'पहले कोडिंग खत्म होगी, फिर सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग', एंथ्रोपिक CEO डारियो अमोदेई का बड़ा दावा
एंथ्रोपिक के सीईओ डारियो अमोदेई का कहना है कि एआई सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग से पहले कोडिंग को पूरी तरह खत्म कर देगा, जिससे इंसानी हुनर और क्रिटिकल थिंकिंग सबसे जरूरी हो जाएंगे।

तकनीक की दुनिया जिस रफ्तार से बदल रही है उसने भविष्य के रोजगार और करियर को लेकर कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। अब इस बहस को एक नया मोड़ दिया है आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की दुनिया के एक बड़े नाम ने। मशहूर एआई मॉडल क्लॉड (Claude) बनाने वाली कंपनी एंथ्रोपिक (Anthropic) के सीईओ डारियो अमोदेई का मानना है कि एआई आने वाले समय में सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग की बारीकियों को संभालने से पहले कोडिंग को पूरी तरह अपने कब्जे में ले लेगा। उनके इस बयान ने टेक इंडस्ट्री से जुड़े लोगों, खासकर नए डेवलपर्स की धड़कनें बढ़ा दी हैं। भारतीय बिजनेसमैन और जेरोधा के को-फाउंडर निखिल कामथ के पॉडकास्ट में बातचीत के दौरान डारियो अमोदेई ने तकनीक के इस बदलते दौर, सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट के भविष्य और युवाओं के लिए जरूरी स्किल्स पर खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि जो लोग भविष्य की तैयारी कर रहे हैं, उन्हें एआई से मुकाबला करने के बजाय ऐसे हुनर सीखने चाहिए जो एआई के दौर में मददगार साबित हों। जब निखिल कामथ ने अमोदेई से पूछा कि एआई से सबसे ज्यादा बदलाव किस सेक्टर में आने वाला है, तो उनका सीधा जवाब था सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट।
डारियो अमोदेई ने कहा, "मुझे लगता है कि कोडिंग सबसे पहले खत्म होने जा रही है। एआई मॉडल्स सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग की बड़ी और व्यापक जिम्मेदारियों को संभालने से पहले बुनियादी कोडिंग को पूरी तरह ऑटोमेट यानी खुद-ब-खुद कर देंगे।" उनका मानना है कि किसी प्रोग्राम को लिखना या कोड टाइप करना एक ऐसा काम है जिसे एआई बहुत जल्द और बेहद सटीकता से करना सीख जाएगा। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग का दायरा सिर्फ कोड लिखने तक सीमित नहीं है। इसमें एंड-टू-एंड काम शामिल होते हैं, जिन्हें पूरी तरह संभालने में एआई को थोड़ा वक्त जरूर लगेगा, लेकिन यह बदलाव भी तय है।
क्या है 5% बनाम 95% का फॉर्मूला
इस बदलाव का मतलब यह कतई नहीं है कि इंसानों की जरूरत पूरी तरह खत्म हो जाएगी। अमोदेई के मुताबिक, सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट के कई ऐसे पहलू हैं जहां इंसानी दिमाग और समझ का कोई विकल्प नहीं है। उदाहरण के लिए प्रोडक्ट का डिजाइन कैसा होना चाहिए, यूजर या ग्राहक की असल जरूरत क्या है, मार्केट में किस चीज की डिमांड है और अलग-अलग एआई सिस्टम्स को एक साथ मिलकर कैसे मैनेज करना है। इन सब कामों के लिए इंसानों की ही जरूरत पड़ेगी। अमोदेई ने एक दिलचस्प गणित समझाते हुए कहा कि भले ही इंसान किसी प्रोजेक्ट में सिर्फ 5% काम करे और बाकी का 95% काम एआई संभाल ले, फिर भी इंसान की प्रोडक्टिविटी पहले के मुकाबले 20 गुना बढ़ जाएगी। यानी एआई इंसानों को हटाने के बजाय उनके काम की रफ्तार को कई गुना तेज कर देगा।
युवाओं के लिए क्या दी सलाह
आज के युवाओं को भविष्य के लिए किस तरह के स्किल्स या हुनर पर ध्यान देना चाहिए? इस सवाल पर एंथ्रोपिक के सीईओ ने बिल्कुल अलग नजरिया पेश किया। उन्होंने कहा कि युवाओं को उन सेक्टर्स में कदम बढ़ाना चाहिए जहां एआई उनके रास्ते का रोड़ा बनने के बजाय उनके लिए एक मददगार की तरह काम करे। फिजिकल वर्ल्ड और ट्रेडिशनल इंजीनियरिंग: उन्होंने सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी और ऐसी पारंपरिक इंजीनियरिंग फील्ड्स पर ध्यान देने की सलाह दी, जिनका सीधा संबंध भौतिक दुनिया से है। जैसे की ह्यूमन-सेंट्रिक प्रोफेशन्स ये ऐसे काम जहां इंसानी जुड़ाव, बातचीत और भावनाओं की जरूरत होती है, वे हमेशा सुरक्षित रहेंगे। क्रिटिकल थिंकिंग को लेकर अमोदेई का मानना है कि आने वाले समय में क्रिटिकल थिंकिंग सबसे कीमती हुनर बनने जा रहा है। जब एआई पलक झपकते ही कुछ भी लिख सकता है या बना सकता है, तब यह परखने की क्षमता कि क्या सही है और क्या गलत, सबसे ज्यादा मायने रखेगी।
अंधाधुंध और लापरवाही भरे इस्तेमाल को लेकर चेतावनी
डारियो अमोदेई ने एआई के अंधाधुंध और लापरवाही भरे इस्तेमाल को लेकर एक चेतावनी भी दी। उन्होंने कहा कि एआई से बनने वाली तस्वीरें और वीडियो इतने असली दिखने लगे हैं कि सच और झूठ का फर्क करना मुश्किल होता जा रहा है। ऐसे में इंसानों के भीतर 'स्ट्रीट स्मार्टनेस' और जानकारी को खुद जांचने-परखने की आदत होनी बहुत जरूरी है। इसके साथ ही, उन्होंने छात्रों द्वारा होमवर्क या असाइनमेंट पूरा करने के लिए एआई के सीधे इस्तेमाल को 'होमवर्क में चोरी' करार दिया। एंथ्रोपिक के अपने इंटरनल रिसर्च का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि कोडिंग के लिए एआई का गलत या जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल लोगों को 'डी-स्किल' कर रहा है, यानी लोग अपना खुद का हुनर भूलते जा रहे हैं। अगर हम एआई पर पूरी तरह निर्भर हो गए, तो इंसान दिमागी तौर पर कमजोर हो सकता है। समझदारी इसी में है कि इसका इस्तेमाल अपनी काबिलियत को बढ़ाने के लिए किया जाए, न कि खुद को आलसी बनाने के लिए।
बिना प्रोग्रामिंग जानने वालों के लिए क्या है रास्ता?
पॉडकास्ट के दौरान निखिल कामथ ने यह चिंता भी जताई कि जो लोग प्रोग्रामर नहीं हैं, उनके लिए 'क्लॉड कोड' जैसे एआई टूल्स को सीखना और इस्तेमाल करना काफी मुश्किल होता है। इस पर अमोदेई ने भरोसा दिलाया कि उनकी कंपनी एआई इंटरफेस को लगातार आसान बनाने पर काम कर रही है ताकि आम लोग भी बिना किसी कोडिंग बैकग्राउंड के इसका फायदा उठा सकें। उन्होंने साफ कहा कि एआई सीखने का कोई शॉर्टकट नहीं है, यह एक व्यावहारिक विज्ञान है जिसे आप काम करते-करते ही सीखते हैं। कंपनी आने वाले दिनों में और भी आसान ट्यूटोरियल्स और गाइड जारी करेगी ताकि लोग सही तरीके से प्रॉम्ट लिखना सीख सकें।
लेखक के बारे में
Himanshu Tiwariशॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।
परिचय एवं अनुभव
हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।
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हिमांशु के लिए पत्रकारिता का मतलब सिर्फ सूचना देना नहीं है, बल्कि पाठक को सोचने की जगह देना भी है। खासकर करियर और शिक्षा के क्षेत्र में वह यह मानते हैं कि एक गलत या अधूरी खबर किसी छात्र की पूरी तैयारी को भटका सकती है। इसलिए उनके लेखन में सरल भाषा, ठोस तथ्य और व्यावहारिक नजरिया हमेशा प्राथमिकता में रहता है। उनकी कोशिश रहती है कि पाठक को सिर्फ खबर की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी समझ आए कि उस खबर का उसके जीवन और भविष्य से क्या रिश्ता है।
शिक्षा और अकादमिक पृष्ठभूमि
हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।
रुचियां और निजी झुकाव
काम से इतर हिमांशु की गहरी रुचि समकालीन इतिहास, समानांतर सिनेमा और दर्शन में रही है। राजनीति और विदेश नीति पर पढ़ना-लिखना उन्हें विशेष रूप से पसंद है। इसी रुचि के चलते उन्होंने दो लोकसभा चुनावों और दर्जनों विधानसभा चुनावों की कवरेज की, जहां राजनीति को उन्होंने बेहद नजदीक से देखा और समझा। चुनावी आंकड़ों की बारीकियां, नेताओं के भाषण, जमीनी मुद्दे और जनता की प्रतिक्रियाएं, इन सभी पहलुओं को समेटते हुए उन्होंने सैकड़ों खबरें और विश्लेषण तैयार किए, जो राजनीतिक प्रक्रिया की गहरी समझ को दर्शाते हैं।
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- अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और विदेश नीति से जुड़े विषयों का विश्लेषणात्मक लेखन
- राजनीति, चुनावी आंकड़ों और जमीनी मुद्दों पर सरल और तथ्यपरक एक्सप्लेनर तैयार करने का अनुभव


