पैसा और पद सब मिल जाए, लेकिन खुद को न जानें तो क्या फायदा? अंकुर वारिकू की बात सोचने पर कर देगी मजबूर
अंकुर वारिकू का चर्चित विचार सोशल मीडिया पर चर्चा में है। उन्होंने बताया कि कैसे अपनी लाइफ में बेहतर बनाया जा सकता है।

आज के दौर में हर कोई किसी न किसी दौड़ में भाग रहा है। कोई बेहतर नौकरी चाहता है, कोई ज्यादा पैसा कमाना चाहता है, तो कोई समाज में पहचान बनाने की कोशिश कर रहा है। इस भागदौड़ में अक्सर लोग एक बेहद जरूरी सवाल पूछना ही भूल जाते हैं कि आखिर वे सच में चाहते क्या हैं? इसी सोच को लेकर उद्यमी, लेखक और मोटिवेशनल स्पीकर अंकुर वारिकू का एक विचार इन दिनों लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। उनका कहना है कि खुद को खोजने की कोशिश में व्यस्त रहना, उस चूहे-दौड़ में व्यस्त रहने से बेहतर है जिसमें आप पूरी जिंदगी लगे रहें और कभी खुद को जान ही न पाएं।
कौन हैं अंकुर वारिकू?
अंकुर वारिकू का जन्म 25 अगस्त 1980 को नई दिल्ली में हुआ था। वे एक सफल उद्यमी, लेखक, कंटेंट क्रिएटर और सार्वजनिक वक्ता के रूप में जाने जाते हैं। उन्होंने स्टार्टअप्स की दुनिया में अपनी पहचान बनाई और बाद में युवाओं को करियर, पैसे, आदतों और जीवन से जुड़े विषयों पर मार्गदर्शन देना शुरू किया। उनकी किताबें युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय रही हैं। इन किताबों के जरिए उन्होंने लोगों को यह सोचने के लिए प्रेरित किया कि सफलता का मतलब केवल पैसा और पद नहीं होता, बल्कि अपनी पसंद और मूल्यों के अनुसार जीवन जीना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
क्या है इस विचार का असली मतलब?
वारिकू के इस विचार में इस्तेमाल किया गया चूहे दौड़ शब्द उस कभी न खत्म होने वाली कंप्टीशन की तरफ इशारा करता है, जहां लोग लगातार दूसरों से तुलना करते रहते हैं। बेहतर वेतन, बड़ी गाड़ी, बड़ा घर या ऊंचा पद पाने की होड़ में कई लोग अपनी वास्तविक इच्छाओं और खुशियों से दूर होते चले जाते हैं। उनका संदेश यह है कि यदि कोई व्यक्ति खुद को नहीं समझता, अपनी पसंद-नापसंद नहीं जानता और केवल दूसरों को देखकर फैसले लेता है, तो वह चाहे कितनी भी उपलब्धियां हासिल कर ले, अंदर से संतुष्ट नहीं हो पाएगा।
खुद को जानना क्यों है जरूरी?
जीवन में सही फैसले लेने के लिए आत्म-समझ बेहद जरूरी मानी जाती है। जब व्यक्ति अपनी ताकत, कमजोरियों, रुचियों और मूल्यों को समझ लेता है, तब वह ऐसे लक्ष्य चुनता है जो उसे भीतर से खुशी और संतोष देते हैं। कई बार लोग समाज की उम्मीदों के कारण ऐसे रास्ते चुन लेते हैं जो उनके लिए बने ही नहीं होते। बाद में सफलता मिलने के बावजूद उन्हें खालीपन महसूस होता है। वारिकू का विचार इसी समस्या की ओर ध्यान दिलाता है।
युवाओं के बीच क्यों लोकप्रिय हैं वारिकू?
अंकुर वारिकू की सबसे बड़ी खासियत यह मानी जाती है कि वे केवल सफलता की बातें नहीं करते, बल्कि असफलता, डर, भ्रम और आत्म-संदेह जैसे विषयों पर भी खुलकर चर्चा करते हैं। यही वजह है कि छात्र और युवा पेशेवर उनके विचारों से खुद को जोड़ पाते हैं। वे अक्सर कहते हैं कि जीवन में सही रास्ता खोजने के लिए प्रयोग करना जरूरी है। हर व्यक्ति को अलग-अलग अनुभव लेने चाहिए, क्योंकि कई बार असली मंजिल रास्ते में ही मिलती है।
लेखक के बारे में
Himanshu Tiwariशॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।
परिचय एवं अनुभव
हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।
लेखन की सोच और मकसद
हिमांशु के लिए पत्रकारिता का मतलब सिर्फ सूचना देना नहीं है, बल्कि पाठक को सोचने की जगह देना भी है। खासकर करियर और शिक्षा के क्षेत्र में वह यह मानते हैं कि एक गलत या अधूरी खबर किसी छात्र की पूरी तैयारी को भटका सकती है। इसलिए उनके लेखन में सरल भाषा, ठोस तथ्य और व्यावहारिक नजरिया हमेशा प्राथमिकता में रहता है। उनकी कोशिश रहती है कि पाठक को सिर्फ खबर की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी समझ आए कि उस खबर का उसके जीवन और भविष्य से क्या रिश्ता है।
शिक्षा और अकादमिक पृष्ठभूमि
हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।
रुचियां और निजी झुकाव
काम से इतर हिमांशु की गहरी रुचि समकालीन इतिहास, समानांतर सिनेमा और दर्शन में रही है। राजनीति और विदेश नीति पर पढ़ना-लिखना उन्हें विशेष रूप से पसंद है। इसी रुचि के चलते उन्होंने दो लोकसभा चुनावों और दर्जनों विधानसभा चुनावों की कवरेज की, जहां राजनीति को उन्होंने बेहद नजदीक से देखा और समझा। चुनावी आंकड़ों की बारीकियां, नेताओं के भाषण, जमीनी मुद्दे और जनता की प्रतिक्रियाएं, इन सभी पहलुओं को समेटते हुए उन्होंने सैकड़ों खबरें और विश्लेषण तैयार किए, जो राजनीतिक प्रक्रिया की गहरी समझ को दर्शाते हैं।
विशेषज्ञताएं
- शिक्षा, करियर और नौकरियों से जुड़ी खबरों पर विशेष रुचि और निरंतर लेखन
- नीट, जेईई और राज्यवार बोर्ड परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों, बदलावों और परिणामों पर गहन फोकस
- UPSC, UPPSC, MPPSC, BPSC, RPSC और JPSC जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं की तैयारी, पैटर्न और नीतिगत पहलुओं पर पैनी नजर
- अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और विदेश नीति से जुड़े विषयों का विश्लेषणात्मक लेखन
- राजनीति, चुनावी आंकड़ों और जमीनी मुद्दों पर सरल और तथ्यपरक एक्सप्लेनर तैयार करने का अनुभव


