Quote of the Day: शिक्षा उस शेरनी का दूध है... तरक्की के लिए बाबा साहब की इन बातों को आज ही गांठ बांध लें

Himanshu Tiwari लाइव हिन्दुस्तान
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Ambedkar Jayanti 2026 : आज 14 अप्रैल को बाबा साहब डॉ. बी.आर. आंबेडकर की जयंती है। उनके जीवन और अनमोल विचारों से आप शिक्षा, संघर्ष और सफलता के वो बेहतरीन मंत्र सीख सकते हैं जो आपकी जिंदगी बदल देंगे।

Quote of the Day: शिक्षा उस शेरनी का दूध है... तरक्की के लिए बाबा साहब की इन बातों को आज ही गांठ बांध लें

Ambedkar Jayanti 2026 : आज 14 अप्रैल का दिन कलेंडर केवल एक तारीख नहीं बल्कि हिंदुस्तान के इतिहास का वो सुनहरा पन्ना है जब देश को एक नई दिशा देने वाले महानायक ने जन्म लिया था। हम बात कर रहे हैं बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर की। आम तौर पर लोग उन्हें सिर्फ भारतीय संविधान के निर्माता या फिर शोषितों वंचितों के मसीहा के तौर पर ही याद करते हैं। लेकिन अगर सच मानिए तो उनका पूरा जीवन संघर्ष और कामयाबी की किसी ऐसी खुली किताब की तरह है, जिसे पढ़ लिया जाए तो इंसान के सोचने का नजरिया ही बदल जाए। जिंदगी की दौड़ में अगर आप बार बार ठोकर खा रहे हैं, समाज या आपके आस पास के हालात आपको लगातार पीछे की तरफ खींच रहे हैं तो बाबा साहब के विचार आपके लिए संजीवनी बूटी का काम कर सकते हैं। आज के इस खास मौके पर हम जानेंगे कि आखिर बाबा साहब के जीवन से ऐसी कौन सी वो अहम बातें हैं, जिन्हें अपनी जिंदगी में उतारकर हम कामयाबी की एक नई इबारत लिख सकते हैं।

'शिक्षित बनो, संगठित रहो, संघर्ष करो'

बाबा साहब का ये दिया हुआ नारा आज भी करोड़ों लोगों की रगों में जोश भर देता है। उनका मानना था कि समाज में बदलाव बिना पढ़े लिखे नहीं आ सकता। एक बहुत ही मशहूर बात उन्होंने कही थी कि "शिक्षा उस शेरनी का दूध है, जो इसे पिएगा वो दहाड़ेगा।" जिंदगी की आपाधापी में कई बार हम सिर्फ एक अच्छी नौकरी पाने के लिए डिग्रियां बटोरने लगते हैं। लेकिन बाबा साहब का नजरिया इससे कहीं आगे का था। वो मानते थे कि सच्ची शिक्षा इंसान के दिमाग के जाले साफ करती है, उसे आजाद करती है। उन्होंने खुद तमाम झंझावातों और आर्थिक तंगी के बीच दुनिया की सबसे बेहतरीन यूनिवर्सिटीज से डिग्रियां हासिल कीं। ये हमें सिखाता है कि हालात चाहे कितने भी बदतर क्यों न हों, सीखने और पढ़ने की ललक कभी मत छोड़िए। ज्ञान वो इकलौता हथियार है जिसकी धार कभी कम नहीं होती।

खुद पर अटूट विश्वास और संघर्ष से यारी

जरा आंखें बंद करके सोचिए, उस जमाने में जब छुआछूत अपने चरम पर थी, क्लास के बाहर तपती धूप और कड़कड़ाती ठंड में बैठकर पढ़ने वाला एक साधारण सा बच्चा कैसे पूरे मुल्क का भाग्य विधाता बन गया? इसके पीछे कोई जादू नहीं था, बल्कि वजह खुद पर बेतहाशा विश्वास थी। बाबा साहब बार-बार लोगों को यही समझाते थे कि किस्मत और भगवान के भरोसे हाथ पर हाथ धरे बैठने से अच्छा है, अपनी मेहनत पर भरोसा किया जाए। आज की पीढ़ी अक्सर छोटी छोटी नाकामियों से टूटकर डिप्रेशन में चली जाती है। ऐसे में बाबा साहब का जीवन हमें ये हौसला देता है कि अगर रास्ते में कांटे आ रहे हैं तो इसका मतलब है कि आप अपनी मंजिल के बिल्कुल सही रास्ते पर जा रहे हैं।

महिलाओं के सम्मान और तरक्की की वकालत

अगर हम एक सभ्य और कामयाब समाज की बात करें तो वहां महिलाओं की क्या जगह है, ये बात बाबा साहब बखूबी जानते थे। उनका एक बेहद ही दमदार कोट है कि "मैं किसी भी समाज की तरक्की इस बात से मापता हूं कि वहां की महिलाओं ने कितनी तरक्की की है।" हिंदू कोड बिल के जरिए महिलाओं को पिता की संपत्ति में हक दिलाने और समाज में बराबरी का दर्जा देने के लिए उन्होंने अपने मंत्री पद तक की परवाह नहीं की और इस्तीफा दे दिया। आज के दौर में अगर आपको घर परिवार या नौकरी में सुखी रहना है, तो महिलाओं का सम्मान करना और उन्हें आगे बढ़ने के मौके देना सीखना ही होगा। बिना इसके कोई भी समाज या इंसान आगे नहीं जा सकता।

आज के दौर में इन विचारों की अहमियत

आज की इस भागदौड़ भरी और तनाव वाली लाइफस्टाइल में डॉ. आंबेडकर के ये विचार किसी अचूक नुस्खे से कम नहीं हैं। जिंदगी में सफल होने का मतलब सिर्फ बैंक बैलेंस बढ़ाना नहीं होता। कामयाबी का असली मतलब एक बेहतरीन इंसान बनना, अपने हक के लिए बिना डरे आवाज उठाना और दूसरों को साथ लेकर चलना है। इसलिए इस 14 अप्रैल को सिर्फ एक छुट्टी के दिन की तरह न गुजारें। बाबा साहब की दी हुई इन सीखों पर ठंडे दिमाग से विचार करें। अपनी जिंदगी की कमान खुद अपने हाथों में लें, क्योंकि जब इंसान दिमागी तौर पर आजाद होता है, तभी वो असल मायने में कामयाब हो पाता है।

Himanshu Tiwari

लेखक के बारे में

Himanshu Tiwari

शॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।

परिचय एवं अनुभव
हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।

लेखन की सोच और मकसद
हिमांशु के लिए पत्रकारिता का मतलब सिर्फ सूचना देना नहीं है, बल्कि पाठक को सोचने की जगह देना भी है। खासकर करियर और शिक्षा के क्षेत्र में वह यह मानते हैं कि एक गलत या अधूरी खबर किसी छात्र की पूरी तैयारी को भटका सकती है। इसलिए उनके लेखन में सरल भाषा, ठोस तथ्य और व्यावहारिक नजरिया हमेशा प्राथमिकता में रहता है। उनकी कोशिश रहती है कि पाठक को सिर्फ खबर की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी समझ आए कि उस खबर का उसके जीवन और भविष्य से क्या रिश्ता है।

शिक्षा और अकादमिक पृष्ठभूमि
हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।

रुचियां और निजी झुकाव
काम से इतर हिमांशु की गहरी रुचि समकालीन इतिहास, समानांतर सिनेमा और दर्शन में रही है। राजनीति और विदेश नीति पर पढ़ना-लिखना उन्हें विशेष रूप से पसंद है। इसी रुचि के चलते उन्होंने दो लोकसभा चुनावों और दर्जनों विधानसभा चुनावों की कवरेज की, जहां राजनीति को उन्होंने बेहद नजदीक से देखा और समझा। चुनावी आंकड़ों की बारीकियां, नेताओं के भाषण, जमीनी मुद्दे और जनता की प्रतिक्रियाएं, इन सभी पहलुओं को समेटते हुए उन्होंने सैकड़ों खबरें और विश्लेषण तैयार किए, जो राजनीतिक प्रक्रिया की गहरी समझ को दर्शाते हैं।

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- शिक्षा, करियर और नौकरियों से जुड़ी खबरों पर विशेष रुचि और निरंतर लेखन
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- UPSC, UPPSC, MPPSC, BPSC, RPSC और JPSC जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं की तैयारी, पैटर्न और नीतिगत पहलुओं पर पैनी नजर
- अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और विदेश नीति से जुड़े विषयों का विश्लेषणात्मक लेखन
- राजनीति, चुनावी आंकड़ों और जमीनी मुद्दों पर सरल और तथ्यपरक एक्सप्लेनर तैयार करने का अनुभव

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