इलाहाबाद हाई कोर्ट ने यूपी होमगार्ड सिपाही भर्ती की उम्र-छूट खत्म करने पर सरकार से मांगा जवाब
सिपाही भर्ती में होमगार्डों को मिली उम्र की छूट अचानक खत्म होने से हड़कंप मच गया है। इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा सरकार और भर्ती बोर्ड से जवाब मांगे जाने से यह मामला और गंभीर बना गया है।

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सिपाही भर्ती से जुड़े एक अहम मामले में राज्य सरकार और पुलिस भर्ती बोर्ड से जवाब तलब किया है। मामला होमगार्ड अभ्यर्थियों को दी गई तीन साल की आयु-सीमा छूट को अचानक समाप्त किए जाने से जुड़ा है। कोर्ट ने इस पूरे घटनाक्रम को प्रथम दृष्टया गंभीर मानते हुए अगली सुनवाई की तारीख 12 फरवरी 2026 तय की है। यह आदेश न्यायमूर्ति विकास बुधवार की एकल पीठ ने शिवम सिंह और उनके साथ 22 अन्य याचियों की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। याचिका में भर्ती प्रक्रिया के बीच नियम बदलने को असंवैधानिक और मनमाना बताया गया है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने साफ संकेत दिए कि अगर सरकार खुद किसी वर्ग को छूट देती है और उसी आधार पर अभ्यर्थी आवेदन करते हैं, तो बाद में उस छूट को खत्म करना न्यायसंगत नहीं ठहराया जा सकता।
पूरा मामला क्या है
यह विवाद उत्तर प्रदेश में 32,679 सिपाही और समकक्ष पदों की सीधी भर्ती से जुड़ा हुआ है। याचियों की तरफ से अधिवक्ता ऋषभ केसरवानी ने कोर्ट को बताया कि राज्य सरकार ने 5 जनवरी 2026 को एक नीतिगत निर्णय लेते हुए होमगार्ड श्रेणी के अभ्यर्थियों को अधिकतम आयु सीमा में तीन वर्ष की छूट देने का आदेश जारी किया था। इस निर्णय के बाद बड़ी संख्या में होमगार्ड अभ्यर्थियों ने खुद को पात्र मानते हुए भर्ती के लिए आवेदन किया। कई अभ्यर्थियों ने आवेदन शुल्क भी जमा किया और भर्ती प्रक्रिया की आगे की तैयारी में जुट गए। लेकिन याचियों का कहना है कि 22 जनवरी 2026 को पुलिस भर्ती बोर्ड ने अचानक एक नया आदेश जारी कर होमगार्ड अभ्यर्थियों को दी गई यह आयु-सीमा छूट समाप्त कर दी। इस फैसले के चलते वे अभ्यर्थी जो पहले पात्र थे, एक झटके में अयोग्य घोषित हो गए।
अभ्यर्थियों की आपत्ति क्या है
याचिका में कहा गया है कि भर्ती प्रक्रिया शुरू होने के बाद नियमों में इस तरह का बदलाव करना न सिर्फ गलत है, बल्कि अभ्यर्थियों के भरोसे को भी तोड़ता है। जिन होमगार्ड जवानों ने सरकार के फैसले पर भरोसा करके आवेदन किया, उनके साथ यह सीधा अन्याय है। अभ्यर्थियों का तर्क है कि आयु-सीमा छूट समाप्त होने से वे न केवल नौकरी के अवसर से वंचित हो गए, बल्कि उनका समय, मेहनत और पैसा भी व्यर्थ चला गया। इसे प्रशासनिक मनमानी बताया गया है।
हाई कोर्ट ने क्या कहा
कोर्ट ने सुनवाई के दौरान टिप्पणी करते हुए कहा कि जब राज्य सरकार खुद किसी विशेष श्रेणी को आयु-सीमा में छूट देने का निर्णय ले चुकी है और अभ्यर्थी उसी आधार पर आवेदन भी कर चुके हैं, तो भर्ती बोर्ड द्वारा बीच में आकर उस छूट को समाप्त करना गंभीर सवाल खड़े करता है। कोर्ट ने माना कि भर्ती प्रक्रिया के दौरान नियम बदलना संविधान के समानता और न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ हो सकता है। याचियों की दलील है कि यह कदम उनके वैध अधिकारों का हनन करता है और इसी आधार पर भर्ती बोर्ड के आदेश को निरस्त किए जाने की मांग की गई है।
हाई कोर्ट ने राज्य सरकार और पुलिस भर्ती बोर्ड से पूरे मामले पर जवाब दाखिल करने को कहा है। अगली सुनवाई 12 फरवरी 2026 को होगी, जिसमें सरकार की ओर से यह स्पष्ट करना होगा कि आयु-सीमा छूट पहले क्यों दी गई और फिर अचानक क्यों वापस ली गई। इस फैसले पर हजारों होमगार्ड अभ्यर्थियों की नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि कोर्ट का अंतिम रुख उनकी भर्ती की दिशा और भविष्य तय कर सकता है।



