NEET UG Counselling: AIQ और स्टेट कोटा काउंसलिंग में क्या है अंतर? MBBS, BDS व नर्सिंग दाखिले से पहले समझें!

By Prachi
लाइव हिन्दुस्तान
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Medical Admission AIQ vs State Quota: नीट यूजी काउंसलिंग 2026 में ऑल इंडिया कोटा (AIQ) और स्टेट कोटा का क्या अंतर है? जानें AIIMS, JIPMER, सरकारी और प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन की पूरी प्रक्रिया और नियम।

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NEET UG Counselling 2026: नीट यूजी 2026 की परीक्षा पास करने के बाद अब छात्रों के लिए सबसे अहम पड़ाव शुरू हो चुका है— नीट यूजी काउंसलिंग (NEET UG Counselling)। मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (MCC) ने आधिकारिक वेबसाइट mcc.nic.in पर काउंसलिंग रजिस्ट्रेशन की शुरुआत कर दी है। लेकिन अधिकतर छात्र और उनके माता-पिता इस बात को लेकर उलझन में रहते हैं कि ऑल इंडिया कोटा (AIQ) और स्टेट कोटा में क्या अंतर है, और उन्हें किस काउंसलिंग में भाग लेना चाहिए।

यदि आप भी MBBS, BDS, AYUSH या B.Sc Nursing में एडमिशन पाना चाहते हैं, तो इन दोनों काउंसलिंग प्रक्रियाओं के बीच के फर्क को समझना बेहद जरूरी है।

ऑल इंडिया कोटा (AIQ) क्या है और इसमें कौन-कौन सी सीटें आती हैं?

ऑल इंडिया कोटा यानी AIQ काउंसलिंग का संचालन केंद्र सरकार की संस्था मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (MCC) द्वारा किया जाता है। इसके तहत देश भर की सेंट्रल यूनिवर्सिटीज, ऑल इंडिया इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (AIIMS), जवाहरलाल इंस्टिट्यूट ऑफ पोस्टग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (JIPMER), डीम्ड यूनिवर्सिटीज, एम्प्लॉईज स्टेट इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन (ESIC) के संस्थानों और आर्ड फोर्सेज मेडिकल कॉलेज (AFMC) पुणे की 100 प्रतिशत सीटों पर एडमिशन एमसीसी काउंसलिंग से ही होता है।

इस काउंसलिंग की सबसे खास बात यह है कि इसमें देश के किसी भी राज्य का छात्र हिस्सा ले सकता है। इसके लिए किसी राज्य के मूल निवासी होने का प्रमाण पत्र नहीं देना होता।

स्टेट कोटा काउंसलिंग क्या है?

राज्य कोटा यानी स्टेट कोटा काउंसलिंग की जिम्मेदारी संबंधित राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों की काउंसलिंग कमेटियों के पास होती है। इसके तहत ये सीटें आती हैं:

सरकारी कॉलेजों की 85% सीटें: राज्य के सरकारी मेडिकल और डेंटल कॉलेजों की बची हुई 85% सीटें।

प्राइवेट और सेल्फ-फाइनेंस कॉलेज: राज्य के सभी प्राइवेट मेडिकल कॉलेज, डेंटल कॉलेज और एनआरआई (NRI) कोटा की सीटें। स्टेट कोटा काउंसलिंग में भाग लेने के लिए छात्रों को संबंधित राज्य का मूल निवासी होना अनिवार्य होता है।

आरक्षण नियम में क्या अंतर है?

AIQ में केंद्र सरकार के नियम: AIQ सीटों पर केंद्र सरकार का आरक्षण लागू होता है, जिसमें एससी (SC - 15%), एसटी (ST - 7.5%), ओबीसी-एनसीएल (OBC-NCL - 27%), ईडब्ल्यूएस (EWS - 10%) और पीडब्ल्यूडी (PwD - 5%) का कोटा तय है।

स्टेट कोटा में राज्य के नियम: राज्यों की काउंसलिंग में वहां की राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित आरक्षण नीतियां लागू होती हैं।

AYUSH और नर्सिंग कोर्सेज के लिए नियम

आयुष (BAMS, BUMS, BHMS, BSMS): आयुष कोर्सेज की 15% AIQ सीटों पर दाखिले के लिए अलग से AACCC द्वारा काउंसलिंग आयोजित की जाती है।

बी.एससी नर्सिंग: बी.एससी नर्सिंग, मिलिट्री नर्सिंग सर्विस (MNS) और वेटरनरी (VCI) की सीटों पर भी नीट रैंक के आधार पर ही दाखिला मिलता है।

क्या छात्र दोनों काउंसलिंग में एक साथ भाग ले सकते हैं?

हां, यदि आप नीट यूजी 2026 में क्वालिफाई हैं और अपने राज्य का डोमिसाइल रखते हैं, तो आप MCC की ऑल इंडिया कोटा (AIQ) और अपने राज्य की स्टेट कोटा काउंसलिंग—दोनों में एक साथ आवेदन कर सकते हैं। इससे आपके पास एक बेहतरीन मेडिकल कॉलेज में एडमिशन पाने का मौका दोगुना हो जाता है।

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लेखक के बारे में

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शॉर्ट बायो: प्राची लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में कंटेंट प्रोड्यूसर हैं। पिछले 2 वर्षों से वे करियर, शिक्षा और सरकारी नौकरियों से जुड़े विषयों पर लिख रही हैं। मुश्किल खबरों को आसान भाषा में पाठकों तक पहुंचाना उनकी विशेषता है। वे 2024 से लाइव हिन्दुस्तान की करियर टीम का हिस्सा हैं।

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प्राची ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत 'नन्ही खबर' से की थी, जहां उन्होंने जमीनी स्तर पर खबरों के महत्व को समझा। इसके बाद, उन्होंने 'सी.वाई. फ्यूचर लिमिटेड' और 'कुटुंब' जैसे प्लेटफॉर्म्स पर बतौर कंटेंट राइटर काम करते हुए अपनी लेखनी और रिसर्च स्किल्स को निखारा। लाइव हिन्दुस्तान से जुड़ने के बाद, वे करियर डेस्क पर सक्रिय हैं और छात्रों के लिए करियर विकल्पों, बोर्ड परीक्षाओं, जॉब और प्रतियोगी परीक्षाओं की बारीकियों को कवर कर रही हैं।

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प्राची ने देश के प्रतिष्ठित भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC) से इंग्लिश जर्नलिज्म में पीजी डिप्लोमा किया है। उनकी शैक्षणिक नींव दिल्ली यूनिवर्सिटी से है, जहां से उन्होंने इतिहास में ग्रेजुएशन की पढ़ाई की। इतिहास की अच्छी जानकारी होने के कारण, वे आज की खबरों को बेहतर तरीके से समझ और समझा पाती हैं। यही वजह है कि उनके लेखों में जानकारी पूरी तरह सटीक और अधिक भरोसेमंद होती है।

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