AI के दौर में किस हुनर की होगी सबसे ज्यादा कद्र? निखिल कामत के शो में क्या बोले एंथ्रोपिक CEO डारियो अमोदेई
Claude जैसे धांसू एआई मॉडल बनाने वाली कंपनी एंथ्रोपिक के सीईओ डारियो अमोदेई ने निखिल कामत के पॉडकास्ट में बताया कि एआई के इस बदलते दौर में क्रिटिकल थिंकिंग, इंसानी समझ और प्रोडक्ट डिजाइन जैसे हुनर की सबसे ज्यादा जरूरत होगी।

एआई यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर इन दिनों हर तरफ एक ही चर्चा है कि क्या आने वाले वक्त में हमारी नौकरियां बचेंगी? जब मशीनें दिन-ब-दिन इंसान से ज्यादा होशियार हो रही हैं, तो फिर इंसानों का क्या काम रह जाएगा? हाल ही में जेरोधा के को-फाउंडर निखिल कामत के मशहूर पॉडकास्ट में एंथ्रोपिक (Anthropic) कंपनी के सीईओ डारियो अमोदेई ने शिरकत की और इन्हीं सुलगते सवालों के बड़े ही बेबाक जवाब दिए। 'क्लॉड' (Claude) जैसे धांसू एआई मॉडल को बनाने वाली कंपनी के मुखिया ने बातचीत के दौरान एक बहुत बड़ी तस्वीर साफ की है। उन्होंने सीधे शब्दों में समझाया है कि एआई के इस तूफान में मशीनें क्या छीनेंगी, इससे ज्यादा जरूरी यह समझना है कि इस नए दौर में कौन से इंसानी हुनर सबसे ज्यादा काम आएंगे। अगर आप भी भविष्य के बाजार और अपने करियर को लेकर फिक्रमंद हैं तो यह खबर आपके लिए जरूरी है। आइए विस्तार से समझते हैं कि एआई के जमाने में आखिर किन चीजों की सबसे ज्यादा डिमांड रहने वाली है।
क्रिटिकल थिंकिंग बनेगी सबसे बड़ी ताकत
पॉडकास्ट में जब यह सवाल उठा कि भविष्य में सफलता की चाबी क्या होगी, तो डारियो का सबसे ज्यादा जोर क्रिटिकल थिंकिंग यानी गहराई से सोचने और परखने की ताकत पर था। अब जरा सोचिए, जब एआई पलक झपकते ही कुछ भी लिख सकता है, कोई भी शानदार तस्वीर बना सकता है और हूबहू असली लगने वाले वीडियो तैयार कर सकता है, तो क्या असली है और क्या नकली, यह कौन तय करेगा? यहीं पर इंसानी दिमाग की सबसे ज्यादा जरूरत पड़ेगी। डारियो के मुताबिक, आने वाले कल में स्ट्रीट स्मार्टनेस यानी व्यावहारिक समझ सबसे अहम हुनर होगा। जो इंसान इंटरनेट पर मौजूद जानकारी को जांचने, गलत बातों को पकड़ने और सही तथ्यों के बीच का फर्क समझने की काबिलियत रखेगा, वही इस नई दुनिया का सिकंदर बनेगा। बिना सोचे-समझे चीजों पर यकीन कर लेने वालों के लिए आगे का सफर काफी मुश्किल होने वाला है।
इंसानी समझ और प्रोडक्ट डिजाइन का कोई सानी नहीं
डारियो ने यह साफ कर दिया कि कोडिंग का काम भले ही बहुत जल्द एआई के हवाले हो जाए, लेकिन किसी भी सॉफ्टवेयर या प्रोडक्ट को बनाने की जो पूरी प्रक्रिया होती है उसमें इंसानों की हमेशा जरूरत रहेगी। एक मशीन कोड लिख सकती है, लेकिन बाजार में किस चीज की कमी है? ग्राहकों या यूजर्स की असल जरूरत क्या है? एक अच्छा प्रोडक्ट कैसे डिजाइन होना चाहिए? और सबसे बड़ी बात, अलग-अलग एआई सिस्टम्स को एक साथ मिलाकर एक टीम की तरह कैसे काम में लेना है? इन सारे सवालों के जवाब एक इंसान ही खोज सकता है। भावनाओं को समझना और यूजर के नजरिए से सोचना एक ऐसा काम है जिसे कोई भी एल्गोरिदम पूरी तरह से कॉपी नहीं कर सकता।
वो काम जहां मशीनें नहीं पहुंच सकतीं
युवाओं को सलाह देते हुए एंथ्रोपिक के सीईओ ने एक बेहद पते की बात कही। उनका कहना है कि हमें एआई से टकराने के बजाय, उसके साथ कदमताल करना सीखना चाहिए। अगर आप भविष्य के लिए खुद को तैयार कर रहे हैं, तो ऐसी फील्ड चुनें जहां एआई आपके लिए एक मजबूत सहारे का काम करे, न कि आपके लिए खतरा बने। उन्होंने इसके लिए सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी और पारंपरिक इंजीनियरिंग की मिसाल दी। जो काम सीधे तौर पर हमारी भौतिक दुनिया यानी फिजिकल वर्ल्ड से जुड़े हैं, वहां इंसानी दखल बना रहेगा। इसके अलावा, ऐसे ह्यूमन-सेंट्रिक प्रोफेशन्स जहां सीधे तौर पर इंसानी बातचीत, हाव-भाव, एक-दूसरे को समझने और आपसी रिश्तों की जरूरत होती है, वे नौकरियां पूरी तरह से महफूज रहेंगी।
पॉडकास्ट में डारियो ने एक दिलचस्प गणित भी समझाया। अगर आप अपने काम का सिर्फ 5 फीसदी हिस्सा खुद करते हैं और बाकी का 95 फीसदी हिस्सा एआई आपके लिए कर देता है, तो आपकी काम करने की रफ्तार और उत्पादकता 20 गुना बढ़ जाती है। यानी आप पहले से कहीं ज्यादा काम कर सकते हैं। लेकिन, इस पूरी चर्चा में उन्होंने एक सख्त चेतावनी भी दी। क्या एआई हमें बेवकूफ या आलसी बना रहा है? डारियो का जवाब था कि अगर हम इसका लापरवाही से इस्तेमाल करेंगे, तो हां! उन्होंने छात्रों के होमवर्क के लिए एआई के इस्तेमाल को सीधे तौर पर चोरी बताया।
अगर आप बिना समझे सिर्फ कमांड देकर काम करवा लेंगे, तो धीरे-धीरे आप अपनी ही काबिलियत खो देंगे। इसे उन्होंने डी-स्किलिंग कहा है। निखिल कामत ने जब बिना कोडिंग जानने वालों की मुश्किलों का जिक्र किया, तो डारियो ने साफ कहा कि एआई को सीखने का सबसे बेहतरीन तरीका है खुद हाथ आजमाना। आपको टूल्स का इस्तेमाल करके देखना होगा, तभी आप प्रॉम्ट लिखना और मशीनों से सही काम लेना सीख पाएंगे। यानी इस पूरी बातचीत लब्बोलुआब यह है कि एआई के इस नए दौर में डिग्रियां और रट्टा मारने की आदत शायद उतनी मायने न रखें, जितना कि आपका जमीनी हुनर, नई चीजों को अपनाने की ललक और सही-गलत को परखने की ताकत।
लेखक के बारे में
Himanshu Tiwariशॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।
परिचय एवं अनुभव
हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।
लेखन की सोच और मकसद
हिमांशु के लिए पत्रकारिता का मतलब सिर्फ सूचना देना नहीं है, बल्कि पाठक को सोचने की जगह देना भी है। खासकर करियर और शिक्षा के क्षेत्र में वह यह मानते हैं कि एक गलत या अधूरी खबर किसी छात्र की पूरी तैयारी को भटका सकती है। इसलिए उनके लेखन में सरल भाषा, ठोस तथ्य और व्यावहारिक नजरिया हमेशा प्राथमिकता में रहता है। उनकी कोशिश रहती है कि पाठक को सिर्फ खबर की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी समझ आए कि उस खबर का उसके जीवन और भविष्य से क्या रिश्ता है।
शिक्षा और अकादमिक पृष्ठभूमि
हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।
रुचियां और निजी झुकाव
काम से इतर हिमांशु की गहरी रुचि समकालीन इतिहास, समानांतर सिनेमा और दर्शन में रही है। राजनीति और विदेश नीति पर पढ़ना-लिखना उन्हें विशेष रूप से पसंद है। इसी रुचि के चलते उन्होंने दो लोकसभा चुनावों और दर्जनों विधानसभा चुनावों की कवरेज की, जहां राजनीति को उन्होंने बेहद नजदीक से देखा और समझा। चुनावी आंकड़ों की बारीकियां, नेताओं के भाषण, जमीनी मुद्दे और जनता की प्रतिक्रियाएं, इन सभी पहलुओं को समेटते हुए उन्होंने सैकड़ों खबरें और विश्लेषण तैयार किए, जो राजनीतिक प्रक्रिया की गहरी समझ को दर्शाते हैं।
विशेषज्ञताएं
- शिक्षा, करियर और नौकरियों से जुड़ी खबरों पर विशेष रुचि और निरंतर लेखन
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- अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और विदेश नीति से जुड़े विषयों का विश्लेषणात्मक लेखन
- राजनीति, चुनावी आंकड़ों और जमीनी मुद्दों पर सरल और तथ्यपरक एक्सप्लेनर तैयार करने का अनुभव


