AFMC पुणे से किया MBBS, अब भारतीय सेना में बने लेफ्टिनेंट देव गुप्ता
राजस्थान के खैरथल के रहने वाले देव गुप्ता ने अपनी मेहनत और लगन के दम पर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। उन्होंने भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट के पद पर जगह बनाई है। उनकी पहली तैनाती देहरादून में हुई है, जहां वह एक सैन्य अधिकारी के रूप में देश की सेवा करेंगे।

कहते हैं कि कुछ करने का जज्बा हो, तो मंजिल तक पहुंचा जा सकता है। एक ऐसे ही जज्बे की कहानी है देव गुप्ता की। राजस्थान के खैरथल के रहने वाले देव गुप्ता ने अपनी मेहनत और लगन के दम पर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। उन्होंने भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट के पद पर जगह बनाई है। उनकी पहली तैनाती देहरादून में हुई है, जहां वह एक सैन्य अधिकारी के रूप में देश की सेवा करेंगे। उनकी इस सफलता से परिवार के साथ-साथ पूरे क्षेत्र में खुशी का माहौल है।
2021 में हुआ था एफएमसी में चयन
बता दें कि देव गुप्ता, मुकेश गुप्ता के बेटे हैं। दैनिक भास्कर में छपी एक रिपोर्ट में उनके पिता के हवाले से बताया गया कि साल 2021 में देव का चयन पुणे स्थित प्रतिष्ठित आर्म्ड फोर्सेज मेडिकल कॉलेज (AFMC) में एमबीबीएस कोर्स के लिए हुआ था। मेडिकल की पढ़ाई के दौरान उन्होंने कड़ी मेहनत, अनुशासन और समर्पण के साथ खुद को साबित किया। पढ़ाई पूरी करने के बाद अब उन्हें भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट के रूप में नियुक्ति मिली है।
जैसे ही देव के लेफ्टिनेंट बनने की खबर सामने आई, उनके घर पर बधाई देने वालों का तांता लग गया। रिश्तेदार, मित्र, शुभचिंतक और क्षेत्र के लोग उनकी इस उपलब्धि पर गर्व जता रहे हैं। देव गुप्ता की सफलता उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो बड़े सपने देखते हैं। उनकी कहानी बताती है कि दृढ़ संकल्प, निरंतर मेहनत और अनुशासन के साथ किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।
AFMC से MBBS करने वाली आस्था बिष्ट भी बनीं लेफ्टिनेंट
इसके अलावा उत्तराखंड की राजधानी देहरादून की रहने वाली आस्था बिष्ट ने अपनी मेहनत और लगन के दम पर भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बनकर परिवार और पूरे प्रदेश का नाम रोशन किया है। पुणे स्थित आर्म्ड फोर्सेज मेडिकल कॉलेज (AFMC) से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्हें भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट के पद पर नियुक्ति मिली है। आस्था का परिवार मूल रूप से चमोली जिले के नारायणबगड़ विकासखंड के पालछुनी गांव का रहने वाला है। फिलहाल उनका परिवार देहरादून के लोअर नेहरूग्राम में रहता है।
भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट कैसे बनते हैं?
इंडियन आर्मी में लेफ्टिनेंट की पोस्ट बेहद शानदार और प्रतिष्ठित मानी जाती है। यह सिर्फ एक पद नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी, सम्मान और देश सेवा का अवसर है। लेफ्टिनेंट पद पर चयनित कैंडिडेट्स को न सिर्फ शानदार सैलरी मिलती है, बल्कि इसके साथ कई आकर्षक भत्ते और सुविधाएं भी मिलती हैं। लेफ्टिनेंट भारतीय सेना में शुरुआती रैंकिंग वाला अधिकारी होता है। लेफ्टिनेंट आमतौर पर 40 से 60 अधीनस्थ या सैनिकों की एक इकाई का प्रभारी होता है, जो सीधे उसे रिपोर्ट करते हैं। इस पद पर रहते हुए एक लेफ्टिनेंट को अपनी टुकड़ी का नेतृत्व करना होता है, उन्हें प्रशिक्षित करना होता है और विभिन्न अभियानों में उनका मार्गदर्शन करना होता है। यह एक चुनौतीपूर्ण लेकिन बेहद संतोषजनक भूमिका है।
भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बनने के प्रमुख रास्ते
1. NDA (National Defence Academy)
12वीं पास छात्र NDA परीक्षा के जरिए भारतीय सेना में अधिकारी बनने का सपना पूरा कर सकते हैं। यह परीक्षा UPSC आयोजित करता है। चयन प्रक्रिया में लिखित परीक्षा, SSB इंटरव्यू और मेडिकल टेस्ट शामिल होते हैं। चयनित उम्मीदवार तीन साल तक NDA में प्रशिक्षण लेते हैं। इसके बाद उन्हें इंडियन मिलिट्री अकादमी (IMA), देहरादून में एक साल की ट्रेनिंग दी जाती है। प्रशिक्षण पूरा होने पर उन्हें लेफ्टिनेंट के पद पर कमीशन मिलता है।
2. CDS (Combined Defence Services) परीक्षा
ग्रेजुएशन कर चुके उम्मीदवार CDS परीक्षा के माध्यम से भी भारतीय सेना में अधिकारी बन सकते हैं। इस परीक्षा का आयोजन भी UPSC करता है। इसमें लिखित परीक्षा, SSB इंटरव्यू और मेडिकल टेस्ट होता है। चयनित अभ्यर्थियों को IMA देहरादून या OTA (Officers Training Academy), चेन्नई में प्रशिक्षण दिया जाता है। ट्रेनिंग पूरी होने के बाद उन्हें लेफ्टिनेंट के पद पर नियुक्त किया जाता है।
3. टेक्निकल एंट्री स्कीम (TES)
फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ्स (PCM) विषयों के साथ 12वीं पास छात्र TES के लिए आवेदन कर सकते हैं। इस एंट्री में लिखित परीक्षा नहीं होती। उम्मीदवारों का चयन SSB इंटरव्यू और मेडिकल टेस्ट के आधार पर किया जाता है। चयनित अभ्यर्थियों को इंजीनियरिंग की पढ़ाई और सैन्य प्रशिक्षण के बाद लेफ्टिनेंट के रूप में कमीशन दिया जाता है।
4. NCC स्पेशल एंट्री स्कीम
जिन उम्मीदवारों के पास NCC का 'C' सर्टिफिकेट होता है, वे NCC स्पेशल एंट्री के जरिए आवेदन कर सकते हैं। इस एंट्री में लिखित परीक्षा नहीं होती। उम्मीदवार सीधे SSB इंटरव्यू और मेडिकल टेस्ट के आधार पर चयनित होते हैं। सफल अभ्यर्थियों को प्रशिक्षण के बाद भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बनाया जाता है।
लेखक के बारे में
Dheeraj Palसंक्षिप्त विवरण:
धीरज पाल को पत्रकारिता के क्षेत्र में 7 साल का अनुभव है। लाइव हिन्दुस्तान में काम करते हुए इन्हें 4 साल हो गए हैं। धीरज एजुकेशन रिपोर्टर के तौर पर काम कर चुके हैं। अपने करियर के दौरान धीरज ने राजनीति समाचार, एजुकेशन बीट के लिए ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की है।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
धीरज ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए इन मीडिया स्टडीज और राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज से जनसंचार एवं पत्रकारिता से परास्नातक की पढ़ाई की। धीरज पाल ने अपने पत्रकारिता कर की शुरुआत एपीएन न्यूज चैनल से की। इसके बाद उन्होंने लोकमत न्यूज हिंदी और एनडीटीवी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। हिंदुस्तान लाइव में यूपी बोर्ड से लेकर उन्होंने लोकसभा चुनाव कवर करने साथ-साथ खेल जैसे बीट पर काम किया। अब इनका एकमात्र उद्देश्य करियर और एजुकेशन से जुड़ी रुचिगत, सरल, प्रमाणिक और पाठक-हितैषी रूप में प्रस्तुत करना है।
व्यक्तिगत रुचियां
उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के निवासी धीरज पाल को पत्रकारिता और ज्योतिषीय अध्ययन के साथ-साथ घूमने, किताबें पढ़ने और क्रिकेट खेलने का शौक है।
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