खत्म हो UPSC का CSAT, बदले प्रीलिम्स का पैटर्न, बीजेपी सांसद ने संसद में क्या दिया तर्क, रह चुके हैं IPS अफसर
बीजेपी एमपी बृजलाल ने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के एप्टीट्यूड टेस्ट (सीसैट) को खत्म करने या तर्कसंगत बनाने की मांग करते हुए कहा कि यह परीक्षा सिविल सेवाओं में विविधता के रास्ते में बाधा बन रही है।

राज्यसभा में भारतीय जनता पार्टी के सांसद बृजलाल ने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के एप्टीट्यूड टेस्ट (सीसैट) को खत्म करने या तर्कसंगत बनाने की मांग करते हुए कहा कि यह परीक्षा सिविल सेवाओं में विविधता के रास्ते में बाधा बन रही है। उच्च सदन में शून्यकाल के दौरान यह मुद्दा उठाते हुए बृजलाल ने कहा कि सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा आगामी 24 तारीख को होने वाली है। उन्होंने कहा कि प्रारंभिक परीक्षा के दो प्रश्नपत्र-सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र-1 (जीएस-1) और सीसैट प्रश्नपत्र-2 (जीएस-2) होते हैं। उन्होंने बताया कि सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र-1 में 200 अंक के 100 प्रश्न होते हैं और प्रत्येक गलत उत्तर पर 0.66 अंक की निगेटिव मार्किंग प्रणाली लागू होती है। वहीं सीसैट में 200 अंक के 80 प्रश्न होते हैं, जिसमें हर गलत उत्तर पर 0.833 अंक की नेगेटिव मार्किंग होती है।
CSAT में आर्ट्स वालों को दिक्कत होती है
बृजलाल ने कहा 'सीसैट एक क्वालीफाइंग पेपर है, जिसमें न्यूनतम 33 प्रतिशत यानी 66 अंक लाना अनिवार्य है। यदि कोई अभ्यर्थी सीसैट में पास नहीं होता, तो जीएस-1 में उसकी उत्तर पुस्तिका की जांच ही नहीं की जाती।' उन्होंने कहा कि इस वजह से प्रतिनिधित्व असंतुलित हो गया है। सफल उम्मीदवारों में करीब 65 प्रतिशत इंजीनियर होते हैं, जबकि ह्यूमैनिटीज और आर्ट्स वर्ग के अभ्यर्थियों को सीसैट के तकनीकी, गणित आधारित प्रश्नों में कठिनाई होती है।
सीसैट को समाप्त किया जाए, समान अवसर मिले
इसे सिविल सेवाओं में विविधता के लिए सबसे बड़ी बाधा बताते हुए बृजलाल ने सरकार से मांग की कि या तो सीसैट को समाप्त किया जाए या इसे इस तरह तर्कसंगत बनाया जाए कि इंजीनियरिंग, विज्ञान, चिकित्सा और कला वर्ग, सभी पृष्ठभूमि के अभ्यर्थियों के लिए समान अवसर सुनिश्चित हो सके।
उन्होंने पारदर्शिता की कमी का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि सीसैट में असफल होने वाले अभ्यर्थियों को न तो उनके अंक बताए जाते हैं और न ही कोई फीडबैक दिया जाता है, जबकि केवल सफल उम्मीदवारों को ही उनके अंक मिलते हैं। उन्होंने कहा, पारदर्शिता की कमी समाप्त होनी चाहिए, ताकि सिविल सेवा भर्ती प्रक्रिया में न्याय और समानता सुनिश्चित की जा सके।
सांसद बृजलाल आईपीएस अफसर (1997 बैच) रह चुके हैं। वह यूपी के डीजीपी भी रह चुके हैं।
सीसैट का टेढ़ा पैटर्न
आपको बता दें कि यूपीएससी सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में दो पेपर होते हैं - पेपर 1 जनरल स्टडीज का होता है और दूसरा पेपर सीसैट (CSAT) का होता है। सीसैट का पैटर्न ऐसा होता है कि बहुत से अभ्यर्थी तो कई अटेम्प्ट के बाद भी प्रीलिम्स पास नहीं कर पाते। कई अभ्यर्थी ऐसे होते हैं जो पिछले प्रयासों में इंटरव्यू व मेन्स तक पहुंचने के बावजूद प्रीलिम्स में गच्चा खा जाते हैं। प्रीलिम्स में सीसैट ( CSAT ) के पेपर से निपटना ज्यादातर अभ्यर्थियों के लिए चुनौती रहता है खासतौर पर आर्ट्स बैकग्राउंड वालों के लिए।
यूपीएससी भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस), भारतीय विदेश सेवा (आईएफएस) , भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस), भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) समेत की तरह की सिविल सेवओं के लिए अधिकारियों का चयन करने के लिए प्रतिवर्ष तीन चरणों में प्रारंभिक, मुख्य और साक्षात्कार सिविल सेवा परीक्षा आयोजित कराती है।
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