जिसने 2019 में पाक को दिया था मुंहतोड़ जवाब, अब उड़ाएगा यात्री विमान; कितने पढ़े-लिखे हैं अभिनंदन वर्धमान
एयर मार्शल के बेटे और वीर चक्र विजेता ग्रुप कैप्टन अभिनंदन वर्धमान ने 22 साल की सेवा के बाद वायुसेना से रिटायरमेंट लेकर फ्लाई91 एयरलाइन जॉइन की है। जानिए उनकी पढ़ाई और ट्रेनिंग की पूरी कहानी।

2019 के हवाई मुकाबले में अपनी निडरता से पूरे देश का दिल जीतने वाले ग्रुप कैप्टन अभिनंदन वर्धमान ने भारतीय वायुसेना (IAF) से 22 साल की लंबी और गौरवशाली सेवा के बाद अपनी जिंदगी की नई उड़ान शुरू की है। 31 मार्च 2026 को वायुसेना से रिटायर होने के बाद अब उन्होंने कमर्शियल एविएशन की दुनिया में कदम रखा है। 43 वर्षीय अभिनंदन अगस्त 2026 में गोवा आधारित रीजनल एयरलाइन 'FLY91' से बतौर पायलट जुड़े हैं। फिलहाल वे पैसेंजर एयरक्राफ्ट उड़ाने के लिए जरूरी टाइप ट्रेनिंग और रेग्युलेटरी क्लियरेंस की प्रक्रिया पूरी कर रहे हैं। फाइटर जेट के कॉकपिट से निकलकर यात्री विमान की कमान संभालने तक का उनका यह सफर जितना रोमांचक है उसकी नींव उतनी ही मजबूत उनकी पढ़ाई, अनुशासन और कड़े प्रशिक्षण से बनी है।
घर में मिला देशभक्ति का माहौल
अभिनंदन वर्धमान के खून में ही देशसेवा और अनुशासन रचा-बसा है। उनका जन्म एक ऐसे परिवार में हुआ जहां पढ़ाई-लिखाई और सेना के प्रति समर्पण को सबसे ऊपर रखा जाता था। उनके पिता सिंहकुट्टी वर्धमान खुद भारतीय वायुसेना में एयर मार्शल के पद से रिटायर हुए हैं, जबकि उनकी मां एक डॉक्टर हैं। घर के इसी बौद्धिक और अनुशासित माहौल ने अभिनंदन के सपनों को बचपन में ही पंख दे दिए थे। उनकी शुरुआती पढ़ाई-लिखाई तमिलनाडु के नामी सैनिक स्कूल, अमरावतीनगर से हुई। सैनिक स्कूल का माहौल आम स्कूलों से बिल्कुल जुदा होता है। यहां किताबों के ज्ञान के साथ-साथ शारीरिक मजबूती, कड़ा अनुशासन, लीडरशिप और मिलिट्री बैकग्राउंड की समझ विकसित की जाती है। अमरावतीनगर सैनिक स्कूल में पढ़ाई के दौरान ही अभिनंदन ने खुद को भविष्य की बड़ी चुनौतियों के लिए ढालना शुरू कर दिया था। पढ़ाई में अव्वल रहने के साथ-साथ वे स्कूल की खेलकूद और अनुशासन से जुड़ी हर गतिविधि में आगे रहते थे।
दिया एनडीए का कठिन इम्तिहान
सैनिक स्कूल से स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद अभिनंदन ने नेशनल डिफेंस एकेडमी (एनडीए) का रुख किया। एनडीए की प्रवेश परीक्षा और उसके बाद सेवा चयन बोर्ड (एसएसबी) के इंटरव्यू को देश के सबसे कठिन टेस्ट में गिना जाता है। अभिनंदन ने अपनी काबिलियत के बल पर इसे पास किया और एनडीए में दाखिला लिया। एनडीए के दौरान उन्होंने न केवल सैन्य रणनीतियों की पढ़ाई की, बल्कि मानसिक और शारीरिक रूप से खुद को बेहद मजबूत बनाया।
19 जून 2004 को उन्हें भारतीय वायुसेना की फाइटर स्ट्रीम में फ्लाइंग ऑफिसर के पद पर कमीशन मिला। वायुसेना में शामिल होने के बाद भी उनका पढ़ाई और ट्रेनिंग का दौर रुका नहीं। उन्होंने बठिंडा और हलवारा स्थित वायुसेना के प्रमुख ट्रेनिंग सेंटरों में एडवांस फाइटर फ्लाइंग की ट्रेनिंग ली। शुरुआत में उन्होंने वायुसेना के सबसे ताकतवर लड़ाकू विमानों में शामिल सुखोई-30 एमकेआई को उड़ाने में महारत हासिल की। इसके बाद उन्हें मिग-21 बाइसन स्क्वाड्रन में तैनात किया गया।
मिल चुका है वीर चक्र
अभिनंदन की इसी पढ़ाई, ट्रेनिंग और दिमागी चुस्ती का सबसे बड़ा इम्तिहान फरवरी 2019 में हुआ। भारत और पाकिस्तान के बीच हुए हवाई मुकाबले के दौरान उनका मिग-21 बाइसन विमान हिट हो गया था। वे पैराशूट से सुरक्षित बाहर निकले, लेकिन पाकिस्तान के कब्जे वाले इलाके में जा गिरे। पाकिस्तान की हिरासत में लगभग तीन दिन रहने के दौरान उन्होंने जिस संयम, समझदारी और निडरता का परिचय दिया, उसने दुनिया भर में भारतीय सेना का मान बढ़ाया। 1 मार्च 2019 को वाघा बॉर्डर के जरिए उनकी भारत वापसी हुई। इस अदम्य साहस के लिए सरकार ने उन्हें देश के तीसरे सबसे बड़े युद्धकालीन वीरता सम्मान 'वीर चक्र' से नवाजा। इसके बाद दिसंबर 2021 में उन्हें ग्रुप कैप्टन के पद पर प्रमोट किया गया था।
लगभग 22 साल तक देश के आसमान की रखवाली करने के बाद अभिनंदन ने 31 मार्च 2026 को IAF को अलविदा कह दिया। अब वे गोवा और हैदराबाद में बेस रखने वाली रीजनल एयरलाइन फ्लाई91 के साथ नई पारी खेल रहे हैं। यह एयरलाइन एटीआर 72-600 विमानों का संचालन करती है। लड़ाकू विमान और यात्री विमान को उड़ाने की तकनीकों व नियमों में काफी फर्क होता है। यही वजह है कि अभिनंदन अभी अपनी टाइप ट्रेनिंग पूरी कर रहे हैं और जल्द ही सभी क्लियरेंस मिलने के बाद यात्रियों के साथ आसमान में उड़ान भरते नजर आएंगे।


