JEE Advanced 2026 Topper: न नींद की कुर्बानी दी, न लिया तनाव; आरोही देशपांडे कैसे बनीं देश की फीमेल टॉपर
JEE Advanced 2026 में ऑल इंडिया रैंक 77 हासिल कर देश की फीमेल टॉपर बनीं पुणे की आरोही देशपांडे ने बिना तनाव और भरपूर नींद लेकर अपनी कामायाबी तय की है। आइए जानते हैं उनका सफर।

JEE Advanced 2026 Topper: अक्सर माना जाता है कि देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक जेईई एडवांस्ड को पास करने के लिए चौबीसों घंटे पढ़ाई करनी पड़ती है। चैन की नींद छोड़नी पड़ती है और खुद को एक बंद कमरे में कैद कर लेना पड़ता है। लेकिन साल 2026 की जेईई एडवांस्ड परीक्षा में लड़कियों में टॉप करने वाली आरोही देशपांडे ने इस पुरानी सोच को पूरी तरह से बदल दिया है। ऑल इंडिया रैंक 77 हासिल कर देश की सबसे सफल छात्रा बनीं आरोही का मानना है कि सफलता का असली रास्ता बहुत ज्यादा तनाव लेने से नहीं, बल्कि दिमाग को एकदम शांत रखने से होकर गुजरता है। आइए जानते हैं पुणे से कोटा तक और फिर देश के इस सबसे बड़े मुकाम तक पहुंचने की उनकी पूरी कहानी।
बेटी के लिए पुणे से कोटा शिफ्ट हुआ पूरा परिवार
आरोही का यह सफर जितना उनकी अपनी मेहनत का है, उतना ही उनके पूरे परिवार के त्याग का भी है। मूल रूप से महाराष्ट्र के पुणे की रहने वाली आरोही ने कक्षा 8 तक की पढ़ाई अपने होमटाउन में ही की थी। जैसे-जैसे उनकी दिलचस्पी गणित और विज्ञान के विषयों में बढ़ने लगी, उनके परिवार को अंदाजा हो गया कि बेटी के सपनों को एक नई उड़ान देनी होगी। आखिरकार, उनके माता-पिता ने एक बड़ा फैसला लिया और पूरी फैमिली राजस्थान के कोटा शहर में शिफ्ट हो गई ताकि आरोही बिना किसी बाधा के अपनी जेईई की तैयारी कर सकें।
आरोही अपनी इस शानदार कामयाबी का पूरा श्रेय अपने माता-पिता, दादी, भाई और शिक्षकों को देती हैं। वह बताती हैं, "मेरे माता-पिता ने इस पूरे सफर में मेरा बहुत ज्यादा साथ दिया। वे मेरे लिए इस हद तक आगे बढ़े कि उन्होंने अपने काम करने के तरीके को भी बदल लिया। उन्होंने वर्क फ्रॉम होम करना शुरू कर दिया, ताकि घर का माहौल हमेशा मेरी पढ़ाई के अनुकूल बना रहे और मुझे किसी भी तरह की परेशानी न हो।" कोटा में बिताए अपने चार सालों को आरोही कभी न भूलने वाला अनुभव बताती हैं। उनके मुताबिक, वहां के शिक्षकों ने हर कदम पर उनका मार्गदर्शन किया और दोस्तों ने भी हमेशा उनका हौसला बढ़ाया, जिसके लिए वह हमेशा शुक्रगुजार रहेंगी।
क्या दिया कामयाबी का सीक्रेट फॉर्मूला
कोचिंग के गढ़ कोटा में जहां अक्सर बच्चे रैंक, नंबरों और कंपटीशन के भारी दबाव में खो जाते हैं, वहीं आरोही ने खुद को इस मानसिक रेस से पूरी तरह दूर रखा। उनका सोचना है कि जब आप दिमाग को रिलैक्स रखते हैं, तो आपका प्रदर्शन अपने आप कई गुना बेहतर हो जाता है। जेईई मेन 2026 के बाद इंटरनेट पर दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने अपनी इस सोच का खुलासा किया था। आरोही ने बताया था कि जब उन्होंने खुद पर से दबाव को कम किया, तो उनके नंबरों में बहुत अच्छा सुधार देखने को मिला। आरोही ने कहा, “मैं बहुत ही शांत और रिलैक्स मूड के साथ परीक्षा देने गई थी। आप जितना कम यह सोचेंगे कि यह परीक्षा आपके लिए बहुत ज्यादा जरूरी है या इसके बिना दुनिया खत्म हो जाएगी, आप परीक्षा वाले दिन उतना ही बेहतर परफॉर्म कर पाएंगे।”
न तो नींद से कोई समझौता किया और न ही की पागलों जैसी पढ़ाई
आरोही ने उस पुराने मिथक को भी पूरी तरह से खारिज कर दिया कि टॉपर बनने के लिए रात-रात भर जागना या लगातार 14-16 घंटे पढ़ना जरूरी है। वह कहती हैं कि उन्होंने कभी भी अपनी सेहत और नींद के साथ कोई खिलवाड़ नहीं किया। आरोही ने कहा, "मैं उतनी ही नींद लेती हूं जितनी मेरे शरीर को जरूरत होती है। मुझे नहीं लगता कि बहुत लंबे समय तक बिना ब्रेक के लगातार पढ़ते रहने से आपकी प्रोडक्टिविटी (काम करने की क्षमता) बढ़ जाती है।"
घंटों किताब लेकर बैठे रहने के बजाय आरोही ने स्मार्ट स्टडी और सलीके से तैयारी करने पर भरोसा किया। वह अपनी पढ़ाई को बहुत व्यवस्थित रखती थीं। केमिस्ट्री जैसे उलझाने वाले विषय को आसान बनाने के लिए उन्होंने खास कलर-कोडिंग तकनीक का इस्तेमाल किया। वह अलग-अलग रंगों के पेन से अपने शॉर्ट नोट्स तैयार करती थीं ताकि रिवीजन के वक्त चीजें आसानी से और बहुत जल्दी समझ में आ सकें। उनके लिए तैयारी का मतलब पढ़ाई के घंटे बढ़ाना नहीं था, बल्कि निरंतरता बनाए रखना और अपने मानसिक स्वास्थ्य को ठीक रखना था।
लेखक के बारे में
Himanshu Tiwariशॉर्ट बायो: हिमांशु तिवारी पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और मौजूदा वक्त में लाइव हिन्दुस्तान के करियर टीम से जुड़े हुए हैं।
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हिमांशु तिवारी डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम हैं। बीते 10 सालों से वह लगातार पत्रकारिता में सक्रिय हैं और इस वक्त लाइव हिन्दुस्तान में चीफ सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं और बीते 3 साल से वह इस संस्थान से जुड़े हैं। शिक्षा, करियर, नौकरियों, नीट, जेईई, बैंकिंग, एसएससी और यूपीएससी, यूपीपीएससी, बीपीएससी और आरपीएससी जैसी सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर उनकी खास पकड़ मानी जाती है। हिमांशु ने साल 2016 में पत्रकारिता की शुरुआत एबीपी न्यूज के डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया। इसके बाद वह इंडिया टीवी और जी न्यूज (डीएनए) जैसे बड़े न्यूज चैनलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी हिस्सा रह चुके हैं। हिमांशु तिवारी सिर्फ पत्रकार नहीं, बल्कि एक सजग पाठक और आजीवन विद्यार्थी हैं, उनकी यही खूबी उनके कार्य में परिलक्षित होती है। उनका मानना है कि इन परीक्षाओं से जुड़ी सही और समय पर जानकारी लाखों युवाओं के भविष्य को दिशा दे सकती है, इसलिए वह इस बीट को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की तरह देखते हैं।
लेखन की सोच और मकसद
हिमांशु के लिए पत्रकारिता का मतलब सिर्फ सूचना देना नहीं है, बल्कि पाठक को सोचने की जगह देना भी है। खासकर करियर और शिक्षा के क्षेत्र में वह यह मानते हैं कि एक गलत या अधूरी खबर किसी छात्र की पूरी तैयारी को भटका सकती है। इसलिए उनके लेखन में सरल भाषा, ठोस तथ्य और व्यावहारिक नजरिया हमेशा प्राथमिकता में रहता है। उनकी कोशिश रहती है कि पाठक को सिर्फ खबर की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी समझ आए कि उस खबर का उसके जीवन और भविष्य से क्या रिश्ता है।
शिक्षा और अकादमिक पृष्ठभूमि
हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और फिर जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता के गुर सीखे। जामिया में मिली ट्रेनिंग ने उन्हें यह समझ दी कि पत्रकारिता सिर्फ तेज खबर लिखने का नाम नहीं, बल्कि तथ्यों की जांच, संदर्भ की समझ और संतुलित नजरिए से बात रखने की कला है।
रुचियां और निजी झुकाव
काम से इतर हिमांशु की गहरी रुचि समकालीन इतिहास, समानांतर सिनेमा और दर्शन में रही है। राजनीति और विदेश नीति पर पढ़ना-लिखना उन्हें विशेष रूप से पसंद है। इसी रुचि के चलते उन्होंने दो लोकसभा चुनावों और दर्जनों विधानसभा चुनावों की कवरेज की, जहां राजनीति को उन्होंने बेहद नजदीक से देखा और समझा। चुनावी आंकड़ों की बारीकियां, नेताओं के भाषण, जमीनी मुद्दे और जनता की प्रतिक्रियाएं, इन सभी पहलुओं को समेटते हुए उन्होंने सैकड़ों खबरें और विश्लेषण तैयार किए, जो राजनीतिक प्रक्रिया की गहरी समझ को दर्शाते हैं।
विशेषज्ञताएं
- शिक्षा, करियर और नौकरियों से जुड़ी खबरों पर विशेष रुचि और निरंतर लेखन
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- अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और विदेश नीति से जुड़े विषयों का विश्लेषणात्मक लेखन
- राजनीति, चुनावी आंकड़ों और जमीनी मुद्दों पर सरल और तथ्यपरक एक्सप्लेनर तैयार करने का अनुभव


