ओडिशा की स्कूली किताबों में मिली 1678 गलतियां, ओडिशा विधानसभा की जगह छपी कर्नाटक विधानसभा की तस्वीर
ओडिशा के सरकारी स्कूलों की किताबों में व्याकरण और तथ्यों से जुड़ी 1,678 गंभीर गलतियां पाई गई हैं। सोशल मीडिया पर हंगामा मचने के बाद शिक्षा विभाग ने इन्हें सुधारने का आदेश दिया है।

Odisha School Textbooks: स्कूली किताबें बच्चों के भविष्य और उनके ज्ञान की बुनियाद होती हैं, लेकिन जरा सोचिए कि अगर उन्हीं किताबों में ज्ञान की जगह सैकड़ों गलतियां छप जाएं तो छात्रों का क्या होगा? ऐसा ही एक चौंकाने वाला मामला ओडिशा से सामने आया है, जहां कक्षा 1 से लेकर 8वीं तक की सरकारी किताबों में एक-दो नहीं, बल्कि कुल 1,678 गंभीर गलतियां और कमियां पाई गई हैं।
सोशल मीडिया ने खोली पोल, कैसे सामने आया मामला?
यह पूरा मामला तब खुलकर सामने आया जब कुछ जागरूक शिक्षकों और अभिभावकों ने किताबों में छपी अजीबोगरीब गलतियों के स्क्रीनशॉट और तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर कर दीं। देखते ही देखते ये तस्वीरें इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो गईं, जिसके बाद सरकार और शिक्षा विभाग की हर जगह किरकिरी होने लगी।
ओडिशा प्राथमिक शिक्षा प्राधिकरण (OPEPA) और स्कूल व जन शिक्षा विभाग ने तुरंत इस मामले का संज्ञान लिया। विभाग ने किताबों की समीक्षा के लिए विशेषज्ञों की एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया। जब इस समिति ने बारीकी से किताबों की जांच की, तो आंकड़ों ने सबको हैरान कर दिया। रिपोर्ट में सामने आया कि भाषा से लेकर इतिहास और विज्ञान तक की किताबों में गलतियों की भरमार है।
ओडिशा की स्कूली किताबों में पाई गईं 4 बड़ी गलतियां
- विधानसभा की गलत तस्वीर: किताब में कर्नाटक विधानसभा की तस्वीर छापकर उसे ओडिशा विधानसभा बता दिया गया।
2. भूगोल की बड़ी भूल: ओडिशा की मशहूर 'नियमगिरी पहाड़ियों' को गलती से पड़ोसी राज्य झारखंड में दिखाया गया।
3. जिले का गलत नाम: किताब में 'गंजम जिले' को गलती से "ब्रह्मपुर जिला" लिख दिया गया है।
4. नामों में स्पेलिंग मिस्टेक: शास्त्रीय गायिका सुनंदा पटनायक और स्वतंत्रता सेनानी नीलकंठ दास जैसी महान हस्तियों के नामों की स्पेलिंग गलत छापी गई।
उड़िया, अंग्रेजी और इतिहास की किताबों में सबसे बुरा हाल
सबसे ज्यादा गलतियां उड़िया भाषा, इंग्लिश ग्रामर, इतिहास और भूगोल की किताबों में मिली हैं। कई जगहों पर ऐतिहासिक घटनाओं की तारीखें और साल गलत छपे हुए हैं, तो कहीं महापुरुषों के नामों और तथ्यों में बड़ा हेरफेर है। इसके अलावा, प्राथमिक कक्षाओं की किताबों में स्पेलिंग और व्याकरण की इतनी बुनियादी गलतियां हैं कि इन्हें पढ़ने वाले छोटे बच्चों के मानसिक विकास पर गलत असर पड़ सकता है।
यह लापरवाही केवल प्रिंटिंग की नहीं है, बल्कि यह उन अधिकारियों की भी बड़ी नाकामी है जिन्हें किताबें बाजार में आने से पहले उनकी जांच करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
सरकार का एक्शन और आगे का प्लान
इस बड़ी चूक को स्वीकार करते हुए ओडिशा के शिक्षा विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। विभाग ने सभी संबंधित जिला शिक्षा अधिकारियों और स्कूल प्राचार्यों को तुरंत एक निर्देश जारी किया है। इसके तहत, स्कूलों को एक शुद्धि पत्र भेजा जा रहा है, जिसमें सभी 1,678 गलतियों के सामने उनके सही जवाब लिखे गए हैं। शिक्षकों से कहा गया है कि वे क्लास में नया चैप्टर शुरू करने से पहले छात्रों को उन गलतियों के बारे में बताएं और बच्चों की किताबों में उन्हें हाथों-हाथ ठीक करवाएं।
लेखक के बारे में
Prachiशॉर्ट बायो: प्राची लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में कंटेंट प्रोड्यूसर हैं। पिछले 2 वर्षों से वे करियर, शिक्षा और सरकारी नौकरियों से जुड़े विषयों पर लिख रही हैं। मुश्किल खबरों को आसान भाषा में पाठकों तक पहुंचाना उनकी विशेषता है। वे 2024 से लाइव हिन्दुस्तान की करियर टीम का हिस्सा हैं।
अनुभव और करियर का सफर
प्राची ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत 'नन्ही खबर' से की थी, जहां उन्होंने जमीनी स्तर पर खबरों के महत्व को समझा। इसके बाद, उन्होंने 'सी.वाई. फ्यूचर लिमिटेड' और 'कुटुंब' जैसे प्लेटफॉर्म्स पर बतौर कंटेंट राइटर काम करते हुए अपनी लेखनी और रिसर्च स्किल्स को निखारा। लाइव हिन्दुस्तान से जुड़ने के बाद, वे करियर डेस्क पर सक्रिय हैं और छात्रों के लिए करियर विकल्पों, बोर्ड परीक्षाओं, जॉब और प्रतियोगी परीक्षाओं की बारीकियों को कवर कर रही हैं।
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प्राची ने देश के प्रतिष्ठित भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC) से इंग्लिश जर्नलिज्म में पीजी डिप्लोमा किया है। उनकी शैक्षणिक नींव दिल्ली यूनिवर्सिटी से है, जहां से उन्होंने इतिहास में ग्रेजुएशन की पढ़ाई की। इतिहास की अच्छी जानकारी होने के कारण, वे आज की खबरों को बेहतर तरीके से समझ और समझा पाती हैं। यही वजह है कि उनके लेखों में जानकारी पूरी तरह सटीक और अधिक भरोसेमंद होती है।
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रुचियां
इतिहास की समझ और पत्रकारिता के जुनून के साथ, प्राची को खाली समय में उपन्यास पढ़ना और विश्व सिनेमा देखना पसंद है, जो उनके लेखन में एक नया दृष्टिकोण जोड़ता है।
विशेषज्ञता
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